Samirsinh Dattopadhye

श्रीअनिरुद्ध गुरुक्षेत्रम्‌ मधील हनुमान चलिसा पठण (Hanuman Chalisa)

श्रद्धावानांसाठी सर्वोच्च तिर्थक्षेत्र असणार्‍या श्रीअनिरुद्ध गुरूक्षेत्रम्‌ येथे दर वर्षी ‘हनुमान चलिसा पठण’ सप्ताह आयोजित केला जातो. यात सलग सात दिवस कमीतकमी १०८ श्रद्धावान प्रेमाने व श्रद्धेने १०८ वेळा (सकाळी ८ ते रात्रौ ८ या दरम्यान) हनुमान चलिसाचे पठण करतात. यावर्षी मंगळवार दिनांक २१ एप्रिल २०१५ (अक्षय तृतिया) पासून सोमवार २७ एप्रिल २०१५ (वैशाख शुद्ध दशमी) पर्यंत ‘हनुमान चलिसा पठण’ होणार आहे. या हनुमान चलिसा पठणात इतर श्रद्धावान येथे येऊन या

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अनावश्यक विचारांसाठी स्वत:ची ऊर्जा वाया घालवू नका – भाग १ (Don’t Waste Your Energy On Unnecessary Thoughts -Part 1) प्रपंचामध्ये परस्पर-संवादाबरोबरच आवश्यकता असते ती एकमेकांना समजून घेण्याची(Understanding Each Other). माणसाला वाटते की समोरच्याने स्वत:च्या मनातील प्रत्येक गोष्ट मला सांगावी. पण ही अपेक्षा करण्याआधी त्याने हा विचार करावा की मी समोरच्याशी असा वागतो का? परस्परांना समजून न घेण्याच्या वृत्तीतूनच बर्‍याच अडचणी निर्माण होतात. एकमेकांना समजून घेणे आवश्यक का आहे, याबद्दल परमपूज्य

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एकमेकांना समजून घेण्याचे महत्त्व (Significance Of Understanding Each Other) प्रपंचामध्ये परस्पर-संवादाबरोबरच आवश्यकता असते ती एकमेकांना समजून घेण्याची(Understanding Each Other). माणसाला वाटते की समोरच्याने स्वत:च्या मनातील प्रत्येक गोष्ट मला सांगावी. पण ही अपेक्षा करण्याआधी त्याने हा विचार करावा की मी समोरच्याशी असा वागतो का? परस्परांना समजून न घेण्याच्या वृत्तीतूनच बर्‍याच अडचणी निर्माण होतात. एकमेकांना समजून घेणे आवश्यक का आहे, याबद्दल परमपूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या २२ जानेवारी २०१५ रोजीच्या प्रवचनात सांगितले, जे

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साँस और दिव्यत्व – भाग २ (Breathing And Divinity – Part 2) जो सही है उसे स्वीकार करना और जो गलत है उसे बाहर फेंकना यह क्रिया साँस प्रक्रिया में सहज रूप में होती रहती है और इसीलिए साँस को भी दिव्य माना गया है। मानव का बच्चा जन्म लेते ही रोने लगता है। दर असल वह रोता नहीं है, बल्कि साँस लेता है। मानव की मृत्यु का वर्णन करते

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साँस और दिव्यत्व – भाग १ (Breathing And Divinity -Part 1) जो सही है उसे स्वीकार करना और जो गलत है उसे बाहर फेंकना यह क्रिया साँस प्रक्रिया में सहज रूप में होती रहती है और इसीलिए साँस को भी दिव्य माना गया है। मानव का बच्चा जन्म लेते ही रोने लगता है। दर असल वह रोता नहीं है, बल्कि साँस लेता है। मानव की मृत्यु का वर्णन करते हुए

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भगवान किसी भी संकट से बडा है (God is Greater Than Any Problem) भगवान पर रहनेवाला विश्वास यह सबसे अहम बात है। भगवान पर का भरोसा कभी भी हिलने मत दीजिए। जितना संकट बडा उतना भगवान (God) पर का विश्वास भी बडा रखो। मानव के लिए कोई संकट बडा हो सकता है, मगर भगवान (God) किसी भी संकट से बडा ही है, इस बारे में परमपूज्य सद्गुरू श्री अनिरुद्ध बापूनें

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धारा शब्द को उलटा करने पर राधा शब्द बनता है (The Revert of Dhara Is Radha) मनुष्य के जीवन का सफर यह एक ‘धारा’ है। सृजन से लेकर विनाश तक बहनेवाली यह जीवनरूपी धारा होती है। विधायक से विघातक की दिशा में रहनेवाली गति धारा कहलाती है। विघातक शक्ति का रूपान्तरण जो विधायक शक्ति में करती है, वही राधा (Radha) है। धारा शब्द को उलटा करने पर राधा (Radha) शब्द

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दिव्य शक्ति (Divya Shakti) कार्य की दृष्टि से शक्ति के विधायक और विघातक इस तरह दो प्रकार माने जाते हैं। मानव के जीवन में विधायक शक्ति को कार्यान्वित कर विश्व की विघातक शक्तियों को कम करने का काम दिव्यशक्ति ( Divya Shakti ) करती है। ‘जिससे पवित्रता और आनन्द उत्पन्न होता है, वही दिव्य है’ और जो इस दिव्यता को प्रदान करती है उसे देवी कहते हैं। ‘राधा’ यह इस

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विचार के विधायक और विघातक ये दो पहलू – भाग २ (Constructive And Destructive Aspects Of Thought-Part 2) हर एक विचार (Thought) की, हर एक बात की मानव के जीवन में एक भूमिका रहती है। विचार (Thought) या कोई बात ये विधायक और विघातक दो प्रकार के रहते हैं। वह विचार या बात विधायक या विघातक इनमें से किस रूप में कार्य करेगी, यह मानव अपनी कर्मस्वतन्त्रता का उपयोग किस

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विचार के विधायक और विघातक ये दो पहलू – भाग १ (Constructive And Destructive Aspects Of Thought-Part 1) हर एक विचार (Thought) की, हर एक बात की मानव के जीवन में एक भूमिका रहती है। विचार या कोई बात ये विधायक और विघातक दो प्रकार के रहते हैं। वह विचार (Thought) या बात विधायक या विघातक इनमें से किस रूप में कार्य करेगी, यह मानव अपनी कर्मस्वतन्त्रता का उपयोग किस