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संस्कृती मूल्यांवर अवलंबून असते ( The Culture Depends On Values ) परदेशात गेलेल्या व्यक्तींनी आपल्या मातृभूमीशी म्हणजेच भारताशी जुळलेली आपली नाळ तुटू देता कामा नये. कुठेही राहिलो तरी आपली भारतीय संस्कृती (Culture) अवश्य जपा. संस्कृती (Culture) ही बाह्य वेश, खाद्यपदार्थ वगैरे गोष्टींवर अवलंबून नसून संस्कारांवर अवलंबून असते. संस्कृती म्हणजे मूल्यांचे पालन करणे आहे, याबद्दल सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या १९ फेब्रुवारी २०१५ रोजीच्या प्रवचनात सांगितले, जे आपण या व्हिडियोत पाहू शकता. ॥

'श्रीपंचमुखहनुमत्कवच’ पठन के संदर्भ में महत्वपूर्ण सूचना

श्रीपंचमुखहनुमत्कवच (संस्कृत) – https://www.aniruddhafriend-samirsinh.com/shree-panchamukh-hanuman-kavach-sanskrit/ श्रीपंचमुखहनुमत्कवच हिंदी अर्थ – https://www.aniruddhafriend-samirsinh.com/shree-panchamukh-hanumat-kavach-hindi/ श्रीपंचमुखहनुमत्कवच ऑडिओ –   श्रीपंचमुखहनुमत्कवच व्हिडिओ – https://youtu.be/5UyZVH9peoc   श्रीपंचमुखहनुमत्कवच (संस्कृत) – https://www.aniruddhafriend-samirsinh.com/shree-panchamukh-hanuman-kavach-sanskrit/ श्रीपंचमुखहनुमत्कवच मराठी अर्थ – https://www.aniruddhafriend-samirsinh.com/shree-panchamukh-hanumat-kavach-marathi/ श्रीपंचमुखहनुमत्कवच हिंदी अर्थ – https://www.aniruddhafriend-samirsinh.com/shree-panchamukh-hanumat-kavach-hindi/ श्रीपंचमुखहनुमत्कवच ऑडिओ   श्रीपंचमुखहनुमत्कवच व्हिडिओ – https://youtu.be/5UyZVH9peoc   श्रीपंचमुखहनुमत्कवच (संस्कृत) – https://www.aniruddhafriend-samirsinh.com/shree-panchamukh-hanuman-kavach-sanskrit/ श्रीपंचमुखहनुमत्कवच हिंदी अर्थ – https://www.aniruddhafriend-samirsinh.com/shree-panchamukh-hanumat-kavach-hindi/ श्रीपंचमुखहनुमत्कवच ऑडिओ –   श्रीपंचमुखहनुमत्कवच व्हिडिओ – https://youtu.be/5UyZVH9peoc

ॐ कृष्णायै नम:

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने ०३ मार्च २००५ के पितृवचनम् में ‘ॐ कृष्णायै नम: – १ ’ इस बारे में बताया। हरि: ॐ, ॐ कृष्णायै नम:। भगवान श्रीकृष्ण को अगर कह दें हम ॐ श्रीकृष्णाय नम:, ये कृष्णायै नम:। यानी भगवती राधा का नाम यहाँ कृष्णा है, कृष्ण नहीं कृष्णा। अब ‘कृष्ण’ नाम के कितने अर्थ होते हैं, हम जानते हैं, बहुत अर्थ होते हैं। एक अर्थ सीधा-सादा है, कृष्ण यानी

अहंकार हमारा सबसे बड़ा शत्रु है

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने ०५ मई २००५ के पितृवचनम् में ‘अहंकार हमारा सबसे बड़ा शत्रु है’ इस बारे में बताया।   ये महाप्रज्ञा है और दूसरा है महाप्राण, जो उनका पुत्र है, हनुमानजी, वो भी सर्वमंगल है, क्योंकि उनका नाम ही हनुमंत है यानी ‘हं’कार है। ‘अहं’ में जो ‘अ’ है उसे निकाल दो तो हंकार हो गया। मैं बार-बार कहता हूँ अहंकार है यानी हनुमानजी नहीं हैं, हंकार नहीं

France-Britain-Leftist

कट्टरपंथी और वामपंथी विचारधारा फ्रेंच समाज को निगल रही है – फ्रान्स की उच्च शिक्षामंत्री की चेतावनी पॅरिस – ‘कट्टरवाद तथा चरमसीमा की वामपंथी विचारधारा फ्रेंच समाज को पूरी तरह निगलती चली जा रही है। इससे विश्वविद्यालय भी सुरक्षित नहीं रहे हैं’, ऐसी चेतावनी फ्रान्स की उच्च शिक्षामंत्री फ्रेडरिक विदाल ने दी। इस कारण फ्रेंच विश्वविद्यालयों में संशोधक, समाज का विभाजन करने की दृष्टि से ही हर एक बात की

सच्चिदानन्द सद्‍गुरुतत्त्व - भाग २

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने ०७ अक्टूबर २०१० के पितृवचनम् में ‘सच्चिदानन्द सद्‍गुरुतत्त्व(Satchidanand Sadgurutattva)’ इस बारे में बताया। जो-जो अस्तित्व है जिंदगी में, उससे सिर्फ हमें आनंद ही मिले, ये किसके हाथ में हो सकता है? किसकी ताक़त हो सकती है? ‘सच्चिदानंद’ की ही यानी सद्‌गुरु की ही और ये आनंद तभी उत्पन्न हो सकता है, जब संयम है, राईट। एकार्थी – extremes बन जाओ तो आनंद कभी नहीं मिलेगा। संयम

Iran

ट्रम्प ७० दिनों के मेहमान, लेकिन ईरान की हुकूमत कायम रहेगी – खाड़ी देशों को ईरान ने धमकाया तेहरान – अमरीका के चुनाव में राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प की हार होने की खबरें माध्यमों में जारी होने से खुश हुए ईरान ने अरब देशों को धमकाना शुरू किया है। ‘७० दिनों बाद ट्रम्प अमरीका के राष्ट्राध्यक्ष नहीं रहेंगे। लेकिन, ईरान की हुकूमत कायम रहेगी। सुरक्षा के लिए दूसरे देशों पर निर्भर

discipline in life

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने ०७ अक्टूबर २०१० के पितृवचनम् में ‘जीवन में अनुशासन (discipline in life) का महत्त्व’ इस बारे में बताया। ये संयम जो है, बहुत आवश्यक होता है। जहाँ जितना बोलना चाहिए, उतना ही बोलना चाहिए। जहाँ जो करना चाहिए, उतना ही करना चाहिए। जहाँ शौर्य चाहिए, वहाँ शौर्य चाहिए। जहाँ शान्ति चाहिए, वहाँ शान्ति ही चाहिए। हर चीज़ की आवश्यकता होती है। लेकिन हम अपने मन पर

गुरु-आज्ञा

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने ०७ अक्टूबर २०१० के पितृवचनम् में ‘जीवन में अनुशासन का महत्त्व’ इस बारे में बताया। गुरु-आज्ञा-परिपालनं, सर्वश्रेयस्करं। गुरु-आज्ञा का पालन करना ही सबसे श्रेय, श्रेयस्कर चीज़ है। सर्वश्रेय यानी सर्व बेस्ट जो है, वो हमें किससे प्राप्त होता है? गुरु-आज्ञा से प्राप्त होता है, राईट। इसी लिए ‘गुरुचरण पायस’ कहा गया है। ‘The Discipline’ बाकी की only they are a Dicipline. ये बाकी के डिसील्पीन्स से

मनुष्य का मन अन्न के तरल भाग से बनता है

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने ०७ अक्टूबर २०१० के पितृवचनम् में ‘मनुष्य का मन अन्न के तरल भाग से बनता है’ इस बारे में बताया। जिन लोगों ने श्रीमद्‍पुरुषार्थ ग्रंथराज पढ़ा हुआ है, वो लोग जानते हैं कि ये जो भावशारिरीक जो गुण होते हैं कि जिनके आधार से हमारे शरीर का, मन का और प्राणों का कार्य चलता रहता है। छांदोग्य उपनिषद्‍ का नाम तो आप लोगों ने सुना होगा।