Sailee Paralkar

मन:शान्ति कैसे प्राप्त करें 

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने 3 फरवरी २००५ के पितृवचनम् में ‘मन:शान्ति कैसे प्राप्त करें’ इस के बारे में बताया।   मनगुप्त कनकमार्ग, मनगुप्त कनकमार्ग, अब इसके दो अर्थ हो सकते हैं। मनगुप्त कनक की, मन में गुप्त रूप से रहनेवाला कनक, बहुत आसान अर्थ है और दूसरा अर्थ जो है, मतलब जो बहोत सुंदर है। मन जहाँ गुप्त हो जाता है, मन को जो गुप्त करता है ऐसा सोना। मन जहाँ

सद्यपिपा श्री. अप्पासाहेब दाभोलकर ह्यांना श्रद्धांजली

हरि ॐ श्री. अप्पासाहेब दाभोलकर ह्यांना पूज्य सुचितदादा व मी स्वत: सर्व संस्थेच्या वतीने श्रद्धांजली अर्पण करीत आहोत व आज श्रीसाईसच्चरित्राचा ४० वा अध्याय वाचणार आहोत. – समीरसिंह दत्तोपाध्ये बुधवार, दि. ०७ एप्रिल २०२१  

सम्मान और स्तुति को पचाना कठिन है    

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने 3 फरवरी २००५ के पितृवचनम् में ‘सम्मान और स्तुति को पचाना कठिन है’ इस के बारे में बताया।  अपमान है ना भाई, अपमान सहन करना, पचाना बहोत आसान बात है। लेकिन मान-रिस्पेक्ट, स्तुति उसे पचाना, उसे सहन करना बहोत कठीन है। अपमान मेरा हो गया, मुझे दुख होता है, लेकिन इससे मेरा कुछ नुकसान नहीं होता। लेकिन जब मुझे मान मिलने लगता है, रिस्पेक्ट मिलने लगता

International Community comes together to resist China's aggression

Japan-Indonesia sign defence agreement due to increasing Chinese threat The Japanese foreign ministry said, ‘The consistent efforts to make changes unilaterally, in the South China Sea by using force, has become a cause for major concern. The concerns felt by Japan and Indonesia are identical.’ The Japanese foreign ministry underlined the Chinese threat without directly taking names during the two-plus-two talks between the Foreign and Defence Minister of both the

चीन की आक्रामकता के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय समुदाय सक्रिय

चीन का खतरा बढ़ते समय, जापान-इंडोनेशिया रक्षा सहयोग समझौता ‘साऊथ चायना सी क्षेत्र मे ताकत का इस्तेमाल करके एकतरफ़ा बदलाव करने के लिए लगातार जारी कोशिशें चिंताजनक साबित होती हैं। जापान और इंडोनेशिया इन दोनों देशों को इस मामले में प्रतीत हो रही चिंता एकसमान है’, ऐसा जापान के विदेश मंत्रालय ने कहा है। दोनों देशों के विदेश मंत्री और रक्षा मंत्रियों में हुई ‘टू प्लस टू’ चर्चा के दौरान,

Bapu Always Protects His Children

– Abhishekhsinh Shah, Vile-Parle Even if humans have made significant progress scientifically, when nature shows us its power and fury, all efforts, human intelligence seems subliminal. Man feels relatively insignificant. And then he realizes that he is helpless without the support of that “One” – the Sadguru. Those who have unwavering faith in one’s Sadguru, facing a calamity, is an acknowledgement of his existence in one’s life. They get out

श्रीगुरु चरन सरोज रज

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने २४ फरवरी २००५ के पितृवचनम् में हनुमान चलिसा के ‘श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि’ इस चौपाई के बारे में बताया।  पहले सौ बीघा जमिन थी, लेकर आया था सौ बीघा, जाते समय बेचके कुछ भी नहीं रहा, ऐसा नहीं होना चाहिए। सौ बीघा लेके आये थे, दस हजार बीघा करके चले गये, ये मेरे जीवन का एम्स ऍण्ड ऑब्जेक्टीव होना चाहिए। तब जिंदगी