Pravachans of Bapu

प्रयासच सफल होतात (Efforts are Fruitful) - Aniruddha Bapu Marathi Discourse 31 March 2005

मोठमोठ्या चर्चा, काथ्याकूट किंवा वादविवाद करण्यापेक्षा नीतिमर्यादेने प्रपंच-परमार्थ करा, नामस्मरण करा, ब्रह्म नक्कीच तुम्हाला कवेत घेईल, असे सर्व संतांनी आम्हाला सांगितले आहे. तोंडाच्या वाफा दवडण्यापेक्षा मानवाने प्रयास (efforts) करावेत, प्रयासानेच सफलता मिळते असे परम पूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या ३१ मार्च २००५ रोजीच्या प्रवचनात सांगितले, जे आपण या व्हिडियोत पाहू शकता. ॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥ ॥ अंबज्ञ ॥

मानवी जीवनातील एक महत्त्वाचा यज्ञ म्हणजे श्वासोच्छ्वासाची क्रिया (Respiration is one important Yajna in Human Life) - Aniruddha Bapu Marathi Discourse 31 March 2005

मानवी जीवनात सर्वांत महत्त्वाचा यज्ञ अव्याहतपणे, अगदी मानवाच्याही नकळत चालू असतो आणि तो यज्ञ आहे, मानवाची श्वासोच्छ्वासाची क्रिया. ही श्वासोच्छ्वासाची क्रिया नाकाद्वारे चालत असते आणि म्हणूनच बुधकौशिक ऋषि येथे म्हणत आहेत – यज्ञाचे रक्षण करणारा राम माझ्या नाकाचे रक्षण करो. घ्राणं पातु मखत्राता या रामरक्षेतील प्रार्थनेबद्द्ल परम पूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या ३१ मार्च २००५ रोजीच्या प्रवचनात सांगितले, जे आपण या व्हिडियोत पाहू शकता. ॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥

Aniruddha Bapu

भक्तमाता श्रीलक्ष्मी स्वयं ऐश्वर्य स्वरूपा हैं, वहीं भक्तमाता राधाजी ऐश्वर्य की जननी हैं । सागर और सागर का जल, सूर्य और सूर्यप्रकाश ये जिस तरह अलग नहीं हैं, उसी तरह राधाजी और श्रीलक्ष्मीजी अलग नहीं हैं । राधाजी और श्रीलक्ष्मी ये भक्तमाता आह्लादिनी के ही दो स्वरूप हैं, इस बारे में परम पूज्य सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने २५ मार्च २००४ के प्रवचन में बताया, जो आप इस व्हिडियो में

भक्तमाता पंकजा श्रीलक्ष्मी (Bhaktamata Pankaja ShreeLakshmi) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 25 March 2004

भक्तमाता पंकजा श्रीलक्ष्मी कमल में विराजमान हैं । कमल यह कीचड में से ऊपर उठकर हमेशा ऊर्ध्व दिशा में आगे बढता रहता है । इसी तरह  कुमार्ग को त्यागकर सन्मार्ग पर आगे बढनेवाले के जीवन में भक्तमाता पंकजा श्रीलक्ष्मी प्रकट होती हैं । भक्तमाता पंकजा श्रीलक्ष्मी  के बारे में परम पूज्य सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने २५ मार्च २००४ के प्रवचन में बताया, जो आप इस व्हिडियो में देख

भक्तमाता राधा- श्रीमती (Bhaktamata Radha - Shreemati) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 25 March 2004

भक्तमाता राधाजी का एक नाम श्रीमती है । भक्तमाता राधाजी हर प्रकार का धन भक्त को देती हैं, भौतिक धन देती हैं । इसलिए वे श्रीमती हैं।  साथ ही मन को सुमति देनेवालीं भी भक्तमाता राधाजी ही हैं । भक्तमाता राधाजी के ‘श्रीमती’ इस नाम के बारे में सद्गुरु श्रीअनिरुद्धसिंह ने अपने २५ मार्च २००४ के प्रवचन में बतायी, जो आप इस व्हिडियो में देख सकते हैं l ॥ हरि

ऐश्वर्य और पंक के बीच का फर्क (The difference between Aishwarya and Pank) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 25 March 2004

आसुरी मार्ग से हासिल की गयी संपत्ति को ऐश्वर्य नहीं कहा जाता क्योंकि वह न तो प्राणमय होता है और ना ही वह ऊर्ध्व दिशा में ले जाने वाला होता है । उसे पंक यानी दलदल कहते हैं और दलदल में फँसे हुए व्यक्ति का दलदल से बाहर निकलना असंभव होता है । ऐश्वर्य और पंक के बीच का फ़र्क परम पूज्य सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने २५ मार्च

ऐश्वर्य का अर्थ (The Meaning of Aishwarya) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 25 March 2004

पृथ्वी के साथ जुडा हुआ भौतिक धन, साधनसामग्री, जो प्राणसहित होती है, विकास की ओर ले जाने वाली होती है, उसे ही ऐश्वर्य कहा जाता है । ऐश्वर्य इस शब्द का अर्थ उस शब्द में रहने वाले बीजों के आधार पर क्या होता है, यह बात परम पुज्य बापूने अपने गुरुवार दिनांक २५ मार्च २००४ के हिन्दी प्रवचन में बतायी, जो आप इस व्हिडियो में देख सकते हैं l ॥

राधाजीही दैवी संपत्ती है। (Radha - The Divine treasure) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 25 March 2004

जो भी भगवानमें विश्वास करते है, वो मानते है की, भगवान के पास हमे सब कुछ देने की शक्ति है। भगवान के देने की शक्तिही राधाजी है। राधाजी भक्तोंको आराधना करने के लिए प्रेरित करती है। राधाजी हमे आनंद कैसे पाना है ये भी सिखाती है। इस बारेमें परम पुज्य बापूने अपने गुरुवार दिनांक २५ मार्च २००४ के हिन्दी प्रवचन मे मार्गदर्शन किया, वह आप इस व्हिडीओमें देख सकते है।

पहिले पादुकापूजन करणारा भरत (Bharat performed the first Paduka Poojan) - Aniruddha Bapu Marathi Discourse 10 March 2005

मानवाच्या प्रारब्धामुळे त्याच्या जीवनात राम वनवासाला गेला, तरी जर त्याच्या जीवनात सगुण भक्ती करणारा, भक्ति-अधिष्ठित सेवा करणारा भरत सक्रिय असेल, तर त्याच्या जीवनात रामराज्य येऊ शकते. भरताच्या भक्तीचा महिमा आणि या विश्वातील पहिले पादुकापूजन भरताने केले, याबद्द्ल परम पूज्य सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापुंनी त्यांच्या १० मार्च २००५ रोजीच्या प्रवचनात मार्गदर्शन केले, जे आपण या व्हिडियोत पाहू शकता. ॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥ ॥ अंबज्ञ ॥

हनुमंत-भरत  भेट (Hanuman met Bharat) - Aniruddha Bapu Marathi Discourse 10 March 2005

वनवासाची चौदा वर्षे उलटल्यावर एक दिवस जरी रामाच्या आगमनास उशीर झाला तर रामवियोग सहन न झाल्याने मी अग्निप्रवेश करीन, अशी प्रतिज्ञl केलेल्या भरताची भेट घेण्यास राम हनुमंताला पाठवतो. त्या हनुमंत-भरत भेटीबद्द्ल परम पूज्य सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापुंनी त्यांच्या १० मार्च २००५ रोजीच्या प्रवचनात मार्गदर्शन केले, जे आपण या व्हिडियोत पाहू शकता. ॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥ ॥ अंबज्ञ ॥