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स्वस्तिक्षेम संवादम्‌ - दिव्य चण्डिकाकुल के साथ संवाद (Swastikshem Samvadam - The Conversation with the divine Chandikakul) - Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ७ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में ‘स्वस्तिक्षेम संवादम्‌ यह दिव्य चण्डिकाकुल के साथ किया जानेवाला संवाद है’ इस बारे में बताया। अनिरुध्द बापू ने कहा कि अभी हम स्वस्तिक्षेम संवादम्‌ करने जा रहे हैं। फिर एक बार मै बताता हूं कि स्वस्तिक्षेम संवादम्‌ क्या है? हर एक व्यक्ति अपने मन में, अपने मन की जो भी बात करना चाहता हो, इस चण्डिकाकुल के किसी

Aniruddha Bapu told Shuddha swadharm pillars - Shreeshabdadhyaanyog, Shreeshwasam, Swastikshem Sawadam, Shree Gurukshetram Mantra in Pitruvachanam 22 Oct 2015

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २२ अक्तूबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘शुद्ध स्वधर्म स्तंभ’ – ‘श्रीशब्दध्यानयोग, श्रीश्वासम्‌, श्रीस्वस्तिक्षेम संवादम्‌, श्रीगुरुक्षेत्रम्‌ मंत्र’ के बारे में बताया। ‘श्रीशब्दध्यानयोग इस स्तंभ के बारे में बताने के बाद अन्य स्तंभों की जानकारी देत् हुए बापू ने कहा- श्रीश्वासम्‌! हम लोग श्रीश्वासम्‌ सुनते हैं, वहॉ जो अपने आप जो ब्रीदींग होता है, जब तब सुन रहे होते हैं, उस ब्रीदिंग से हम लोग जो

स्वस्तिक्षेम संवादम्‌ (Swastikshem Sanwad)

कल परमपूज्य बापूजी ने प्रवचन में स्वस्तिक्षेम संवादम्‌ की संकल्पना सारे श्रद्धावानों के समक्ष रखी; सभी श्रद्धावानों के हित के लिए। इस में प्रत्येक श्रद्धावान को चण्डिकाकुल के किसी भी सदस्य के साथ संवाद करना है। श्रद्धावान के मन की भावना, विचार या वो जो कुछ कहना चाहता है वो उस सदस्य के समक्ष कह सकता है। पहले बापू श्रीहरिगुरुग्राम में प्रवचन से पूर्व, “सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि

स्वस्तिक्षेम संवादम् (swastikshem-sanwad)

काल परमपूज्य बापूंनी प्रवचनामध्ये स्वस्तिक्षेम संवादम्‌ची संकल्पना सर्व श्रद्धावानांसमोर मांडली; सर्व श्रद्धावानांच्या हितासाठी. यामध्ये प्रत्येक श्रद्धावानाने चण्डिकाकुलातील कुठल्याही सदस्याशी संवाद साधावयाचा आहे. श्रद्धावानाच्या मनातील भावना, विचार किंवा तो जे काही सांगू इच्छितो ते त्या त्या सदस्यासमोर त्याने मांडावयाचे आहे.  प्रथम बापू श्रीहरिगुरुग्राम येथे प्रवचना आधी, “सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोस्तु ते।।’ हा श्‍लोक म्हणतील. त्यानंतर कमीतकमी ५ मिनिटांचा काळ असेल, ज्या वेळेस प्रत्येक श्रद्धावानाने डोळे बंद करून, आपण प्रत्यक्ष

आदिमातेचा तृतीय नेत्र आदिमातेचा तृतीय नेत्र जीवन मंगलमय करतो (The third eye of Aadimata makes your life auspicious)

सद्गुरू श्री अनिरुद्ध बापूंनी त्यांच्या ०९ जानेवारी २०१४ च्या मराठी प्रवचनात  ‘आदिमातेचा तृतीय नेत्र जीवन मंगलमय करतो’ याबाबत सांगितले. Fear of injury, आयुष्य आमचं सगळं या एका fear मध्ये बंदिस्त होऊन पडतं. पटतंय? या fear मधून बाहेर पडायचं असेल, तर आपल्या आईने एक अल्गोरिदम दिलेला आहे, अतिशय सुंदर. आपण जो मंत्र म्हणतो या स्वस्तिक्षेम संवादम् मध्ये, त्याच्या सुरुवातीलाच आपण म्हणतो – सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्यै त्र्यंबके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ३० नवंबर २०१७ के पितृवचनम् में ‘४ सेवाओं का उपहार’ इस बारे में बताया। हर साल, हर दिन, हर पल हर एक श्रद्धावान के मन में, हर एक इन्सान के मन में ये विचार रहता है कि मैं जिस स्थिति में हूं, उस स्थिति से मैं और कैसे आगे चला जाऊं, मेरा विकास कैसा हो जाये, मुझे सुख कैसा प्राप्त हो जाये, मेरे दुख

"नित्य उपासना" और "हरिगुरु गुणसंकीर्तन" का अनन्यसाधारण महत्व - (The importance of "Daily Prayers" & "Hariguru Gunasankirtan") - Aniruddha Bapu Pitruvachanam 31st Dec 2015

नये साल का स्वागत करते समय, ३१ दिसंबर २०१५, गुरुवार के दिन सद्‌गुरु बापू ने अपने पितृवचन में, अगले साल याने २०१६ साल में “नित्य उपासना” (daily prayers) और “हरिगुरु गुणसंकीर्तन” के अनन्यसाधारण महत्व को विशद किया था। इस पितृवचन का महत्वपूर्ण भाग संक्षिप्त रूप में मेरे श्रद्धावान मित्रों के लिए इस पोस्ट के द्वारा मैं दे रहा हूँ। “अभी २०१६ साल चंद घण्टों में शुरु होनेवाला है । हर

गुरुवार पितृवचनम् - १० डिसेंबर २०१५

गुरुवार, दि. १० दिसम्बर २०१५ को श्रीहरिगुरुग्राम में परमपूज्य बापू ने एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण विषय पर पितृवचन दिया। श्रद्धावानों के लिए बहुत ही श्रद्धा का स्थान रहनेवाला त्रिविक्रम “श्रीश्वासम” में निश्चित रूप में कैसे कार्य करता है और मानव का अभ्युदय करानेवालीं ‘कार्यक्षमता’, ‘कार्यशक्ति’ और ‘कार्यबल’ इन तीन मूलभूत ज़रूरतों की आपूर्ति कैसे करता है, इस बारे में बापू ने किया हुआ पितृवचन संक्षिप्त रूप में मेरे श्रद्धावान मित्रों

Aniruddha Bapu pitruvacahanam

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने १५ अक्तूबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘श्रीशब्दध्यानयोग’ के बारे में बताया। अनिरुद्ध बापू ने आज से शुरू किये हुए प्रथम पितृवचन के दौरान यह बताया कि ‘आज मी येथे आलो आहे सांगितल्याप्रमाणे, ते काहीतरी नवीन तयार करण्यासाठी. हम जो आज यहॉ मिल रहे हैं, एकही कारण से। हमें स्वस्तिक्षेम्‌ संवादम्‌ मिला, हमें श्रीश्वासम्‌ में गुह्यसूक्तम्‌ मिला, आज हमें क्या मिलनेवाला है? बहोत ही