Videos

झूठे मैं से उत्पन्न होनेवाले विचार घातक होते हैं (False Self generated Thoughts are Harmful) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 11 Sep 2014

झूठे मैं से उत्पन्न होनेवाले विचार घातक होते हैं । अपने ‘झूठे मैं’ के कारण मानव स्वयं के बारे में गलत कल्पनाएँ ही करता रहता है । मानव जब कुछ भी नहीं करता, तब भी उसका मन विचार करते रहता है और विचार यह भी एक कर्म होने के कारण कर्मफल के रूप में इन विचारों का परिणाम अवश्य ही मानव पर होता रहता है । ‘झूठे मैं’ से प्रेरित विचारों

भय से झूठा मैं ताकतवर बनता है (Fear makes False Self more stronger) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 21 August 2014

Fear makes False Self more stronger मानव यदि स्वयं अपनी विवेकबुद्धि का उपयोग नहीं करता, तो उसका सही मैं दुर्बल बनता जाता है । दुर्बल मन पर भय आसानी से कब्जा कर लेता है और भय के कारण बार बार गलत विचार आते रहते हैं । गलत विचारों की शृंखला से झूठा मैं ताकतवर होता है, पनपता है । भय से ‘झूठा मैं’ किस तरह बढता है इस बारे में

झूठा मैं कैसे उत्पन्न होता है (How the False Self gets created) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 21 August 2014

How the False Self gets created मानव के मन में विचारचक्र लगातार चलता रहता है । मानव किसी भी बात के बारे में डर की भावना से सोचता है । इस अनुचित विचारशृंखला से उसका सही मैं दबकर झूठा मैं उसपर हावी हो जाता है । ‘झूठे मैं’  की उत्पत्ति के बारे में  परम पूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धसिंह ने अपने २१ अगस्त २०१४ के प्रवचन में मार्गदर्शन किया, जो आप इस

स्वार्थ (Swaarth)

स्वार्थ हा शब्द व्यवहारात नकारात्मक अर्थाने वापरला जातो. पण स्वार्थ या शब्दाचा खरा मूळ अर्थ ‘स्वत:चा पुरुषार्थ’ असा आहे. स्वार्थ शब्दाच्या खर्‍या अर्थाबद्दल परम पूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या ११ सप्टेंबर २०१४ रोजीच्या मराठी प्रवचनात श्री हरिगुरुग्राम येथे सांगितले, जे आपण या व्हिडियोत पाहू शकता. ॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥ ॥ अंबज्ञ ॥

झूठे मैं से मुक्ति कैसे पायी जा सकती है (How to get rid of False Self)  - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 21 August 2014

मानव के जीवन में लोग जो उसके बारे में कहते हैं उसके आधार पर वह मानव अपनी एक झूठी प्रतिमा बना लेता है और वही उसका सही मैं है यह वह मान लेता है । इस भ्रम कारण से ही उसके जीवन में रण चलता रहता है । भगवान की शरण में जाकर इस ‘ झूठे मैं ’ के रण से मुक्ति पायी जा सकती है, इस बारे में परम

सही मैं और झूठा मैं के बीच की खींचातानी (Tug of War between True Self & False Self - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 21 August 2014)

सही मैं और झूठा मैं के बीच की खींचातानी अन्य लोगों से मानव अपने बारे में रहने वाली उनकी राय सुनकर ‘अपने मैं’ की धारणा बना लेता है। इससे वह अपने सही मैं को दबाकर झूठे मैं को ताकतवर बनाता है और इन दोनों के बीच की खींचातानी जीवन भर चलती रहती है । सही मैं और झूठा मैं के बीच की खींचातानी के बारे में परम पूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धसिंह

सही मैं और झूठा मैं (True Self & False Self)  - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 21 August 2014

सही मैं और झूठा मैं (True Self & False Self) मानव के भीतर के ‘ सही मैं ’ को यानी बिभीषण को महाप्राण हनुमानजी सामर्थ्य प्रदान करते हैं  । वहीं, मानव के भीतर का ‘ झूठा मैं ’ यह कुंभकर्ण की तरह रहता है । मानव को चाहिए कि भगवान की भक्ति करके वह ‘ झूठे मैं ’ का दामन छोडकर ’सही मैं’ को प्रबल बनाये । मानव के भीतर रहने वाले ‘ सही

ब्राह्ममुहूर्ताचे महत्त्व - भाग २ (The Importance of Brahma Muhoorta- Part 2) - Aniruddha Bapu Marathi Discourse 31 March 2005

ब्राह्ममुहूर्ताचे महत्त्व  – भाग २ रोज ब्राह्ममुहूर्तावर उठून उपासना करणे ज्यांना शक्य आहे त्यांनी अवश्य करावे, पण आजच्या धकाधकीच्या काळात सर्वांनाच हे करणे सहज शक्य होणार नाही, तरीही महिन्यातून एकदा तरी ब्राह्ममुहूर्तावर उठून उपासना करणे हे अचिन्त्य लाभ देणारे आहे. ब्राह्ममुहूर्ताच्या वेळी आत्माराम साक्षीरूपात न राहता चेतन स्वरूपात आमच्या सत्प्रवृत्तीला प्रेरणा देतो, हे लक्षात घेऊन ही संधी साधली पाहिजे. ब्राह्ममुहूर्ताच्या महत्त्वाबद्दल परम पूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या ३१ मार्च २००५ रोजीच्या प्रवचनात

एएडिएम सेवा- अनन्त चतुर्दशी २०१४ (AADM Seva- Anant Chaturdashi 2014) - Aniruddha Bapu Marathi Discourse 11 Sep 2014

अनिरुद्धाज अ‍ॅकॅडमी ऑफ डिझॅस्टर मॅनेजमेंट (AADM)  के स्वयंसेवकों के द्वारा अनन्त चतुर्दशी, ८ सितंबर २०१४ को गणपति पुनर्मिलाप (विसर्जन) कार्यक्रम में की गयी सेवा की जानकारी सद्गुरु श्री अनिरुद्धजी ने यानी बापु ने दी l मुंबई में ६१ जगह और मुंबई के बाहर ५ शहरों में यह(AADM)  सेवा की गयी l इस सेवा में ४७४५ स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया, जिनमें ७१ मेडिकल्स स्वयंसेवकों का यानी डॉक्टर्स और पॅरामेडिकल्स का सहभाग

ब्राह्ममुहूर्ताचे महत्त्व - १ ( The Importance of Brahma Muhoorta - 1) - Aniruddha Bapu Marathi Discourse 31 March 2005

ब्राह्ममुहूर्ताचे महत्त्व – १ ( The Importance of Brahma Muhoorta – 1) ब्राह्ममुहूर्तावर जी उपासना मानव करतो, त्याची भक्ती करण्यातील एकाग्रता वाढते, सहज प्राणायाम आपोआप घडतो, प्रगाढ शान्ती मिळते. इतर दिवशी एकाग्र मनाने न केलेली उपासनासुद्धा परमात्मा प्रेमाने स्वीकारतो. ब्राह्ममुहूर्ताच्या महत्त्वाबद्दल परम पूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या ३१ मार्च २००५ रोजीच्या प्रवचनात सांगितले, जे आपण या व्हिडियोत पाहू शकता. ॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥ ॥ अंबज्ञ ॥