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सक्रिय करमणुकीचे महत्त्व (Significance of Active Entertainment) - Aniruddha Bapu Marathi Discourse 09 Oct 2014

सक्रिय करमणुकीचे महत्त्व माणसाने करमणुकीसाठी उचित वेळ देणे गैर नाही. मनाला सक्रिय करमणुकीत, उदा. मैदानी खेळ वगैरेंमध्ये रमवण्याने मन अधिकाधिक समर्थ बनते आणि त्यात चुकीच्या गोष्टी शिरण्याची जागाच उरत नाही. माणूस जेव्हा निष्क्रिय करमणुकीत अडकतो तेव्हा त्याचे मन दुर्बल बनते. सक्रिय करमणुकीचे महत्त्व आणि आवश्यकता याबद्दल परम पूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या ०९ ऑक्टोबर २०१४ रोजीच्या मराठी प्रवचनात सांगितले, जे आपण या व्हिडियोत पाहू शकता. ॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम

क्रोध ही भयाचीच अभिव्यक्ती आहे (Fear is expressed as Anger) - Aniruddha Bapu Marathi Discourse 09 Oct 2014

क्रोध ही भयाचीच अभिव्यक्ती आहे   माणूस जेवढा रागीट तेवढा अधिक भित्रा असतो. मानवाच्या बाह्यत: जेवढा क्रोध असतो, तेवढे भय ( Fear ) त्याच्या मनात असते. मानवी मन जेव्हा कुतर्काद्वारे पुढे काय होणार या कल्पनांमध्ये अडकते, तेव्हा त्यातून भय निर्माण होते आणि तेच क्रोधरूपात व्यक्त होते. प्रत्येक क्रोध हा भीतीतूनच उत्पन्न होतो, याबद्दल परम पूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या ०९ ऑक्टोबर २०१४ रोजीच्या मराठी प्रवचनात सांगितले, जे आपण या व्हिडियोत पाहू

झूठे मैं से छुटकारा कैसे पाया जाये (How to Get Rid of False Self) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 11 Sep 2014

झूठे मैं से छुटकारा कैसे पाया जाये जब तक मानव का हनुमानजी के साथ कनेक्शन नहीं जुडता, तब तक उसका विकास नहीं हो सकता और हनुमानजी के साथ मानव का कनेक्शन जुडने के आडे मानव का झूठा मैं आता है। इस झूठे मैं को खत्म करने के लिए मानव को भक्तिमय प्रयास करना चाहिए। झूठे मैं से छुटकारा कैसे पाया जा सकता है इस बारे में परम पूज्य सद्गुरु श्री

नासै रोग हरै सब पीरा (Naasai rog harai sab peera) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 11 Sep 2014

नासै रोग हरै सब पीरा | मानव के भीतर रहने वाला ‘झूठा मैं’ उस मानव के मन में भय और भ्रम उत्पन्न करता है । मन को बीमारियों का उद्‍भवस्थान कहा जाता है । भय के कारण ही पहले मन में और परिणामस्वरूप देह में रोग उत्पन्न होते हैं । संतश्रेष्ठ श्री तुलसीदासजी द्वारा विरचित श्रीहनुमानचलिसा की ‘नासै रोग हरै सब पीरा’ इस पंक्ति में छिपे भावार्थ के बारे में

जय कपीस तिहुँ लोक उजागर - 2 (Jai Kapees Tihun Lok Ujaagar-2) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 11 Sep 2014

जय कपीस तिहुँ लोक उजागर | मन, प्राण और प्रज्ञा ये मानव के भीतर रहने वाले तीन लोक हैं । मानव के भीतर के इन तीनों लोकों का उजागर होना मानव का विकास होने के लिए आवश्यक होता है । इन तीनों लोकों को उजागर करने के हनुमानजी के कार्य के बारे में सद्गुरुपरम पूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने  अपने ११ सितंबर २०१४ के प्रवचन में बताया, जो आप

जय कपिश तिहु लोक उजागर ( Jai Kapish Tihu Lok Ujagar ) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 11 Sep 2014

जय कपिश तिहु लोक उजागर | सन्तश्रेष्ठ श्रीतुलसीदासजी श्रीहनुमानचलिसा स्तोत्र में हनुमानजी को ‘कपिश’ कहकर संबोधित करते हैं । ‘कपिश’ यह संबोधन ‘कपि’ और ‘ईश’ इन दो शब्दों का अर्थ अपने ११ सितंबर २०१४ के हिंदी प्रवचन में परम पूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धजी ने बताया । जिसे आप इस इस व्हिडियो में देख सकते हैं l ॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥ ॥ अंबज्ञ ॥

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर (Jai Hanuman Gyan Gun Sagar) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 11 Sep 2014.

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर । सन्तश्रेष्ठ श्रीतुलसीदासजी हनुमानजी को हमेशा ही बडे प्यार से संबोधित करते हैं । श्रीहनुमानचलिसा स्तोत्र के प्रारंभ में वे ‘जय हनुमान ज्ञान गुन सागर’ कहकर हनुमानजी की जयजयकार करते हैं । महाप्राण श्रीहनुमानजी के ज्ञानगुनसागर स्वरूप के बारे में परम पूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धसिंह ने अपने ११ सितंबर २०१४ के हिंदी प्रवचन में बताया, जो आप इस व्हिडियो में देख सकते हैं l ॥ हरि ॐ

झूठे मैं से उत्पन्न होनेवाले विचार घातक होते हैं (False Self generated Thoughts are Harmful) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 11 Sep 2014

झूठे मैं से उत्पन्न होनेवाले विचार घातक होते हैं । अपने ‘झूठे मैं’ के कारण मानव स्वयं के बारे में गलत कल्पनाएँ ही करता रहता है । मानव जब कुछ भी नहीं करता, तब भी उसका मन विचार करते रहता है और विचार यह भी एक कर्म होने के कारण कर्मफल के रूप में इन विचारों का परिणाम अवश्य ही मानव पर होता रहता है । ‘झूठे मैं’ से प्रेरित विचारों

भय से झूठा मैं ताकतवर बनता है (Fear makes False Self more stronger) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 21 August 2014

Fear makes False Self more stronger मानव यदि स्वयं अपनी विवेकबुद्धि का उपयोग नहीं करता, तो उसका सही मैं दुर्बल बनता जाता है । दुर्बल मन पर भय आसानी से कब्जा कर लेता है और भय के कारण बार बार गलत विचार आते रहते हैं । गलत विचारों की शृंखला से झूठा मैं ताकतवर होता है, पनपता है । भय से ‘झूठा मैं’ किस तरह बढता है इस बारे में

झूठा मैं कैसे उत्पन्न होता है (How the False Self gets created) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 21 August 2014

How the False Self gets created मानव के मन में विचारचक्र लगातार चलता रहता है । मानव किसी भी बात के बारे में डर की भावना से सोचता है । इस अनुचित विचारशृंखला से उसका सही मैं दबकर झूठा मैं उसपर हावी हो जाता है । ‘झूठे मैं’  की उत्पत्ति के बारे में  परम पूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धसिंह ने अपने २१ अगस्त २०१४ के प्रवचन में मार्गदर्शन किया, जो आप इस