Search results for “सर्वश्रेष्ठ”

Aniruddha Bapu, अनिरुद्ध बापू, Bapu, बापू, Anirudhasinh, अनिरुद्धसिंह, अनिरुद्ध जोशी, Aniruddha Joshi, Dr. aniruddha Joshi , डॉ. आनिरुद्ध जोशी, सद्‍गुरु अनिरुद्ध, सद्‍गुरु अनिरुद्ध बापू, Blood Donation camp, Blood Donation, रक्तदान शिबिर, रक्तदान,Pravachan,discourse, Bandra, Mumbai, Maharashtra, India, New English school, IES, Indian Education Society,रक्तदान

परवा म्हणजेच दिनांक ७ एप्रिल २०१५ला ‘रक्तदान शिबिर – २०१५’ (blood donation camp) बाबत पोस्ट येथे टाकली होती. तुम्ही ती पाहिली असेलच. हे रक्तदान आता एक दिवसावर म्हणजेच उद्यावर येऊन ठेपले आहे. ‘दिलासा मेडिकल ट्रस्ट अ‍ॅण्ड रिहॅबिलिटेशन सेंटर’, ‘अनिरुद्धाज्‌ अकॅडमी ऑफ डिजास्टर मॅनेजमेंट’ आणि ‘श्री अनिरुद्ध उपासना फाउंडेशन’ या संस्थांतर्फे श्रीहरिगुरूग्राम येथे रविवारी म्हणजेच दिनांक १२ एप्रिल २०१५ रोजी आयोजित केलेले हे भव्य रक्तदान शिबिर आपण सर्व श्रद्धावानांना उदंड अशा

qualitative change

In this clip from the Marathi discourse dated 27th March 2003, Sadguru Aniruddha (Bapu) says that the Parmatma (Almighty) is beyond “numbers (Sankhya) or quantity” and values “quality”. Bapu also lays down the concept of Bhakti & Seva in very simple terms and also states that Bhakti, Seva together bring about a qualitative change in an individual. Further, he also explains the significance of Dnyaan Marg, Karma Marg and Yog

समयोग

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने ३० जून २००५ के पितृवचनम् में ‘समयोग’ इस बारे में बताया। योग जो है, भगवान, उस भगवती शक्ति और भक्त तीनों का एक समवान हिस्से में आना, एक ही ट्रान्ससेक्शन में, एक ही समय, एक ही पल, तीनों आनंद जो होते हैं, उसे योग कहते हैं। भगवान तो हमेशा आनंदस्वरूप हैं। भगवती जो हैं, वो तो आल्हादिनी स्वरूप हैं, आनन्दप्रदायक, उत्पन्न करनेवाली हैं। खुद आनन्दस्वरूप भगवान,

चरणसंवाहन - भाग ४ (Serving the Lord’s feet - Part 4)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने १५ अप्रैल २०१० के पितृवचनम् में ‘चरणसंवाहन’ के बारे में बताया। तो, ‘करावे मस्तकी अभिवंदन। तैसेचि हस्तांही चरणसंवाहन।’ दोनों साथ करने का भी एक मतलब है कि, भाई बिल्वपत्र जिसे हम कहते हैं, बेल का पान। किसने देखा है? किसने नहीं देखा है? सभी ने देखा है, राईट। वहाँ क्या होता है? तीन पत्ते होते हैं ना! एक बीच में और दो बाजू में। ये क्या

श्रद्धावानों के लिये जीवन में सुंदरकांड का महत्व

हरि ॐ, आज दुनियाभर में जो परिस्थिति है, उस परिस्थिति में भी बापुजी के सभी श्रद्धावान मित्र उपासना के माध्यम से बापुजी के साथ दृढ़तापूर्वक जुड़ गये हैं और इस सांघिक उपासना के साथ ही, श्रद्धावान अपनीं व्यक्तिगत उपासनाएँ और खुद की प्रगति के लिए आवश्यक होनेवाले विभिन्न Online Courses इनके माध्यम से, बापुजी के बतायेनुसार समय का यथोचित इस्तेमाल करके इस संकट के दौर को अवसर में परिवर्तित कर

गुरुक्षेत्रम् मन्त्राचे श्रद्धावानाच्या जीवनातील महत्त्व - भाग ७

सद्गुरू श्री श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या ०८ एप्रिल २०१० च्या मराठी प्रवचनात ‘गुरुक्षेत्रम् मन्त्राचे श्रद्धावानाच्या जीवनातील महत्त्व’ याबाबत सांगितले.   त्याचप्रमाणे वर्तमानकाळात तर तो राहणारच आहे, ऑब्व्हियसली. प्रत्येक गोष्ट जी घडत असेल, ती घडवताना तुमची सर्व सेफ्टी बघण्याचं काम हा करणारच आहे, आपोआपच. तो चारी बाजूला असणार आहे वर्तमानकाळामध्ये. तर ह्या मंत्रामधली सगळ्यात सुंदर गोष्ट म्हणजे ‘विच्चे’. विच्चे, ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।’ ऐं, ह्रीं आणि क्लीं हे तीन ही बीजमंत्र

‘अल्फा टू ओमेगा’ न्युजलेटर - जनवरी २०२०

जनवरी २०२० संपादकीय हरि ॐ श्रद्धावान सिंह और वीरा, आपको और आपके परिजनों को नववर्ष की बहुत बहुत शुभकामनाएं देता हूँ। परमपूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्धजी की कृपा से हम सभी ने अनिरुद्ध भक्तिभाव चैतन्य मनाते हुए सन २०२० में कदम रखा है। मुझे यकीन है कि हम सभी अब भी ३१ दिसंबर २०१९ के उन सुंदर यादों में डूबे हुए हैं जो कि हमने सद्गुरू श्री अनिरुद्धजी पर रचे गए

गुरुक्षेत्रम् मन्त्राचे श्रद्धावानाच्या जीवनातील महत्त्व - भाग ४

सद्गुरू श्री श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या ०८ एप्रिल २०१० च्या मराठी प्रवचनात ‘गुरुक्षेत्रम् मन्त्राचे श्रद्धावानाच्या जीवनातील महत्त्व’ याबाबत सांगितले.   ह्या मंत्रामध्ये हा जो बीजमंत्र आहे, बीजमंत्रामध्ये जो ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे’ हा जो मंत्र आहे, हा संपूर्ण मंत्र ही ह्या मंत्राची ध्वजा आहे. ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे’ हा जो मंत्र आहे, हा मंत्रच मुळी ह्या गुरुमंत्राची ध्वजा आहे, पताका आहे. ध्वज लावला जातो, तर ध्वजा म्हणजे काय?

मणिपुर चक्र और प्राणाग्नि - भाग ३

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २० अप्रैल २०१७ के प्रवचन में ‘मणिपुर चक्र और प्राणाग्नि (Manipur Chakra And Pranagni) ’ इस बारे में बताया।   मणिपूर चक्र का इतना इमंपॉरटन्स हमारे लाईफ में है, इसीलिये रामनाम ये हमेशा क्या बताया गया है भारत में, ये सर्वश्रेष्ठ नाम है। इसके लिये कुछ शक्ति की आवश्यकता नहीं, किसी शुद्धी की नहीं। ज्ञानेश्वर महाराज ने क्या बताया हैं? मैं बार-बार बताता हूँ वो

रामनाम भय की नामोनिशानी मिटा देता है

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ४ फरवरी २०१६ के प्रवचन में ‘रामनाम भय की नामोनिशानी मिटा देता है (The Rama Naam erases the fear) ’ इस बारे में बताया। ये जो हनुमानजी हैं, हम लोग जानते है कि महाप्राण हैं। सो, मूलाधार चक्र से लेकर हमारे सहस्रार चक्र तक सभी चक्रों में इनका ही प्रवाह चलता हैं, यह तो हम लोगों ने श्रीश्वासम्‌ की पुस्तिका में लिखा हुआ है। राईट, पढ़ा हुआ