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सच्चिदानन्द सद्गुरुतत्त्व - भाग ३

सद्‍गुरुश्री अनिरुद्धजी ने ०७ अक्टूबर २०१० के पितृवचनम् में ‘सच्चिदानन्द सद्‍गुरुतत्त्व(Satchidanand Sadgurutattva)’ इस बारे में बताया। तो ये सद्‍गुरुतत्त्व क्या है? सच्चिदानंद स्वरुप है। क्योंकि उसके पास कोई एक्सपेक्टेशन नहीं है, सिर्फ एक इच्छा रखता है, जो मेरा नाम ले, जो मुझसे प्रेम करे, जो मेरी आज्ञा का पालन करे, वो मेरे अपने हैं और उनकी जिंदगी में कैसे ज्यादा से ज्यादा आनंद से भरपूर कर दूँ। कुछ नहीं चाहता

सच्चिदानन्द सद्‍गुरुतत्त्व - भाग २

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने ०७ अक्टूबर २०१० के पितृवचनम् में ‘सच्चिदानन्द सद्‍गुरुतत्त्व(Satchidanand Sadgurutattva)’ इस बारे में बताया। जो-जो अस्तित्व है जिंदगी में, उससे सिर्फ हमें आनंद ही मिले, ये किसके हाथ में हो सकता है? किसकी ताक़त हो सकती है? ‘सच्चिदानंद’ की ही यानी सद्‌गुरु की ही और ये आनंद तभी उत्पन्न हो सकता है, जब संयम है, राईट। एकार्थी – extremes बन जाओ तो आनंद कभी नहीं मिलेगा। संयम

सच्चिदानन्द सद्‍गुरुतत्त्व - भाग १

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने ०७ अक्टूबर २०१० के पितृवचनम् में ‘सच्चिदानन्द सद्‍गुरुतत्त्व(Satchidanand Sadgurutattva)’ इस बारे में बताया। तो ये बात ऐसी है कि ये जो गुरुतत्त्व होता है, सद्‍गुरु जो होता है, उसके चरण ये क्या चीज़ है, ये पहले जानना चाहिये हमें। गुरु के चरण यानी क्या? गुरु के चरण, दो चरण जो होते हैं। एक कदम से वो शुभंकर कार्य करते हैं, दूसरे कदम से अशुभनाशन का कार्य

‘अनिरुद्ध भक्तिभाव चैतन्य’ महासत्संग समारोह - पहले सत्र (सेशन) के व्हिडियोज्

३१ दिसम्बर २०१९ के ‘अनिरुद्ध भक्तिभाव चैतन्य’ इस महासत्संग समारोह को संपन्न हुए १ महीने से भी अधिक समय बीत चुका है; मग़र फिर भी इस अनिरुद्ध भक्तिसमारोह में सम्मिलित हुआ हर एक श्रद्धावान भक्त, मन से अभी भी उस सु-दर्शनी समारोह में ही है। इस महासत्संग में अनिरुद्ध भक्तिभाव चैतन्य में नहाये हुए श्रद्धावान भक्तों के मन में जिस तरह इस समारोह के अनिरुद्ध आनन्द में पुन: पुन: डूब

‘अल्फा टू ओमेगा’ न्युजलेटर - जनवरी २०२०

जनवरी २०२० संपादकीय हरि ॐ श्रद्धावान सिंह और वीरा, आपको और आपके परिजनों को नववर्ष की बहुत बहुत शुभकामनाएं देता हूँ। परमपूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्धजी की कृपा से हम सभी ने अनिरुद्ध भक्तिभाव चैतन्य मनाते हुए सन २०२० में कदम रखा है। मुझे यकीन है कि हम सभी अब भी ३१ दिसंबर २०१९ के उन सुंदर यादों में डूबे हुए हैं जो कि हमने सद्गुरू श्री अनिरुद्धजी पर रचे गए

भक्तिभाव चैतन्यापर आधारित नये वेबसाईट का प्रकाशन

अनिरुद्ध भक्तिभाव चैतन्य वेबसाईट तथा अनिरुद्ध प्रेमसागरा – श्रद्धावान नेटवर्क हरि ॐ, सद्‌गुरु श्रीअनिरुद्ध ने भक्तिभाव चैतन्य से श्रद्धावानों को दैनिक प्रत्यक्ष के अग्रलेखों द्वारा तथा अपने पितृवचनों द्वारा परिचित कराया ही है। श्रद्धावान भी स्वयंभगवान श्रीत्रिविक्रम के सार्वभौम मंत्रगजर के साथ ही इस भक्तिभाव चैतन्य का आनंद ले रहे हैं। सद्गुरु श्रीअनिरुद्ध से प्रेम से निरंतर जुडे (Connected) रहने की और उनके निरंतर संपर्क में (Communication) रहने की इच्छा

भक्तिभाव चैतन्यावर आधारित नवीन वेबसाईटचे प्रकाशन

अनिरुद्ध भक्तिभाव चैतन्य वेबसाईट व अनिरुद्ध प्रेमसागरा – श्रद्धावान नेटवर्क हरि ॐ, सद्‌गुरु श्रीअनिरुद्धांनी भक्तिभाव चैतन्याची ओळख श्रद्धावानांना दैनिक प्रत्यक्षमधील अग्रलेखांमधून व पितृवचनांमधून करून दिलीच आहे. श्रद्धावानही स्वयंभगवान श्रीत्रिविक्रमाचा सार्वभौम मंत्रगजराबरोबरच भक्तिभाव चैतन्याचा आनंद घेत आहेत. सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांशी प्रेमाने सतत जोडलेले (Connected) रहावे आणि त्यांच्या सतत संपर्कात (Communication) रहावे ही प्रत्येक श्रद्धावानाची इच्छा असते. त्याचबरोबर सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांवर प्रेम करणार्‍या आपल्या श्रद्धावान मित्रांशीसुद्धा जुळलेले राहून भक्तिभाव चैतन्यातील परस्परांचे अनुभव जाणून घेण्याची

‘अल्फा टू ओमेगा’ न्युजलेटर – फरवरी २०१९

‘अल्फा टू ओमेगा’ न्युजलेटर – हिन्दी संस्करण   फरवरी २०१९ संपादक की कलम से हरि ॐ श्रद्धावान सिंह / वीरा, सद्गुरु श्री अनिरुद्ध की कृपा से, हमारा यह वर्ष भक्तिभावच्चैतन्य और वर्धमान व्रतधीराज के आनंदमय वातावरण में आरम्भ हुआ। यह व्रत, सदगुरु के मार्गदर्शन के अनुसार मार्गशीर्ष में किया जाता है। श्रद्धावान बड़े ही प्रेम से इस व्रत का पालन करते हैं, जिससे हमारे जीवन में सकारात्मकता के साथ साथ

सर्वदेवनमस्कार: केशवं प्रति गच्छति (The worship offered to any deity ultimately reaches to the Supreme Being Keshava) - Aniruddha Bapu Pitruvachanam 10 Mar 2016

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने १० मार्च २०१६ के पितृवचनम् में ‘सर्वदेवनमस्कार: केशवं प्रति गच्छति’ इस बारे में बताया।  अनिरुद्ध बापू ने पितृवचन के दौरान यह बताया की, हर किसी के दिमाग में एक सवाल उठता है । कि हम लोग कौनसी प्रार्थना करे, कौनसा जप करे गुरुक्षेत्रम का मंत्र दररोज करना बहुत अच्छी बात है, सुंदर बात है, compulsory नहीं है। वैदिक धर्म की महत्ता है भारतीय