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प्रार्थना ही हमारे सामर्थ्य का स्रोत है (The Prayer is the source of our strength)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २७ मार्च २०१४ के प्रवचन में ‘प्रार्थना ही हमारे सामर्थ्य का स्त्रोत है’ इस बारे में बताया। हमारे लिये जो आवश्यक है जितनी प्रार्थना, उतनी प्रार्थना वो हमे जरूर देगा। दर-दर जाकर भीक माँगने की आवश्यकता नहीं है। मेरा बाप जो है उसने हमें जनम देते समय जो इस्टेट दी है हमें, उसपर पूरा जनम चल रहा है। right? दिन में कितनी बार हार्ट बीट्स

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 16 Mar 2017 about, Panchamukha-Hanumat-kavacham Explanation - 13 (Lord Hanumanji provides sufficient strength)

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १६ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में ‘पंचमुखहनुमत्कवचम् विवेचन’ में ‘हनुमानजी उचित सामर्थ्य देते हैं’ इस बारे में बताया। ये हनुमानजी जो हैं, ये जब हनुमान के रूप में प्रगट हुए, तब भी, हाल ही में हम लोगों ने अग्रलेखों में पढा, हनुमानजी तो त्रेतायुग में आए थे, लेकिन सत्ययुग में भी थे। किस नाम से थे? ब्रह्मपुच्छ और वृषाकपि। ब्रह्मपुच्छ वृषाकपि ये नाम होते

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने ५ फरवरी २००४ के हिंदी प्रवचन में ‘शुद्धता यह सामर्थ्य है’ इस बारे में बताया।

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने ५ फरवरी २००४ के हिंदी प्रवचन में ‘ शुद्धता यह सामर्थ्य है ’ इस बारे में बताया। कृष्ण भगवान और राधाजी का हमारे जिंदगी के साथ क्या रिश्ता है, यह बात समझाने के लिए अनिरुद्ध बापू ने पानी और साबुन का उदाहरण देकर समझाया। उन्होंने कहा- ‘हम देखते हैं कि जब हम स्नान करते हैं। जिस पानी से हम स्नान करते हैं वह पानी

Glaum

Sadguru Shree Aniruddha Bapu while talking about the name ‘Om Mantraya Namah’, explains about the Glaum (ग्लौ ໍ) beej in his Marathi discourse of 4th March 2010. He also explains with examples how the potency of Glaum (ग्लौ ໍ) beej works. ०४ मार्च २०१० च्या मराठी प्रवचन व्हिडिओमध्ये सद्गुरू श्री अनिरुद्ध ‘ॐ मंत्राय नमः’ ह्या नामाविषयी सांगताना, ग्लौ ໍ ह्या बीजाचा उल्लेख करतात. तसेच ग्लौ ໍ बीजाचे सामर्थ्य कसे कार्य

भारतीय अर्थव्यवस्था

एक दशक बाद भारतीय अर्थव्यवस्था दस ट्रिलियन डॉलर्स की होगी – प्रमुख आर्थिक सलाहकार का दावा नई दिल्ली – ‘फिलहाल ३.३ ट्रिलियन डॉलर्स की होनेवाली भारतीय अर्थव्यवस्था आर्थिक वर्ष २०२६-२७ में पांच ट्रिलियन डॉलर्स की हो जाएगीऔर आर्थिक वर्ष २०३३-३४ के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था छलांग लगाकर दस ट्रिलियन डॉलर्स की हो जाएगी’, ऐसा विश्‍वास प्रमुख आर्थिक सलाहकार अनंत नागेश्‍वर ने व्यक्त किया हैं। कोरोना की महामारी के कारण बनी स्थिति

अमरीका और चीन के बीच बढता तनाव

अमरीका-चीन के बीच जारी तनाव के कारण नया शीतयुद्ध शुरू होगा – अमरिकी कुटनीतिज्ञ हेन्री किसिंजर वॉशिंग्टन – अमरीका और चीन के बीच निर्माण हुआ तनाव विश्‍व की सबसे बड़ी समस्या साबित होती है। इस समस्या का हल निकालना संभव नहीं हुआ तो इससे पूरे विश्‍व के लिए खतरा निर्माण होगा। क्योंकि, यह तनाव कम करने में नाकामी हासिल हुई तो अमरीका और चीन के बीच अलग तरह का शीतयुद्ध

चरणसंवाहन - भाग २ (Serving the Lord’s feet - Part 2)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने १५ अप्रैल २०१० के पितृवचनम् में ‘चरणसंवाहन’ के बारे में बताया। अपनी दोनों हाथों से भगवान के, सद्‍गुरु की चरण संवाहना करो। हेमाडपंतजी हमें पूरे दिल से कह रहे हैं कि भाई, अभिवंदना करो और चरणसंवाहन कैसे करो? अभिसंवाहन करो। उसके पैर की जब हम सेवा करते हैं, चरणों की सेवा करते हैं, फोटों में, तसबीर में, मूर्ती में जो भी हैं तो वही है ये

चरणसंवाहन  (Serving the Lord’s feet)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने १५ अप्रैल २०१० के पितृवचनम् में ‘चरणसंवाहन’ के बारे में बताया। बस्‌, उसके चरणों में सर रखेंगे ही, उसके पैर दबायेंगे। जहाँ मिले चान्स तो, उसके चरणधूली में खुद को पूरा का पूरा स्नान करायेंगे ही। लेकिन उसकी आज्ञा का पालन करने की कोशिश, पूरी की पूरी कोशिश करते रहेंगे। ये हुई – ‘तैसेचि चरणसंवाहन।’ ‘तैसेचि हस्ते चरणसंवाहन। हस्तांही चरणसंवाहन।’  अब यहाँ कह रहे हैं कि

'अभिसंवाहन’, Thursday Pravachan

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने १५ अप्रैल २०१० के पितृवचनम् में ‘अभिसंवाहन’ शब्द का अर्थ’ इस बारे में बताया। अभी चरणसंवाहन करना है, अभी क्या कहते हैं, मस्तक, ‘करावे मस्तके अभिवंदन। तैसेचि हस्तांही चरणसंवाहन।’ ‘तैसेचि – तैसेचि’ यानी ‘वैसे ही’।, तैसेचि का मतलब है वैसे ही। यानी जैसे अभिवंदन किया, तो यहाँ संवाहन कैसा होना चाहिए? अभिसंवाहन होना चाहिए। चरणों का संवाहन तो मस्तक का, एक उपचार तो हम जान गए,

गुरुक्षेत्रम् मन्त्राचे श्रद्धावानाच्या जीवनातील महत्त्व - भाग ५

सद्गुरू श्री श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या ०८ एप्रिल २०१० च्या मराठी प्रवचनात ‘गुरुक्षेत्रम् मन्त्राचे श्रद्धावानाच्या जीवनातील महत्त्व’ याबाबत सांगितले.   ज्या भविष्याला सगळी जणं घाबरतात, कधी काय येऊन आदळेल आम्हाला माहित नसतं, त्या भविष्याच्या पुढे सुद्धा हातात टॉर्च, काठी आणि बंदूक, म्हणजे काय? सर्वबाधाप्रशमनं, सर्वपापप्रशमनं, सर्वकोपप्रशमनं म्हणजे तुमचे ज्या काही बाधा झालेल्या आहेत, की केलेल्या कृत्यामुळे घडलेल्या सजा असोत, त्या प्रारब्धाच्यामुळे येणारी, आदळणारी संकटे असोत, त्यांचं प्रशमन करण्याचं सामर्थ्य ह्या मंत्रामध्ये आहे,