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साईनाथ अपने भक्त को अपने समीप खींच लेते हैं  (Sainath pulls His devotee closer to him)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २७ मार्च २०१४ के प्रवचन में ‘साईनाथ अपने भक्त को अपने समीप खींच लेते हैं’ इस बारे में बताया। हम मंदिर में जाते हैं, जरुर! ये इच्छा कैसे उत्पन्न हुई? बाबा की इच्छा ना हो, बाबा के मंदिर में या बाबा के पास, कभी नहीं जा सकते, ये पूरा भरोसा रखो। बाबा ने सौ बार बोला है साईचरित्र में कि मेरी इच्छा के बिना कोई

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अमरिका के प्रतिबंधों का निषेध करने के लिए ईरान रशिया से संवर्धित युरेनियम प्राप्त करेगा – ईरान के परमाणु ऊर्जा के संगठन के उपप्रमुख की घोषणा तेहरान/मॉस्को – अमरिका ने लगाए कठोर प्रतिबंधों का निषेध करने के लिए ईरान ने परमाणु कार्यक्रम की गति बढाने के लिए कदम उठाए हैं। इसके लिए ईरान ने रशिया को सौंपा हुआ संवर्धित युरेनियम का भंडार वापस लेने की घोषणा की है। ईरान ने संवर्धित

त्रिविक्रम के १८ वचन (हिन्दी)

दत्तगुरुकृपा से मैं सर्वसमर्थ तत्पर । श्रद्धावान को दूँगा सदैव आधार ॥१॥ मैं तुम्हारी सहायता करूँगा निश्‍चित । परन्तु मेरे मार्ग त्रि-नाथों को ही है ज्ञात ॥२॥ मत करना इस विषय में संदेह बिलकुल भी । न होने दूँगा घात तुम्हारा मैं कभी भी ॥३॥ प्रेमल भक्त के जीवन में । नहीं ढूँढ़ने बैठता हूँ पाप मैं ॥४॥ हो जाते ही मेरा एक दृष्टिपात । भक्त बन जायेगा पापरहित ॥५॥

you-make-impossible-possible

  Experience Of Kumaran   An ordinary Shraddhavan who dreamt of getting a job in an organization. Such a simple aim! However, the situation was entirely against him. He had no experience for the type of work he would be expected to do, for the role that he had applied. Moreover, his previous experience was utterly irrelevant for the new job. The other candidates who had come for the interview

महादुर्गेश्वर प्रपत्तिसंबंधित जानकारी

महादुर्गेश्वर प्रपत्ति की रचना में प्रपत्ति करने वाले पुरुष श्रद्धावान चौकी पर श्रीचण्डिकाकुल की तसवीर रखकर उस तसवीर के सामने श्रीत्रिविक्रम की तसवीर अथवा मूर्ति रखते हैं। अनेक श्रद्धावानों से प्रपत्ति के संदर्भ में एक प्रश्न पूछा गया कि महादुर्गेश्वर प्रपत्ति में श्री महादुर्गेश्वर की तसवीर या मूर्ति कहीं पर दिखायी नहीं देती। सद्गुरु श्री अनिरुद्ध ने श्रीचण्डिकाकुल तसवीर के उद्घाटन के समय, तथा सद्गुरु की श्रीस्वस्तिक्षेम तपश्चर्या के समय

भगवान को एक प्यारी सी स्माईल दो (Give The Lord your warm smile)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २७ मार्च २०१४ के प्रवचन में ‘भगवान को एक प्यारी सी स्माईल दो’ इस बारे में बताया। सो पहले जान लें कि इस स्थान पर हम लोग बाबा की उपासना करने को आये हैं, इसका मतलब है यहां बाबा हैं। तो पहले स्माईल देना, ये क्या है, हमारा कर्तव्य है। भगवान को सुबह उठने के बाद भी, उसका चित्र हमारे सामने रहेगा, तो पहले give

Middle East on the boil as crises in many countries turning acute

The deadline issued by US to the European nations regarding the Iran sanctions has expired, US Secretary of State Mike Pompeo Washington: US Secretary of State Mike Pompeo has reminded that the 90-day deadline issued by President Trump to the European nations to impose sanctions against Iran will be expiring within a few hours on Monday. The United States will impose fresh harsher sanctions against Iran after this deadline and

वैश्विक स्तर पर दक्षिणपूर्वी आशिया का महत्त्व बढा

चीन का प्रभाव रोकने के लिए अमरिका की तरफ से ‘आसियन’ को ३० करोड़ डॉलर्स का रक्षा सहकार्य – विदेश मंत्री माइक पॉम्पिओ की घोषणा सिंगापूर/वॉशिंग्टन: ‘इंडो-पैसिफ़िक क्षेत्र में प्रादेशिक स्तर पर सुरक्षा मजबूत करने के लिए अमरिका ने दिया हुआ वचन पूरा करने के उद्देश्य से ३० करोड़ डॉलर्स की अतिरिक्त सहायता दी जा रही है। इस सहायता की वजह से इंडो-पैसिफ़िक क्षेत्र में अमरिका का रक्षा सहकार्य अधिक

Once you surrender to Aniruddha, you’ll be fearless forever!

Kanta Surajmani Sinh, Thane Would medical science be able to rationally explain how a person can discharge one’s day-to-day duties, responsibilities and chores after having suffered from a heart attack? Bapu is the only saviour who can go beyond the boundaries of science, recognises one’s difficulty and extends help in such times. This incident took place on September 27, 2011.  As usual, we laid down on our bed after dinner and were

प्रत्येक जण स्वत:ची लढाई लढत असतो  (Everyone is fighting their own battle)

परमपूज्य सद्गुरू श्री अनिरुद्ध बापूंनी त्यांच्या २२ जानेवारी २०१५ च्या मराठी प्रवचनात ‘प्रत्येक जण स्वत:ची लढाई लढत असतो’ याबाबत सांगितले.   पण आम्हाला एक मात्र नीट कळावं लागतं की प्रयास कुठवर करायचे आणि कुठे थांबवायचे, हे आपल्याला कुठेतरी निर्णय घ्यावाच लागतो. नाहीतर शेवटी लक्षात घ्या, प्रत्येकाचं जीवन शेवटी स्वतंत्र आहे. आपण कुटुंबाच्या नात्याने, मित्रत्वाच्या नात्याने आपण आपल्या धर्माच्या नात्याने, समाजाच्या नात्याने जोडलेले जरुर असू, पण मग बाकीचे हजारो लाखो लोक