Current Affairs

Current Affairs – Samirsinh Dattopadhye’s Official Blog

भारत और चीन

सेनाप्रमुख के लद्दाख दौरे द्वारा चीन को संदेश लडाख – नए सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने लद्दाख के चीन से सटे सीमाभाग का दौरा करके यहाँ की सुरक्षा का जायज़ा लिया। कुछ ही दिन पहले सेना प्रमुख ने यह आरोप किया था कि चीन को सीमा विवाद का हल निकालने में दिलचस्पी नहीं है और सीमा विवाद को धधकता रखने की नीति चीन ने अपनाई है। उस पृष्ठभूमि पर,

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कश्‍नर के जरिए सौदी इस्रायल में निवेश करेगा – अमेरिकन दैनिक का दावा वॉशिंग्टन – इस्रायल और अरब देशों के बीच इब्राहम करार के लिए कोशिश करनेवाले जैरेड कश्नर ने सौदी अरेबिया और जावई कश्नर के ’खाजगी इक्विटी फंड’ ने सौदी की लगभग दो अरब डॉलर्स जिनती निधि इस्रायल में निवेश करने की तैयारी की है। इसलिए पहली बार इस्रायल और सौदी में व्यापारी सहयोग प्रस्थापित होगा। ——————– राष्ट्राध्यक्ष एर्दोगन की

भारत और अमरीका के बीच बढ़ता तनाव

भारत किसी को भी खूष करने के निर्णय नहीं करेगा – विदेशमंत्री एस.जयशंकर नई दिल्ली – यूक्रैन का युद्ध रोककर चर्चा शुरू करने पर सबका ध्यान केंद्रीत होना चाहिये| इसके लिए भारत ने यूक्रैन युद्ध पर अपनायी भूमिका सबसे बेहतर हैं’, ऐसा कहकर विदेशमंत्री एस.जयशंकर ने फिर एक बार भारत ने अपनायी तटस्थ भूमिका का समर्थन किया| साथ ही यूक्रैन के मुद्दे पर भारत को उपदेश और इशारें दे रहीं

आक्रामक

रशिया की सम्पत्ति का राष्ट्रीयकरण कर रहे देशों को राष्ट्राध्यक्ष पुतिन का इशारा मास्को/बर्लिन – ‘दूसरे देशों में मौजूद रशिया की संपत्ति का राष्ट्रीयकरण करने की बयानबाज़ी वे देश कर रहे हैं| लेकिन, यह दुधारी तलवार है, इसका अहसास इसका इस्तेमाल करनेवालों को होना चाहिए’, ऐसी कड़ी चेतावनी रशिया के राष्ट्राध्यक्ष व्लादिमीर पुतिन ने दी है| जर्मनी ने रशिया की शीर्ष ईंधन कंपनी ‘गाज़प्रोम’ का जर्मनी में स्थित उपक्रम ‘गाज़प्रोम

अर्थव्यवस्था

ईंधन मार्केट की स्थिरता के लिए रशिया के संदर्भ में ‘ओपेक प्लस’ की भूमिका महत्त्वपूर्ण – सऊदी अरब का बयान रियाध – ईंधन मार्केट में अगर उचित स्थिरता रखनी है, तो सऊदी अरब और रशिया ने एक साथ आकर स्थापन किए ‘ओपेक प्लस’ इस गुट की भूमिका अहम है, इसे ध्यान में रखना होगा, ऐसा सऊदी अरब ने डटकर कहा है। मंगलवार को सऊदी अरब के मंत्रिमंडल की बैठक संपन्न

Ukraine-Russia conflict – Who suffers the most?

The whole world is keeping its finger crossed and watching the Ukraine-Russia conflict and its outcomes. Primarily, the intention to expand NATO all the way up to the borders of Russia has led to the present conflict. With Ukrainians losing battles and yet continuing to fight without any definite goal in sight highlights how Ukraine has become a pawn in the hands of President Volodymyr Zelensky and his so-called supporters.

ईरान परमाणु समझौता और जुडी ख़बरें

ईरान के परमाणु समझौते को रशिया कमज़ोर ना करे – अमरीका एवं यूरोपिय देशों का बयान वॉशिंग्टन/तेहरान/मास्को – यूक्रैन के संघर्ष के कारण पश्‍चिमी देशों ने रशिया पर लगाए प्रतिबंध ईरान के परमाणु समझौते के लिए बाधा बन सकते हैं, ऐसा इशारा रशिया ने कुछ दिन पहले दिया था| साथ ही, यह प्रतिबंध रशिया और ईरान के सहयोग को नुकसान पहुँचानेवाले साबित नहीं होंगे, इसकी पश्‍चिमी देश गारंटी दें, यह

परिणाम

तीसरा विश्‍वयुद्ध शुरू हुआ तो परमाणु हथियारों का इस्तेमाल होगा किव/मास्को – तीसरा विश्‍वयुद्ध शुरू हुआ तो इसमें परमाणु हथियारों का इस्तेमाल किया जाएगा और यह युद्ध अतिभंयकर संहार करेगा, ऐसा दहलानेवाला इशारा रशिया के विदेशमंत्री सर्जेई लैवरोव ने दिया। रशिया ने अपनी नौसेना की परमाणु पनडुब्बी के समावेश के साथ युद्धाभ्यास शुरू करके यह इशारा खोखला ना होने की बात भी दिखाई। इसके अलावा यूक्रैन को हथियारों की आपूर्ति

चीन का खतरा बढ़ने लगा

चीन के तनाव की पृष्ठभूमि पर फिलिपाईन्स ३२ ‘ब्लैक हॉक’ हेलीकॉप्टर्स खरीदेगा मनिला/वार्सा – साऊथ चायना सी में चीन की जारी वर्चस्ववादी हरकतों को रोकने के लिए फिलिपाईन्स ने अपने रक्षाबलों का आधुनिकीकरण गतिमान किया हैं| मंगलवार को फिलिपाईन्स ने पोलैण्ड के साथ ३२ ‘ब्लैक हॉक’ हेलीकॉप्टर खरीदने के समझौते पर हस्ताक्षर किए| पिछले चार महीनों में फिलिपाईन्स ने किया यह तीसरा बड़ा रक्षा समझौता हैं| इससे पहले फिलिपाईन्स ने

इस्रायल और अरब देशों में बढ़ता सहयोग

सुरक्षा के लिए मित्रदेशों को जब चाहिये तब सहायता प्रदान करने के लिए इस्रायल तैयार मनामा – इस्रायल के प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट बहरीन की ऐतिहासिक यात्रा पर हैं। सोमवार रात प्रधानमंत्री बेनेट बहरीन दाखिल हुए और जल्द ही वे किंग हमाद बिन इशा अल खालिफा से मुलाकात करेंगे। अब्राहम समझौते में शामिल इस्रायल और अरब देशों का सहयोग औपचारिक स्तर पर रखने के बजाए इसे सामरिक स्तर तक बढ़ाने का