Hindi Pravachan

साईनाथजी की शरण में जाने से जीवन सार्थक बन जाता है | (Take shelter at Sainathji's Feet and Life becomes Fruitful - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 21 August 2014)

साईनाथजी की शरण में जाने से जीवन सार्थक बन जाता है | (Take shelter at Sainathji’s Feet and Life becomes Fruitful) साईनाथजी की शरण में गया और जीवन व्यर्थ हो गया ऐसा इस दुनिया में कोई भी नहीं है ।  यह साईवचन मानव (human beings) के जीवन में सच (thruth) हो सकता है, लेकिन इसके लिए उसका सच में साईनाथजी की शरण में जाना अनिवार्य है । शरण इस शब्द के

एएडिएम सेवा- अनन्त चतुर्दशी २०१४ (AADM Seva- Anant Chaturdashi 2014) - Aniruddha Bapu Marathi Discourse 11 Sep 2014

अनिरुद्धाज अ‍ॅकॅडमी ऑफ डिझॅस्टर मॅनेजमेंट (AADM)  के स्वयंसेवकों के द्वारा अनन्त चतुर्दशी, ८ सितंबर २०१४ को गणपति पुनर्मिलाप (विसर्जन) कार्यक्रम में की गयी सेवा की जानकारी सद्गुरु श्री अनिरुद्धजी ने यानी बापु ने दी l मुंबई में ६१ जगह और मुंबई के बाहर ५ शहरों में यह(AADM)  सेवा की गयी l इस सेवा में ४७४५ स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया, जिनमें ७१ मेडिकल्स स्वयंसेवकों का यानी डॉक्टर्स और पॅरामेडिकल्स का सहभाग

Aniruddha Bapu

भक्तमाता श्रीलक्ष्मी स्वयं ऐश्वर्य स्वरूपा हैं, वहीं भक्तमाता राधाजी ऐश्वर्य की जननी हैं । सागर और सागर का जल, सूर्य और सूर्यप्रकाश ये जिस तरह अलग नहीं हैं, उसी तरह राधाजी और श्रीलक्ष्मीजी अलग नहीं हैं । राधाजी और श्रीलक्ष्मी ये भक्तमाता आह्लादिनी के ही दो स्वरूप हैं, इस बारे में परम पूज्य सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने २५ मार्च २००४ के प्रवचन में बताया, जो आप इस व्हिडियो में

भक्तमाता पंकजा श्रीलक्ष्मी (Bhaktamata Pankaja ShreeLakshmi) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 25 March 2004

भक्तमाता पंकजा श्रीलक्ष्मी कमल में विराजमान हैं । कमल यह कीचड में से ऊपर उठकर हमेशा ऊर्ध्व दिशा में आगे बढता रहता है । इसी तरह  कुमार्ग को त्यागकर सन्मार्ग पर आगे बढनेवाले के जीवन में भक्तमाता पंकजा श्रीलक्ष्मी प्रकट होती हैं । भक्तमाता पंकजा श्रीलक्ष्मी  के बारे में परम पूज्य सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने २५ मार्च २००४ के प्रवचन में बताया, जो आप इस व्हिडियो में देख

भक्तमाता राधा- श्रीमती (Bhaktamata Radha - Shreemati) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 25 March 2004

भक्तमाता राधाजी का एक नाम श्रीमती है । भक्तमाता राधाजी हर प्रकार का धन भक्त को देती हैं, भौतिक धन देती हैं । इसलिए वे श्रीमती हैं।  साथ ही मन को सुमति देनेवालीं भी भक्तमाता राधाजी ही हैं । भक्तमाता राधाजी के ‘श्रीमती’ इस नाम के बारे में सद्गुरु श्रीअनिरुद्धसिंह ने अपने २५ मार्च २००४ के प्रवचन में बतायी, जो आप इस व्हिडियो में देख सकते हैं l ॥ हरि

ऐश्वर्य और पंक के बीच का फर्क (The difference between Aishwarya and Pank) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 25 March 2004

आसुरी मार्ग से हासिल की गयी संपत्ति को ऐश्वर्य नहीं कहा जाता क्योंकि वह न तो प्राणमय होता है और ना ही वह ऊर्ध्व दिशा में ले जाने वाला होता है । उसे पंक यानी दलदल कहते हैं और दलदल में फँसे हुए व्यक्ति का दलदल से बाहर निकलना असंभव होता है । ऐश्वर्य और पंक के बीच का फ़र्क परम पूज्य सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने २५ मार्च

ऐश्वर्य का अर्थ (The Meaning of Aishwarya) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 25 March 2004

पृथ्वी के साथ जुडा हुआ भौतिक धन, साधनसामग्री, जो प्राणसहित होती है, विकास की ओर ले जाने वाली होती है, उसे ही ऐश्वर्य कहा जाता है । ऐश्वर्य इस शब्द का अर्थ उस शब्द में रहने वाले बीजों के आधार पर क्या होता है, यह बात परम पुज्य बापूने अपने गुरुवार दिनांक २५ मार्च २००४ के हिन्दी प्रवचन में बतायी, जो आप इस व्हिडियो में देख सकते हैं l ॥

राधाजीही दैवी संपत्ती है। (Radha - The Divine treasure) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 25 March 2004

जो भी भगवानमें विश्वास करते है, वो मानते है की, भगवान के पास हमे सब कुछ देने की शक्ति है। भगवान के देने की शक्तिही राधाजी है। राधाजी भक्तोंको आराधना करने के लिए प्रेरित करती है। राधाजी हमे आनंद कैसे पाना है ये भी सिखाती है। इस बारेमें परम पुज्य बापूने अपने गुरुवार दिनांक २५ मार्च २००४ के हिन्दी प्रवचन मे मार्गदर्शन किया, वह आप इस व्हिडीओमें देख सकते है।

चिन्तन का महत्त्व (Importance of Chintan) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 26 Feb 2004

चाहे सुख हो या दुख, मानव को किसी भी स्थिति में भगवान से दूरी बढानी नहीं चाहिए । जीवन के हर मोड पर, कदम कदम पर भगवान से जुडे रहना जरूरी है । मानव के जीवनरूपी वर्तुल (सर्कल) की केन्द्रबिन्दु भगवान ही रहनी चाहिए । जो भगवान का हमेशा चिन्तन करता है, उसके योगक्षेम की चिन्ता भगवान करते हैं । बुद्धि से भगवान की पर्युपासना करने की ताकत राधाजी देती

उपासना शब्द का अर्थ (The meaning of 'Upasana') - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 26 Feb 2004

उपासना शब्द का अर्थ हैं भगवान के नज़दीक बैठना। याने भगवान के गुणों के नज़दीक बैठना। मेरे मन को भगवान के नज़दीक बिठाने की कोशिश करना, कम से कम मेरी बुद्धी पूरी तरह से भगवान के शरण में लगानाl इस बारे में परमपूज्य सद्‌गुरु अनिरुद्ध बापू ने अपने गुरूवार दिनांक २६ फरवरी २००४ के हिंदी प्रवचन में मार्गदर्शन किया वह आप इस व्हिडियो में देख सकते हैं। ॥ हरि ॐ