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कृष्णायै नम:

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने ०६ अक्तूबर २००५ के हिंदी पितृवचनम् में ‘ॐ कृष्णायै नम:’ इस बारे में बताया। वो स्वयं भक्तिरूपिणी हैं, ये राधा भक्तिरूपिणी हैं और हम लोग जानते हैं कि श्रीमद्‍भागवत में एक श्लोक है, नारद को भगवान स्वयं श्रीकृष्ण, स्वयं श्रीकृष्ण भगवान कह रहे हैं, ‘मद्‌भक्ता यत्र गायन्ति, मद्‌भक्ता यत्र गायन्ति, तत्र तिष्ठामि नारद।’, मद्‌भक्ता यत्र गायन्ति, तत्र तिष्ठामि नारद।’ ‘हे नारद, जहाँ मेरे भक्त भजन-पूजन करते

तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने ०३ मार्च २००५ के प्रवचन में ‘तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा:’ इस बारे में बताया। जिसका भी सच्चा उपभोग लेना चाहते हो, जो मेरे हित के लिए हो, तो उसका उपभोग करने के पहले त्याग करना सिखो और ये सिखाने वाली, ये राधा हैं। क्योकिं वो त्याग करके ही उसने जनन किया है सारी सृष्टी का। इसी लिए अगर मैं उसे जननी मानता हूँ, मानता हूँ नहीं मानना

जिज्ञासा यह भक्ति का पहला स्वरूप

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने ०७ अप्रैल २००५ के पितृवचनम् में ‘जिज्ञासा यह भक्ति का पहला स्वरूप है’ इस बारे में बताया। यह जिज्ञासा जो है, यही भक्ति का पहला स्वरूप है। भक्ति का पहला स्वरूप यानी राधाजी का पहला स्वरूप हर मानव के पास जिज्ञासा के रूप में रहता है। जिज्ञासा, भगवान के प्रति जिज्ञासा नहीं, इस विश्व के प्रति जिज्ञासा। यह सूरज कैसा है? यह पृथ्वी इतनी बड़ी है,

काल और दिशा ये हमारे लिए संदर्भ-बिन्दु हैं

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धने १५ मई २०१४ के पितृवचनम् में ‘दिशा और काल हमारे लिये ‘काल और दिशा ये हमारे लिए संदर्भ-बिन्दु हैं’ इस बारे में बताया। सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धने १५ मई २०१४ के पितृवचनम् में ‘दिशा और काल हमारे लिये ‘काल और दिशा ये हमारे लिए संदर्भ-बिन्दु हैं’ इस बारे में बताया। दिशा और काल ये क्या है हमारे लिये? Reference point है। यानी संदर्भ नहीं सिर्फ, reference point, it

Shree Vanadurga Yojna

‘अल्फा टू ओमेगा’ न्युजलेटर – हिन्दी संस्करण जून २०१८ संपादकीय, हरि ॐ श्रद्धावान सिंह/वीरा, मानसून की अच्छी शुरुआत हमारे जीवन में ढेर सारी खुशियाँ लाती है, जबकि मानसून देर से आने से सभी लोग चिंतित हो जाते है। आइये, हम सब मिलकर प्रार्थना करें कि हमारे देश में इस मानसून में अच्छी बारिश हो। क्योंकि एक ज़िम्मेदार नागरिक होने के कारण हमें कम वर्षा से होने वाले दुष्प्रभावों से बचने

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 14 Jan 2016 that, 'Recreational Activity'

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १४ जनवरी २०१६ के पितृवचनम् में  ‘रिक्रिएशनल अॅक्टिव्हिटी’ के बारे में बताया। देखिये, पिंगला नाडी क्या है सौर यानी सूरज की नाडी है और इडा ये क्या है, चंद्र नाडी है। अब दिन भर हम लोग काम करते हैं और रात को सोते हैं, राईट! रात का सोना आवश्यक है। अगर चार रात नही सोयेंगे तो पाचवीं रात हम लोग कुछ नहीं कर सकेंगे।

रं बीज और स्वरूपान्तर की शक्ति (Ram Beej And The Power of Transformation) - Aniruddha Bapu Pitruvachanam 03 Mar 2016

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने ०३ मार्च २०१६ के पितृवचनम् में ‘रं बीज और स्वरूपान्तर की शक्ति’ के बारे में बताया। मैंने बार बार बताया कि राम यह पुरुषार्थ है और जानकी उस पुरुषार्थ का फ़ल है। राम क्या है, तो पुरुषार्थ स्वरूप है, ओज स्वरुप है और जानकी उस पुरुषार्थ का फल है। फल से आगे और बीज होते हैं यानी पुरुषार्थ की शक्ति ही है वो,