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तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा: - २

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने ०३ मार्च २००५ के प्रवचन में ‘तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा: – २’ इस बारे में बताया। जब वो, देखिये भाई, जब तक एकरूप थी, है अद्‍वैतता, दो नहीं थे, एक ही था। तो कौन किसकी भक्ति करेगा, कौन किससे प्यार करेगा? प्यार करने के लिए तो द्वैत तो होना चाहिए। दो लोग चाहिए एक-दूसरे से प्यार करते हैं। तो विभक्त होके ही, तो उसने प्यार करना शुरू

देव माझा विठू सावळा - भाग ३

सद्गुरु श्री श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या १३ नोव्हेंबर २००३ च्या मराठी प्रवचनात ‘देव माझा विठू सावळा – भाग ३’ याबाबत सांगितले. आम्ही सगळे कोण? तर ‘नाचती वैष्णव गाती रे’ आम्ही ‘वैष्णव’. हा वैष्णवांचा धर्म कसा? आम्ही कोण, कसे? तुकाराम महाराज काय सांगतात? ‘तुका म्हणे सोपी केली पायवाट। उतरावया भवसागर रे।’ कोणी केली? ह्या वाटा, हे संत ज्या दाखवतात ना, त्यांच्यावरूनच चालायचं असतं. बाकीच्या सगळ्या वाटा कुठेतरी तुम्ही चुकू शकता, पण संतांच्या पावलावर

तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने ०३ मार्च २००५ के प्रवचन में ‘तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा:’ इस बारे में बताया। जिसका भी सच्चा उपभोग लेना चाहते हो, जो मेरे हित के लिए हो, तो उसका उपभोग करने के पहले त्याग करना सिखो और ये सिखाने वाली, ये राधा हैं। क्योकिं वो त्याग करके ही उसने जनन किया है सारी सृष्टी का। इसी लिए अगर मैं उसे जननी मानता हूँ, मानता हूँ नहीं मानना

माझा विठू सावळा

सद्गुरु श्री श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या १३ नोव्हेंबर २००३ च्या मराठी प्रवचनात ‘देव माझा विठू सावळा’ याबाबत सांगितले. ही चंद्रभागा म्हणजे संतांची ‘माऊली’. प्रत्येक भक्त काय म्हणतो की मला वाळू व्हायचयं, मला वाळवंट व्हायचंय. मला देवा तुझ्या पायीची वहाण व्हायचंय किंवा नामदेवांसारखा श्रेष्ठ भक्त म्हणतो की, परमेश्वरा, पांडुरंगा तुझा पाय माझ्या डोक्यावर नाही पडला तरी चालेल, पण तुझ्याकडे येणारा प्रत्येक भक्त आणि तुझ्याकडून परत जाणारा प्रत्येक भक्त हा माझ्यापेक्षा खूप श्रेष्ठ आहे

ॐ जनन्यै नम:

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने ०३ मार्च २००५ के पितृवचनम् में ‘ॐ जनन्यै नम:(Om Jananyai Namah)’ इस बारे में बताया। ॐ जनन्यै नम:। जननी, यानी जन्म देने वाली, यानी माँ, माता। जो सबकी माता हैं, जो सबका जनन करती हैं ऐसी राधाजी को मेरा प्रणाम रहे। ‘जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।’ ऋषिवर कहते हैं कि जननी और जन्मभूमि, यानी मुझे जन्म देने वाली मेरी माता और मेरी जन्मभूमि जो है, मेरा देश

विठू सावळा

सद्गुरु श्री श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या १३ नोव्हेंबर २००३ च्या मराठी प्रवचनात ‘देव माझा विठू सावळा’ याबाबत सांगितले. ‘देव माझा विठू सावळा। माळ त्याची माझिया गळा॥’ हा अभंग आम्ही लाख वेळा ऐकला असेल, पण आमच्या डोक्यात कधी हा प्रकाश पडला नाही. ‘देव माझा विठू सावळा। माळ त्याची माझिया गळा॥’ विठ्ठलाची माळ कधीच विठ्ठलाच्या गळ्यात राहिली नाही राजांनो. ती भक्तांच्या गळ्यासाठीच आसुसलेली असते. परंतु आम्ही कधीतरी, ही माळ तेवढ्या मनाने, प्रेमाने विठ्ठलाच्या गळ्यात

सद्‍गुरु श्रीअनिरुध्द का संवाद

२३ जुलाई २०२१ अर्थात गुरुपूर्णिमा के पावन पर्व पर सद्‍गुरु श्रीअनिरुध्द ने सभी श्रद्धावान मित्रों के साथ संवाद किया था। उस संवाद का व्हिडिओ यहां देख सकते है।  || हरि: ॐ || ||श्रीराम || || अंबज्ञ || ॥ नाथसंविध् ॥

समय, times, साथ चलो, काल, भगवान, जीवन, क्षमा, Sadguru Shree Aniruddha

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने ३१ मार्च २०१६ के पितृवचनम् में ‘समय के साथ चलो’ इस बारे में बताया। कईं लोगों को देखता हूँ, तो बस पढ़ते ही रहते हैं, कभी भी देखो खेलते रहते हैं मोबाईल पर, नहीं तो पढ़ते रहते हैं। इससे कुछ नहीं मिलता, ध्यान में रखिए। ये हमारे जो समय भगवान ने दिया हुआ है वो सिर्फ गिना-चुना है। कोई नहीं आज अगर सोचता है, कोई भी

कनेक्टिव्हिटी की दुनिया

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने ३१ मार्च २०१६ के पितृवचनम् में ‘यह कनेक्टिव्हिटी की दुनिया है’ इस बारे में बताया। ये जमाना है मोबाईल्स का, नेट का, ट्वीटर, फेसबुक, वॉट्सऍप और ब्लॉग। ट्विटर, फेसबुक, वॉट्सऍप और ब्लॉग ये चार स्तंभ हैं। चंद नाम अलग हो जायेंगे आगे चलके, उनमें बहोत सारे सुधराव आ जायेंगे, बहुत चेन्जेस हो जायेंगे, but they have come to stay. ये जो चार प्रमुख स्तंभ हैं, ये

श्रीशब्दध्यानयोग-०२

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने १५ अक्टूबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘श्रीशब्दध्यानयोग- ०२’ इस बारे में बताया। सो, बड़े प्यार से हमें, गुरुवार से पहला demonstration होगा, हम सीख जाएँगे, demonstration होगा यानी क्या, हमें सीखने के लिए होगा, राईट, हम सीखेंगे। Most probably हम लोगों को पुस्तिका भी मिल जाएगी। तो चक्र यहाँ होगा, उसकी प्रतिमा होगी, वो प्रतिमा हम लोग स्क्रिन पर भी display कर सकते हैं, राईट, ओ.के.।