Pravachans of Bapu

रामरक्षारूपी खजिना (Ram-Raksha Stotra - The Treasure) - Aniruddha Bapu Marathi Discourse 14 october 2004

बुधकौशिक ऋषिंनी रामरक्षा (Ram-Raksha) स्तोत्राची विरचना केली. बुधकौशिक ऋषिंकडे असणारा हा रामरक्षारूपी खजिना त्यांनी खुला केला आहे. बुधकौशिक या नामाचा अर्थ सांगून परम पूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्ध बापुंनी याबाबत गुरूवार दिनांक १४ ऑक्टोबर २००४ रोजीच्या प्रवचनात मार्गदर्शन केले, जे आपण या व्हिडियोत पाहू शकता.  (संदर्भ: सद्गुरु श्रीअनिरुद्ध बापुंचे रामरक्षेवरील पहिले प्रवचन) ॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥ ॥ अंबज्ञ ॥

रामरक्षा-स्तोत्रमन्त्र (Ram-Raksha-Stotra-Mantra) - Aniruddha Bapu Marathi Discourse 14 october 2004

रामरक्षेवरील प्रवचनांमध्ये श्रीअनिरुद्ध बापुंनी सहजसोप्या भाषेत रामरक्षेची गरिमा सांगितली. रामरक्षेच्या सुरुवातीसच ’अस्य श्री रामरक्षा स्तोत्रमन्त्रस्य’ हे शब्द येतात. बुधकौशिक ऋषिंद्वारे विरचित अशा या रामरक्षेला `स्तोत्रमन्त्र’  (Ram-Raksha-Stotra-Mantra) असे का म्हणतात, याबाबत परम पूज्य सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापुंनी गुरूवार दिनांक १४ ऑक्टोबर २००४ रोजीच्या प्रवचनात मार्गदर्शन केले, जे आपण या व्हिडियोत पाहू शकता. (संदर्भ: सद्गुरु श्रीअनिरुद्ध बापुंचे रामरक्षेवरील पहिले प्रवचन) ॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥ ॥ अंबज्ञ ॥

सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने। (SahasraNaam Tattulyam RamNaam Varaanane) - Aniruddha Bapu Marathi Discourse 14 October 2004

‘सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने’ (SahasraNaam Tattulyam RamNaam Varaanane) या शब्दांमध्ये रामरक्षा स्तोत्रामध्ये रामनामाची महती शिवाने पार्वतीला सांगितली आहे. रामनामाने नष्ट झालं नाही असं पाप नाही आणि रामनामाने उद्धरला नाही असा पापी झाला नाही, होणार नाही. परम पूज्य सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापुंनी गुरूवार दिनांक १४ ऑक्टोबर २००४ रोजीच्या प्रवचनात रामनामाचा महिमा सोप्या शब्दांत सांगितला, जो आपण या व्हिडियोत पाहू शकता. ॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥ ॥ अंबज्ञ ॥

ॐ रां राधायै राधिकायै रमादेव्यै नम: ।(Om Ram Radhayai Radhikayai Ramdevyai Namah) - Aniruddha Bapu Hindi Pravachan

महाभाव-स्वरूपा राधाजी के सहस्र नामों में से प्रत्येक नाम की महिमा स्पष्ट करते हुए सद्गुरु श्रीअनिरुद्ध बापु अपने प्रत्येक प्रवचन में ’भक्तिमार्ग पर भक्तमाता राधाजी अपने बच्चों के लिए यानी श्रद्धावानों के लिए किस तरह सक्रिय रहती हैं’, यह भी विशद करते थे । ’ॐ रां राधायै राधिकायै रमादेव्यै नम:’ इस मन्त्र का जप ’राधासहस्रनाम’ पर आधारित प्रत्येक हिन्दी प्रवचन के बाद सद्गुरु श्रीअनिरुद्ध बापु स्वयं करते थे और श्रद्धावान

समर्पण ही आराधना की आत्मा है (Surrendering to The God is the Core of Worship) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 04 March 2004

मैं भगवान का हूँ, मेरे पास जो कुछ भी है वह भगवान का दिया हुआ ही है, मैं जो भक्ति कर रहा हूँ वह भगवान की कृपा से भगवान को प्राप्त करने के लिए ही कर रहा हूँ, इस समर्पित भाव के साथ श्रद्धावान को भक्तिपथ पर चलना चाहिए । केवल काम्यभक्ति न करते हुए समर्पण भाव से भगवान की आराधना करना श्रेयस्कर है, समर्पण ही आराधना की आत्मा है(Surrendering

एकविधा भक्ति (Ekavidha Bhakti) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 04 March 2004

जीवन में भगवान को प्राथमिकता देनी चाहिए । मैं भगवान के घर में रहता हूँ, यह भाव रहना चाहिए l जो मेरा है वह भगवान ने ही मुझे दिया हुआ है, इसलिए मेरा जो कुछ भी है वह भगवान का है, मैं भगवान का हूँ, इस भाव के साथ श्रद्धावान के द्वारा की गयी भगवद्‍भक्ति को एकविधा भक्ति (Ekavidha Bhakti) कहते हैं, यह बात सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापु ने अपने दि.

एकविध ध्यान (Ekavidha Dhyaan) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 04 March 2004

मानव भुक्ति से लेकर मुक्ति तक कुछ भी यदि भगवान से प्राप्त करना चाहता है, तो उसे भगवान का एकविध ध्यान (Ekavidha Dhyaan) करना चाहिए । ” भगवान, तुम्हारे सिवा मेरा कोई नहीं है, मैं जो कुछ भी कर रहा हूँ तुम्हारे ही आधार से कर रहा हूँ, तुम्हें पाने के लिए कर रहा हूँ ” इस भाव के साथ श्रद्धावान के द्वारा भगवान का किया गया ध्यान ही एकविध ध्यान

पडत्या फळाची आज्ञा (Explanation of a Proverb- Padatya Phalachi Aadnya) - Aniruddha Bapu Marathi Discourse 05 November 2009

सीतेचा शोध घेणार्‍या हनुमंताची अशोकवनात सीतेची भेट झाली. त्यावेळी हनुमंताने भूक लागल्याचे सीतेला सांगितल्यावर सीतेने त्याला फक्त झाडावरून खाली पडणारी किंवा खाली पडलेली फळे खाण्याची आज्ञा केली. म्हणून हनुमानाने सगळी झाडं गदागदा हलवून फळं खाली पाडली आणि खाल्ली. या प्रसंगावरून ‘पडत्या फळाची आज्ञा’ ही म्हण प्रचलित झाली आहे, असे परम पूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी आपल्या दि. 05 नोव्हेंबर 2009 रोजी च्या मराठी प्रवचनात श्री हरिगुरुग्राम येथे सांगितले, जे आपण या व्हिडियोत पाहू

हृदय राखि कोसलपुर राजा ( Keep Kosalpur's King ShreeRaam in your heart ) - Aniruddha Bapu Marathi Discourse 05 November 2009

सुन्दरकाण्डामध्ये संतश्रेष्ठ श्रीतुलसीदासजींनी स्पष्टपणे सांगितले आहे की श्रीरामचन्द्रांना हृदयात धारण करण्याने विषही अमृत होते, शत्रुने केलेल्या अहितकारक गोष्टीसुद्धा हितकारक ठरतात, अशक्य गोष्टीसुद्धा सहज शक्य होतात. परम पूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी आपल्या दिनांक ०५ नोव्हेंबर २००९ रोजी च्या मराठी प्रवचनात श्री हरिगुरुग्राम येथे या दोह्यांचे सोदाहरण स्पष्टीकरण केले, जे आपण या व्हिडियोत पाहू शकता. (Keep Kosalpur’s King ShreeRaam in your heart – Aniruddha Bapu Marathi Discourse 05 November 2009) ॥ हरि ॐ

Aniruddha bapu, personality and individuality

परम पूज्य सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापुजी ने गुरूवार १६ जनवरी २०१४ के हिंदी प्रवचन में अपनापन यह जताने की बात नहीं है, बल्कि महसूस करने की बात है । सद्गुरुतत्त्व के प्रति अपनापन जताने के बजाय अपनापन महसूस करना आवश्यक है और इसके लिए सद्गुरु का तुम्हारे प्रति रहने वाला जो अपनापन है, उसे महसूस करो, यह बात स्पष्ट की, जो आप इस व्हिडियो में देख सकते हैं l ( Feel