Hindi Pravachan

प्रेम से आती है जिम्मेदारी (Love brings Responsibility) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 8 May 2014

जहाँ प्रेम होता है वहाँ प्रेम से अपने आप जिम्मेदारी आ जाती है l जहाँ प्रेम होता है वहाँ जिम्मेदारी बोझ नहीं लगती, बल्कि उससे तृप्ति मिलती है l सांवेगिक बुद्धिमत्ता को पहचानकर मानव उससे प्रेम करने वाले व्यक्ति के प्रेम को प्रतिसाद यानी रिस्पाँड करे और प्रेम के साथ अपनी पारिवारिक एवं सभी प्रकार की जिम्मेदारियों को अचूकता से निभाये l  प्रेम और जिम्मेदारी के बीच के रिश्ते के

सांवेगिक बुद्धिमत्ता का महत्त्व (Importance of Emotional Intelligence) – Aniruddha Bapu Hindi Discourse 8 May 2014

मानव अपनी भावनाओं को पहचानने में गलती करता है और इसी वजह से सही दिशा में आगे नहीं बढ सकता l सांवेगिक बुद्धिमत्ता(Emotional Intelligence) का उचित उपयोग करके मानव को गृहस्थी और परमार्थ में उचित कदम उठाते हुए अपना विकास करना चाहिए l सांवेगिक बुद्धिमत्ता के महत्त्व के बारे में परम पूज्य सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापु ने अपने दि. 8 मई 2014 के हिंदी प्रवचन में महत्त्वपूर्ण विवेचन किया,  जो

दृढ विश्वास ही आवश्यक है (Firm Belief is necessary) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 8 May 2014

मेरे जीवन में गृहस्थी एवं परमार्थ को एकसाथ सुफल संपूर्ण बनाने के लिए मुझे जिस जिस बात की   आवश्यकता है, वह प्रत्येक बात सद्‍गुरुतत्त्व के पास भरपूर है और वह उचित समय पर मुझे वह हर एक बात देने ही वाला है l मुझे जो भी माँगना है, वह मैं सद्‍गुरु से ही माँगूंगा और सद्गुरु के अलावा किसी और से कुछ भी स्वीकार नहीं करूँगा यह निर्धार श्रद्धावान के

सांवेगिक बुद्धिमत्ता (Emotional Intelligence) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 8 May 2014

मानव यह भावनाप्रधान प्राणि है l मानव की भावनाओं का अध्ययन करके उसके द्वारा व्यक्ति या समूह का रुझान सांवेगिक बुद्धिमत्ता (Emotional Intelligence) के आधार से जानने का विज्ञान आज कल विकसित हो रहा है l भावनाओं में बहकर किसी भी घटना के प्रति रिअ‍ॅक्ट न करते हुए परिस्थिति को रिस्पाँड करने के लिए मानव को सांवेगिक बुद्धिमत्ता का उपयोग करना चाहिए l  सांवेगिक बुद्धिमत्ता के बारे में परम पूज्य

आत्मयोग्यता

मेरी बुद्धि में ही कुछ खोट है, मेरे पास बुद्धि ही कम है, यह कहकर अकसर मानव स्वयं को कोसते रहता है l भगवान ने सभी मानवों को एकसमान बुद्धि का वरदान दिया है, मानव उसका उपयोग कर अभ्यास के साथ उसे कितना बढाता है, इस बात पर ही उसका बुद्ध्यंक (Intelligence Quotient) निश्चित होता है l मानव के बुद्ध्यंक के बारे में परम पूज्य सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापु ने

आत्मयोग्यता

महज परमार्थ में ही नहीं बल्कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफल बनने के लिए आत्मयोग्यता और आत्मविश्वास का होना आवश्यक है l आत्मयोग्यता बढाने से आत्मविश्वास बढता है और आत्मयोग्यता बढाने के लिए सद्‍गुरुतत्त्व की भक्ति करना यह राजमार्ग है l आत्मयोग्यता को बढाने के संदर्भ में परम पूज्य सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापु ने गुरूवार ०१ मई २०१४ के हिंदी के प्रवचन में, मार्गदर्शन किया, जो आप इस व्हिडियो

विश्वास ही सब कुछ है (Faith is everything) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 1 May 2014

सद्‍गुरुतत्त्व पर श्रद्धावान का विश्वास कितना है, इस बात पर ही उसका जीवनविकास निर्भर करता है l जो भी माँगना है, वह सद्‍गुरु से ही माँगना चाहिए l परंतु कुछ माँगने पर भी यदि मेरे साईनाथ ने मुझे वह नहीं दिया तो कोई भी मुझे वह नहीं दे सकता और मैं मेरे साईनाथ के अलावा किसी और से वह स्वीकार भी नहीं करूँगा ऐसा विश्वास श्रद्धावान के मन में रहना