Search results for “साईचरित्र”

श्रीशब्दध्यानयोग - ०१

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने १५ अक्टूबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘श्रीशब्दध्यानयोग- ०१’ इस बारे में बताया। तो हमारा मूल निवास कहाँ था, हम लोग नहीं जान सकते, ओ.के., ये एक बात है। दूसरी बात क्या होती है, बहुत बार हम लोगों का कुलदैवत कौनसा है, यह भी हमें मालूम नहीं होता। हमारा ग्रामदैवत कौन सा है, हमें मालूम नहीं रहता। ये वास्तुदेवता भी होती है डेफिनेटली। ये सब क्या है?

सच्चिदानन्द सद्गुरुतत्त्व - भाग ३

सद्‍गुरुश्री अनिरुद्धजी ने ०७ अक्टूबर २०१० के पितृवचनम् में ‘सच्चिदानन्द सद्‍गुरुतत्त्व(Satchidanand Sadgurutattva)’ इस बारे में बताया। तो ये सद्‍गुरुतत्त्व क्या है? सच्चिदानंद स्वरुप है। क्योंकि उसके पास कोई एक्सपेक्टेशन नहीं है, सिर्फ एक इच्छा रखता है, जो मेरा नाम ले, जो मुझसे प्रेम करे, जो मेरी आज्ञा का पालन करे, वो मेरे अपने हैं और उनकी जिंदगी में कैसे ज्यादा से ज्यादा आनंद से भरपूर कर दूँ। कुछ नहीं चाहता

साईनाथ अपने भक्त को अपने समीप खींच लेते हैं  (Sainath pulls His devotee closer to him)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २७ मार्च २०१४ के प्रवचन में ‘साईनाथ अपने भक्त को अपने समीप खींच लेते हैं’ इस बारे में बताया। हम मंदिर में जाते हैं, जरुर! ये इच्छा कैसे उत्पन्न हुई? बाबा की इच्छा ना हो, बाबा के मंदिर में या बाबा के पास, कभी नहीं जा सकते, ये पूरा भरोसा रखो। बाबा ने सौ बार बोला है साईचरित्र में कि मेरी इच्छा के बिना कोई

The Spiritual Transformation of the Mind through God's Stories

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धने २० फरवरी २०१४ के पितृवचनम् में ‘भगवान की कथाओं के द्वारा मन में आध्यात्मिक परिवर्तन’ इस बारे में बताया। तो वैसे ही जब भगवान की कथा पढते हैं, तब वही कथा अपनी जिंदगी में भी, उसका कनेक्शन अपने-आप जोडते रहते हैं। श्रीकृष्ण की कथा आती है, बाललीला की, हम लोग भी कितना मजा करते थे, हम अगर किशन जी के साथ उस समय होते तो कितना मजा

परमपूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ३ सितंबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘दिन में कम से कम चौबीस मिनट तो उपासना करनी ही चाहिए’ इस बारे में बताया। एक चीज बोलता हूँ कि बड़े प्यार के साथ। वेद हैं चार, अठारह पुराण हैं, तेईस उपपुराण हैं, एक सौ आठ उपनिषद हैं, गीता है, रामायण है, महाभारत है, अपने ही सारे ग्रंथ हैं और बहुत सारे ग्रंथ हैं। इस भारत में

"नित्य उपासना" और "हरिगुरु गुणसंकीर्तन" का अनन्यसाधारण महत्व - (The importance of "Daily Prayers" & "Hariguru Gunasankirtan") - Aniruddha Bapu Pitruvachanam 31st Dec 2015

नये साल का स्वागत करते समय, ३१ दिसंबर २०१५, गुरुवार के दिन सद्‌गुरु बापू ने अपने पितृवचन में, अगले साल याने २०१६ साल में “नित्य उपासना” (daily prayers) और “हरिगुरु गुणसंकीर्तन” के अनन्यसाधारण महत्व को विशद किया था। इस पितृवचन का महत्वपूर्ण भाग संक्षिप्त रूप में मेरे श्रद्धावान मित्रों के लिए इस पोस्ट के द्वारा मैं दे रहा हूँ। “अभी २०१६ साल चंद घण्टों में शुरु होनेवाला है । हर

हे जातवेदा, त्या अनपगामिनी लक्ष्मी मातेला आवाहन कर (Oh Jaataveda, Invoke that Anapagamini Lakshmi Mata) - Aniruddha Bapu Marathi‬ Discourse 04 June 2015

लक्ष्मी चंद्राप्रमाणे प्रकाश देणारी आहे (Lakshmi shines like the moon) – Aniruddha Bapu परमपूज्य सद्‍गुरू श्री अनिरुद्ध बापूंनी त्यांच्या ४ जून २०१५ च्या मराठी प्रवचनात ‘ लक्ष्मी चंद्राप्रमाणे प्रकाश देणारी आहे ’ याबाबत सांगितले. चंद्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो‍ म आवह। ह्या भारतीय संस्कृतीचा एक उत्कृष्ट गुणधर्म आहे की कोणतीही गोष्ट करायची ती रसिकतेने, सहजतेने, साधेपणाने, सुंदरतेने, मधुरतेने आणि तरीही दिखाऊ नाही, टाकाऊ नाही, नुसती सजवण्यासाठी नाही, तर अर्थगर्भ असणारी कार्यप्रवण

सद्‍गुरू जसे आहे तसेच जाणत असतो (Sadguru knows everything just the way it is) - Aniruddha Bapu‬

‘सद्‍गुरू (Sadguru) जसे आहे तसेच जाणत असतो’ याबाबत सद्‍गुरू परम पूज्य अनिरुद्ध बापूंनी त्यांच्या २५ जून २०१५ रोजीच्या प्रवचनात साईचरित्रातील दामुअण्णा कासारांचे उदाहरण घेऊन सांगितले की, शिष्याला पुढे काय होणार?, त्याच्या भाग्यात काय आहे?, त्याचा काय काय त्रास होऊ शकतो? हे कळू शकत नाही. परंतु ‘जे जसे आहे तसेच जाणत असतो’ हे सद्‍गुरुचे सर्वात मोठे सामर्थ्य आहे. ॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥ ॥ अंबज्ञ ॥

आद्यपिपांचे सद्‌गुरु साईनाथ ( Adyapipa's Sadguru Sainath )

बापू (अनिरुद्धसिंह), सूचितदादा व मी, काकांच्या समाधीस्थानमला नमस्कार करताना आज श्रीकृष्ण जयंती; श्रावणातील कालाष्टमी म्हणजेच गोकुळ अष्टमी. आज सर्व बापू (अनिरुद्धसिंह) कुटुंबीयांकरिता हा एक विशेष दिवस. आजच्याच दिवशी आद्यपिपांचे म्हणजे “काकांचे” निर्वाण झाले; मी, दादा त्यांना “काका” म्हणूनच हाक मारत असू.काकांची एक गोष्ट मी लहान असताना नेहमीच आश्चर्यकारक वाटायची. रोज झोपताना ते साईनाथांच्या फोटोकडे बघत झोपायचे आणि दिवा बंद करायला सांगायचे. हे दिवा बंद करायचं काम ब-याचदा माझ्याकडे असायचं. मी