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Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 14 Jan 2016 that, Jivatma is an integral part of Paramatma.

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १४ जनवरी २०१६ के पितृवचनम् में ‘जीवात्मा यह परमात्मा का ही अभिन्न अंश होता है’, इस बारे में बताया। और मैं क्या हूँ, every human being क्या है? तुम एक शरीर नहीं हो कि जिसमें आत्मा है। जान लो भाई, हम लोग क्या सोचते हैं कि, मेरा शरीर है और मेरे शरीर में मेरी आत्मा है, नहीं, तुम आत्मा हो, जिसके पास एक शरीर

परमात्मा अपने हर एक भक्त पर फोकस्ड रहता है। (Paramatma is focussed on His every Bhakta) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 08 Jan 2015

परमपूज्य सद्‍गुरू श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने ०८ जनवरी २०१५ के हिंदी प्रवचन में ‘परमात्मा अपने हर एक भक्त पर फोकस्ड रहता है’ (Paramatma is focussed on His every Bhakta) इस बारे में बताया। परमात्मा अपने हर भक्त पर फोकस्‍ड रहता है। परमात्मा इस सृष्टी के सभी जीवों का, भक्तों का भला चाहते हैं। भगवान, सद्‍गुरुतत्त्व अपने भक्तों की मदत करने के लिये जिस रुप की जरुरत है, वह रुप

परमात्मा का वादा कभी झूठा नहीं होता (Paramatma always keeps his promises) - Aniruddha Bapu‬

Paramatma always keeps his promises परम पूज्य सद्‍गुरू श्री अनिरुद्ध बापूने उनके ०८ जनवरी २०१५ के हिंदी प्रवचनके दौरान ‘ परमात्मा (Paramatma) का वादा कभी झूठा नही होता, वह अपना वादा निभाता ही है’, इस बारे में बताया। जो इन्सान का जन्म लेता है, वह सिर्फ दो ही प्रान्त या प्रदेश में जी सकता है। पहला आदिमाता और परमात्मा के इच्छा का दुसरा प्रान्त है नियमों का प्रान्त। दुसरे प्रान्त

सर्वोच्च प्रेमस्वरूप परमात्मा (Paramatma - The Supreme Love) - Aniruddha Bapu Marathi Discourse 28 October 2004

भगवंतावर प्रेम करत रहा, मग तो तुमची काळजी घेतोच. कुणी कितीही पापी असेल, तरी ज्याला खरा पश्चात्तात झाला आहे आणि भक्तिमार्गावर चालून सुधारण्याची इच्छा आहे, त्याचा उद्धार भगवंत करतोच. आमचे भले करण्यास राम समर्थ आहे, आम्हाला त्याच्यावर प्रेम करायचे असते. प्रेमस्वरूप परमात्मा (Paramatma) हा सच्चिदानन्द आहे, याबाबत सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या गुरूवार दिनांक २८ ऑक्टोबर २००४ रोजीच्या प्रवचनात मार्गदर्शन केले, जे आपण या व्हिडियोत पाहू शकता. ॥ हरि ॐ ॥ ॥

clarifies

Spirituality says that we should offer complete Sharanya (Surrender to Parmatma), but the meaning of this term is often not understood. In the Hindi discourse dated 6th October 2005, Sadguru Aniruddha (Bapu) clarifies this. Bapu says that just as we trust our own existence and do not require any proof for it, we should have trust on the existence of Parmatma, and that the Parmatma always wishes our well-being. Even during

शरण, Radhe Krishna

In this Hindi discourse (dated 6th October 2005), Sadguru Aniruddha explains why one should surrender at the feet of Radhe-Krishna, the Parmatma. Importantly, Bapu has very clearly elucidated the difference between surrendering at the feet of the Almighty and surrendering before a person at war. In the end, with the help of shlok “Sarva-dharman parityajya mam ekam saranam vraja”, Bapu tells us the benefits of surrendering before God. इस हिंदी

समय, times, साथ चलो, काल, भगवान, जीवन, क्षमा, Sadguru Shree Aniruddha

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने ३१ मार्च २०१६ के पितृवचनम् में ‘समय के साथ चलो’ इस बारे में बताया। कईं लोगों को देखता हूँ, तो बस पढ़ते ही रहते हैं, कभी भी देखो खेलते रहते हैं मोबाईल पर, नहीं तो पढ़ते रहते हैं। इससे कुछ नहीं मिलता, ध्यान में रखिए। ये हमारे जो समय भगवान ने दिया हुआ है वो सिर्फ गिना-चुना है। कोई नहीं आज अगर सोचता है, कोई भी

सच्चिदानन्द सद्‍गुरुतत्त्व - भाग १

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने ०७ अक्टूबर २०१० के पितृवचनम् में ‘सच्चिदानन्द सद्‍गुरुतत्त्व(Satchidanand Sadgurutattva)’ इस बारे में बताया। तो ये बात ऐसी है कि ये जो गुरुतत्त्व होता है, सद्‍गुरु जो होता है, उसके चरण ये क्या चीज़ है, ये पहले जानना चाहिये हमें। गुरु के चरण यानी क्या? गुरु के चरण, दो चरण जो होते हैं। एक कदम से वो शुभंकर कार्य करते हैं, दूसरे कदम से अशुभनाशन का कार्य

discipline in life

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने ०७ अक्टूबर २०१० के पितृवचनम् में ‘जीवन में अनुशासन (discipline in life) का महत्त्व’ इस बारे में बताया। ये संयम जो है, बहुत आवश्यक होता है। जहाँ जितना बोलना चाहिए, उतना ही बोलना चाहिए। जहाँ जो करना चाहिए, उतना ही करना चाहिए। जहाँ शौर्य चाहिए, वहाँ शौर्य चाहिए। जहाँ शान्ति चाहिए, वहाँ शान्ति ही चाहिए। हर चीज़ की आवश्यकता होती है। लेकिन हम अपने मन पर

श्रद्धावानों के लिये जीवन में सुंदरकांड का महत्व

हरि ॐ, आज दुनियाभर में जो परिस्थिति है, उस परिस्थिति में भी बापुजी के सभी श्रद्धावान मित्र उपासना के माध्यम से बापुजी के साथ दृढ़तापूर्वक जुड़ गये हैं और इस सांघिक उपासना के साथ ही, श्रद्धावान अपनीं व्यक्तिगत उपासनाएँ और खुद की प्रगति के लिए आवश्यक होनेवाले विभिन्न Online Courses इनके माध्यम से, बापुजी के बतायेनुसार समय का यथोचित इस्तेमाल करके इस संकट के दौर को अवसर में परिवर्तित कर