Current Affairs

सीआरपीएफ़ के जवान शहीद होने पर ‘जेएनयू’ में जल्लोष

६ अप्रैल २०१० को छत्तिसगढ़ के दांतेवाडा ज़िले में माओवादियों ने बुज़दिल हमला किया और इस हमले में ‘सीआरपीएफ़’ के ७६ जवान शहीद हो गये। इस घटना के बाद देशभर में ग़ुस्से की तीव्र लहर दौड़ उठी थी। वहीं, ‘जेएनयू’ में इस हमले के बाद जल्लोष शुरू हुआ था। ‘इंडिया मुर्दाबाद, माओवाद ज़िंदाबाद’ के नारे यहाँ के कुछ छात्र दे रहे थे। माओवादियों को मिली इस क़ामयाबी के जल्लोष के

JNU

देशद्रोह के आरोप के तहत दिल्ली पुलीस द्वारा ग़िरफ़्तार किये गये छात्रनेता कन्हैया कुमार को अंतरिम ज़मानत पर रिहा किया गया। उसकी रिहाई के बाद ‘जेएनयू’ में जल्लोष मनाया जा रहा है। लगभग सभी वृत्तवाहिनियों (चॅनल्स) पर ‘कन्हैया’ के इंटरव्यू प्रसारित किये जा रहे हैं। इस छात्रनेता को कुछ लोग ‘राजनीतिक नायक’ के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं, ऐसे आरोप हो रहे हैं। उसी समय ‘जेएनयू’ यह देश को

‘जेएनयू’ के आदिवासी छात्रों की प्रतिक्रिया

‘जेएनयू’ में महिषासुर का समर्थन करनेवाले संगठन और उनके प्रतिनिधि ‘हम ग़रीबों का, पिछड़ीं जातियों-जनजातियों का प्रतिनिधित्व करते हैं’ ऐसा दावा करते रहते हैं। लेकिन उसमें अंशमात्र भी सच्चाई नहीं है, यह स्पष्ट हो चुका है। ‘महिषासुर शहादत दिन’ के कार्यक्रम का पोस्टर देखकर ग़ुस्सा हुए ‘जेएनयू’ के आदिवासी छात्रों ने उसपर सख़्त ऐतराज़ जताया। आदिवासी छात्रों ने इस कार्यक्रम के विरोध में प्रकाशित किये पत्रक की शुरुआत ही –

कर्जो का महासागर

कर्ज न चुकाने के कारण आम आदमी को बहोतसी तकलीफें उठानी पडती है। कर्ज चाहे कितनाही छोटा या बडा हो, सामान्य किसान अकाल के कारण उसका बोझ उठा नहीं पाता। कभी कबार एक लाख के कर्जे के लिए किसानोंको पाच-दस लाखकी जमीन गिरवी रखनी पडती है और अगर वह किसान उस कर्जे की किश्तीया नहीं भर पाया तो उसकी जमीन जप्त हो जाती है। इस कर्जे के कारण कई किसानोंको खुदकुशी करनी पडी

India’s Solar Power Program - Double-standards of WTO & US

The increasing ‘Green House’ gas emissions are responsible for deteriorating of atmosphere on the earth. We all are experiencing the undergoing changes in the nature’s cycle due to ‘global warming’. Researchers are also associating the melting of ice on both the poles, the extreme climatic changes in the seasons, increasing natural calamities such as floods, storms, etc. with the global warming. Hence for more than last one and a half

International conspiracy delayed India’s space programme, alleges senior ISRO scientist

  On 19th February 2016 India’s premier space agency, the Indian Space Research Organization (ISRO) successfully tested high-thrust indigenous cryogenic engine. This successful test will now make it possible for India in launching the heavy-lift version of the geo-stationary satellite launch vehicle (GSLV). But as a matter of fact, this milestone could have been accomplished long back. However, this project was hindered by an ‘international conspiracy’ to curtail India as

मृत्यु पर विजय

आज के दौर में दुनिया भर में घटित हो रहीं घटनाओं को देखकर आम आदमी का मानवता पर का विश्वास ही उठने लगता है। हिंसा, ख़ुदगर्ज़ी, दांभिकता, मक़्क़ारी, झूठापन ये अवगुण ही मानो इस कलियुग में दुनिया का उसूल बन रहे हैं। जो इन्सान नेकी से जीने की कोशिश करते हैं, उन्हें दक़ियानुसी क़रार दिया जाता है। जहाँ देखो, वहाँ निराशाजनक दृष्य ही दिखायी देता है। ऐसी निराश परिस्थिति में

Let us all salute our brave soldiers! Tricolour for Unity…

A day before yesterday when I happened to see the news it was a moment of disgrace for me to see a soldier, a war veteran like Maj. Gen. (Retd.) G.D. Bakshi in tears. A debate on the Union Government’s decision to hoist the national flag in campuses of education institution managed or funded by the government was being held in the midst of the news. It is a matter

Exemplary service of Indian Women UN Peacekeepers in Liberia

United Nations has been deploying peacekeeping forces across the world in areas which are troubled or violence-torn for protecting the innocent and common people. Over the years India has been the biggest troop contributor to these UN missions. And it is not just Indian men who are going in the corners of the world to make it a safer and a peaceful place but Indian women too are not far

युक्रेन का विस्फोट - भाग २

मगर ’सोविएत रशिया’ से स्वतंत्र हुए युक्रेन को रशिया के प्रभाव से निकालने की जरुरत ही क्यों थी? इसका उत्तर ढूंढने के लिए फिरसे थोडा पीछे जाना पडेगा। सन १९९७ में अमेरिका के एक प्रभावशाली राजनीतिक माने जानेवाले जिबिग्नोव ब्रिजेन्स्की की एक किताब प्रसिद्ध हुई। किताब का नाम था, ’द ग्रैंड चेसबोर्ड: अमेरिकन प्रायमसी ऐण्ड इट्स जिओस्ट्रैटेजिक इम्पेरेटिवज्’, इस किताब में उन्होंने ‘युरेशिया’(युरोप व रशिया) को शतरंज की बिसात कहकर,