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अमरीका की अफगाणिस्तान से सेनावापसी की घोषणा और भारत

अफ़गानिस्तान में उद्देश्‍य पूरा होने का बयान करके अमरीका के राष्ट्राध्यक्ष ने किया सेना की वापसी का ऐलान वॉशिंग्टन/काबुल – ‘अफ़गानिस्तान की एकजुट के लिए अमरीका ने अपने सैनिक इस देश में तैनात नहीं किए थे। ओसामा बिन लादेन को खत्म करना और अफ़गानिस्तान में स्थित आतंकियों के आश्रय स्थान नष्ट करना, इन दोनों उद्देश्‍यों के लिए अमरीका की सेना ने अफ़गानिस्तान में कदम रखा था। यह दोनों उद्देश्‍य प्राप्त

क्षीरसागर का मन्थन- भाग २

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने २४ फरवरी २००५ के पितृवचनम् में ‘क्षीरसागर का मन्थन’ इस बारे में बताया। अगर जो भी इन्सान अपनी जिंदगी में अमृतमंथन करना चाहता है, तो उसे पहली बात आवश्यक यह है कि पहले जान ले, तो पहली चीज़ है – ‘ज्ञानं’। ज्ञान, कौन सा ज्ञान, कौन सा ज्ञान? बड़ा ज्ञान नहीं, ब्रह्म-माया वाला ज्ञान नहीं, तो यही ज्ञान, यही जानना कि मेरे पास, मेरे खुद के

ईरान और इस्रायल के बीच अघोषित युद्ध की तीव्रता बढ़ रही है

ईरान-इस्रायल के बीच अघोषित युद्ध की तीव्रता बढ़ रही है – आन्तर्राष्ट्रीय माध्यमों की चिंता दुबई – पाँच दिन पहले ‘रेड सी’ के क्षेत्र में ईरान के रिव्होल्युशनरी गार्ड्स का तैरता अड्डा होनेवाले ‘एमव्ही साविझ’ जहाज पर हमला हुआ। इस एक घटना के कारण, पिछले कुछ सालों से खाड़ी क्षेत्र में ईरान और इस्रायल के बीच जारी अघोषित छुपा युद्ध अब भड़कने लगा है। आनेवाले समय में इन दोनों देशों

Bapu, you run to me whenever I am in distress!

– Dr. Shashanksinh Hore, Khandawa Turning into a “God Believer” from an “agnostic” person is challenging. However, to narrate a person’s journey, who hated Bapu to becoming a Bapu-loving person, is even more complex and certainly requires courage. One can garner that courage from love for Bapu. This experience is being narrated by a person who is a Rheumatologist. During the journey of recovering from a very unpredictable and dangerous

मन:शान्ति कैसे प्राप्त करें 

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने 3 फरवरी २००५ के पितृवचनम् में ‘मन:शान्ति कैसे प्राप्त करें’ इस के बारे में बताया।   मनगुप्त कनकमार्ग, मनगुप्त कनकमार्ग, अब इसके दो अर्थ हो सकते हैं। मनगुप्त कनक की, मन में गुप्त रूप से रहनेवाला कनक, बहुत आसान अर्थ है और दूसरा अर्थ जो है, मतलब जो बहोत सुंदर है। मन जहाँ गुप्त हो जाता है, मन को जो गुप्त करता है ऐसा सोना। मन जहाँ

सम्मान और स्तुति को पचाना कठिन है    

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने 3 फरवरी २००५ के पितृवचनम् में ‘सम्मान और स्तुति को पचाना कठिन है’ इस के बारे में बताया।  अपमान है ना भाई, अपमान सहन करना, पचाना बहोत आसान बात है। लेकिन मान-रिस्पेक्ट, स्तुति उसे पचाना, उसे सहन करना बहोत कठीन है। अपमान मेरा हो गया, मुझे दुख होता है, लेकिन इससे मेरा कुछ नुकसान नहीं होता। लेकिन जब मुझे मान मिलने लगता है, रिस्पेक्ट मिलने लगता