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सूर्य, चंद्र आणि अल्गोरिदम (The Sun, The Moon And The Algorithm)

सद्गुरू श्री अनिरुद्धांनी त्यांच्या २० जून २०१३ च्या मराठी प्रवचनात ‘सूर्य, चंद्र आणि अल्गोरिदम’ याबाबत सांगितले.   हा सूर्य आणि हा चंद्र म्हणजे दिवस आणि रात्र यांची पण प्रतिकं आहेत म्हणजे प्रकाश असणं आणि प्रकाश नसणारी वेळ रात्र म्हणजे काळोख नाही, प्रकाश नसणारी वेळ त्या दोन्ही मध्ये असणारे हे दोन आकाशात लावलेले लोलक आहेत. ज्यादिवशी अमावास्या आहे त्यादिवशी आम्ही काय म्हणतो? आकाशात चंद्र नाही म्हणजे चंद्राचा प्रकाश नाही. पण त्यादिवशी आकाशाकडे बघा

सद्‍गुरू श्री अनिरुद्ध बापूंनी त्यांच्या ०४ जून २०१५ च्या मराठी प्रवचनात ‘सूर्यकिरणांना हिरण्य असेही म्हटले जाते’ याबाबत सांगितले. तुम्हाला धंदा करताना एक रुपयाची गोष्ट तुम्ही शंभर रुपयाला विकू शकत असाल, चांगली गोष्ट आहे, पण त्याचा जीव जातो आहे. एक रुपयाची गोष्ट तुम्ही २ रुपयाला जरी विकली तरी ते चुकीचं आहे. हा एक भेद आम्हाला नीट करता आला पाहिजे. तुम्ही मिलावट करून करणार असाल तरी ते चुकीचं आहे. भेसळ करून विकणार

श्री पञ्चमुखहनुमत्कवच

।। हरि: ॐ ।। ॥ अथ श्रीपञ्चमुखहनुमत्कवचम् ॥ श्रीगणेशाय नम: । ॐ अस्य श्रीपञ्चमुखहनुमत्कवचमन्त्रस्य ब्रह्मा ऋषि: । गायत्री छंद: । पञ्चमुख-विराट् हनुमान् देवता । ह्रीम् बीजम् । श्रीम् शक्ति: । क्रौम् कीलकम् । क्रूम् कवचम् । क्रैम् अस्त्राय फट् । इति दिग्बन्ध: । ॥ श्री गरुड उवाच ॥ अथ ध्यानं प्रवक्ष्यामि शृणु सर्वांगसुंदर । यत्कृतं देवदेवेन ध्यानं हनुमत: प्रियम् ॥१॥ पञ्चवक्त्रं महाभीमं त्रिपञ्चनयनैर्युतम् । बाहुभिर्दशभिर्युक्तं सर्वकामार्थसिद्धिदम् ॥​२​॥ पूर्वं तु वानरं

Indian-Navy

वायुसेना ने किया ‘आकाश’ और ‘इग्ला’ का परीक्षण मुंबई – भारतीय वायुसेना ने आंध्र प्रदेश के सूर्यालंका एअरफोर्स स्टेशन से स्वदेशी ‘आकाश’ और रशियन निर्माण के ‘इग्ला’ मिसाइलों का परीक्षण किया। वायुसेना के अड्डे पर २३ नवंबर से २ दिसंबर के दौरान युद्धाभ्यास का आयोजन हुआ। इस दौरान इन मिसाइलों का परीक्षण किए जाने की बात कही जा रही है। इन मिसाइलों के परीक्षण के समय उप-वायुसेना प्रमुख एअर मार्शल

गुरुत्वाकर्षण

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने ०७ अक्टूबर २०१० के पितृवचनम् में ‘जीवन में अनुशासन का महत्त्व’ इस बारे में बताया। गुरु के साथ चलना यानी क्या? उसकी आज्ञा का पालन करना, राईट! और जो गुरु की आज्ञा का पालन करता है, छोटी से छोटे। तो उस गुरु के चरण हमेशा उसे डिसीप्लीन प्रदान करते हैं। क्योंकि गुरु के चरण, ‘गुरु’ शब्द में ही क्या है? हम लोग क्या कहते हैं, अर्थ

आश्विन नवरात्रि उत्सव (अशुभनाशिनी नवरात्रि उत्सव) के संदर्भ में सूचना

हरि ॐ, कोरोना वायरस, “कोविद – १९” की व्यापकता का अंदाज़ा सभी श्रद्धावानों को है ही। आज के इस दौर में श्रीअनिरुद्ध गुरुक्षेत्रम्‌ बंद होकर, आनेवाली आश्विन नवरात्रि में भी वह बंद ही रहेगा और नवरात्रि का कोई भी कार्यक्रम गुरुक्षेत्रम्‌ में नहीं होगा, इसपर कृपया सभी श्रद्धावान ग़ौर करें। इस पृष्ठभूमि पर, सद्‍गुरु बापुजी के कहेनुसार, श्रद्धावान इस साल आश्विन नवरात्रि उत्सव (अशुभनाशिनी नवरात्रि उत्सव) में “अंबज्ञ इष्टिका पूजन”

जीवन में अनुशासन का महत्त्व - भाग २

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने ०७ अक्टूबर २०१० के पितृवचनम् में ‘जीवन में अनुशासन का महत्त्व’ इस बारे में बताया। सो, डिसीप्लीन जो है, जो अनुशासन है, हमारे जिंदगी में हर पल के लिए आवश्यक है। लेकिन ये अनुशासन, डिसीप्लिन अपने जीवन में रखने के लिए हमें बहोत सारी ताकद चाहिए। दूसरे को अनुशासन सिखाना है, अपने हाथ के नीचे जो काम कर रहे हैं, अपने अंडर जो काम कर रहे

मनुष्य का मन अन्न के तरल भाग से बनता है - भाग २

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने ०७ अक्टूबर २०१० के पितृवचनम् में ‘मनुष्य का मन अन्न के तरल भाग से बनता है’ इस बारे में बताया। तो ये जो पायसम और ये जो श्रीखंडम हैं, ये बेस्ट विशेष पदार्थ क्यों माने गए? क्योंकि ये जो भावशारीरि गुण जो इनमें हैं, इनसे जो शरीर में, हर एक के शरीर में भावशारीरि गुण बनते हैं, वो समान हैं। यानी जैसे देखिए कि, एक एक्झाम्पल

इस साल के चैत्र नवरात्रि उत्सव के बारे में सूचना

कोरोना वायरस, “कोविद – १९” की व्यापकता दुनिया भर में बढ़ी होने का चित्र फिलहाल विशेष रूप से महसूस हो रहा है। सद्‍गुरु अनिरुद्ध बापुजी के मार्गदर्शन में श्रद्धावान इस मामले में सतर्क होकर, शासन / प्रशासन द्वारा जारी की गयीं सूचनाओं तथा नियमों का भी यथाशक्ति मनःपूर्वक पालन कर रहे हैं। इस पार्श्वभूमि पर, सद्‍गुरु बापुजी के कहेनुसार, श्रद्धावान इस साल चैत्र नवरात्रि उत्सव (शुभंकरा नवरात्रि उत्सव) में “अंबज्ञ

मूलाधार चक्र का लम् बीज और भक्तमाता जानकी - भाग २

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ४ फरवरी २०१६ के प्रवचन में ‘मूलाधार चक्र का ‘लम्’ बीज और भक्तमाता जानकी’ इस बारे में बताया।   जानकी जो है, सीतामैया जो है, ये directly ‘लं’ बीज का आविष्कार है। ये वसुंधरा की कन्या होने के कारण, ये ‘लं’ बीज का मूर्तिमंत आविष्कार क्या है? तो ये ‘जानकी’ है। और उसकी शादी किसके साथ हो रही है? ‘राम’ के साथ – ‘श्रीराम’ के