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श्रीशब्दध्यानयोग-०२

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने १५ अक्टूबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘श्रीशब्दध्यानयोग- ०२’ इस बारे में बताया। सो, बड़े प्यार से हमें, गुरुवार से पहला demonstration होगा, हम सीख जाएँगे, demonstration होगा यानी क्या, हमें सीखने के लिए होगा, राईट, हम सीखेंगे। Most probably हम लोगों को पुस्तिका भी मिल जाएगी। तो चक्र यहाँ होगा, उसकी प्रतिमा होगी, वो प्रतिमा हम लोग स्क्रिन पर भी display कर सकते हैं, राईट, ओ.के.।

श्रीशब्दध्यानयोग - ०१

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने १५ अक्टूबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘श्रीशब्दध्यानयोग- ०१’ इस बारे में बताया। तो हमारा मूल निवास कहाँ था, हम लोग नहीं जान सकते, ओ.के., ये एक बात है। दूसरी बात क्या होती है, बहुत बार हम लोगों का कुलदैवत कौनसा है, यह भी हमें मालूम नहीं होता। हमारा ग्रामदैवत कौन सा है, हमें मालूम नहीं रहता। ये वास्तुदेवता भी होती है डेफिनेटली। ये सब क्या है?

दुर्गा इस शब्द का अर्थ

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने २० अक्तूबर २००५ के पितृवचनम् में ‘दुर्गा इस शब्द के अर्थ’ इस बारे में बताया। मैं आस्तिक हूँ और मैं आस्तिक रहूँगा। मेरी श्रद्धा है की ये माँ दुर्गा सब कुछ करती हैं, सब कुछ चलाती हैं और उसका पुत्र त्रिविक्रम जो है, वह सबका केअर टेकर है। ये मेरी अपनी श्रद्धा है, कोई माने या ना माने मुझे क्या फरक पड़ता है? are you getting,

'अभिसंवाहन’, Thursday Pravachan

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने १५ अप्रैल २०१० के पितृवचनम् में ‘अभिसंवाहन’ शब्द का अर्थ’ इस बारे में बताया। अभी चरणसंवाहन करना है, अभी क्या कहते हैं, मस्तक, ‘करावे मस्तके अभिवंदन। तैसेचि हस्तांही चरणसंवाहन।’ ‘तैसेचि – तैसेचि’ यानी ‘वैसे ही’।, तैसेचि का मतलब है वैसे ही। यानी जैसे अभिवंदन किया, तो यहाँ संवाहन कैसा होना चाहिए? अभिसंवाहन होना चाहिए। चरणों का संवाहन तो मस्तक का, एक उपचार तो हम जान गए,

अभिवंदन शब्द का अर्थ

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने १५ अप्रैल २०१० के पितृवचनम् में ‘अभिवंदन शब्द का अर्थ’ इस बारे में बताया। तो अभिवंदन करते समय क्या होता है, जो कर्दम ऋषि ने किया वो पूर्ण रूप से अभिवंदन है कि ‘इसके चरणों से अधिक श्रेष्ठ कुछ भी नहीं, कुछ भी नहीं’ ये अभिवंदना है बस्‌! ‘The Best, The Best I got The Best’ right, इस भाव से अपना मस्तक उनके चरणों में रखोगे

रामभरोसे इस शब्द का अर्थ (The Meaning of the word Ramabharose)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ४ फरवरी २०१६ के प्रवचन में ‘रामभरोसे इस शब्द के अर्थ’ के बारे में बताया। अभी आप बहोत सारे बच्चे एक्झाम में जाने वाले हैं, अरे बापरे! कौनसा क्वेश्चन (Question) आयेगा मालूम नहीं, क्या होगा मालूम नहीं? डरने की ज़रूरत नहीं। राम का नाम लीजिये, नहीं तो आपका अगर गुरु साईनाथ है, आप साईनाथ को मानते हैं, स्वामीसमर्थ को मानते हैं, उनका नाम लीजिये और बिनधास्त

सद्गुरु गायत्री मन्त्र के एक शब्द में किया गया बदलाव

श्रद्धावानों की सुविधा के लिए, साथ की ऊपरोक्त सूचना में उल्लेखित बदलाव किये गये सद्गुरु गायत्री मन्त्र का ५ बार पाठ की गयी ऑडिओ फाइल यहॉ पर दे रहा हूँ। – समीरसिंह दत्तोपाध्ये १५ जून २०१८

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ३ मार्च २०१६ के पितृवचनम् में’ ‘श्रीशब्दध्यानयोग-प्रदक्षिणा’ के बारे में जानकारी दी। दूषित वातावरण का इन्फेक्शन होने से बचने के लिये, ये बुरी प्रवृत्तियां हमारे बच्चों में ना आये और आयी हुई हों तो निकल जायें इसके लिये और मैं कुछ करने जाऊं, टाईम टाईम पर मुझे बताना पडेगा, क्योंकि मैने always बताया है आपको कि मेरा प्लॅन क्या है? कुछ भी नहीं। So,

Aniruddha Bapu told Shuddha swadharm pillars - Shreeshabdadhyaanyog, Shreeshwasam, Swastikshem Sawadam, Shree Gurukshetram Mantra in Pitruvachanam 22 Oct 2015

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २२ अक्तूबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘शुद्ध स्वधर्म स्तंभ’ – ‘श्रीशब्दध्यानयोग, श्रीश्वासम्‌, श्रीस्वस्तिक्षेम संवादम्‌, श्रीगुरुक्षेत्रम्‌ मंत्र’ के बारे में बताया। ‘श्रीशब्दध्यानयोग इस स्तंभ के बारे में बताने के बाद अन्य स्तंभों की जानकारी देत् हुए बापू ने कहा- श्रीश्वासम्‌! हम लोग श्रीश्वासम्‌ सुनते हैं, वहॉ जो अपने आप जो ब्रीदींग होता है, जब तब सुन रहे होते हैं, उस ब्रीदिंग से हम लोग जो

Aniruddha Bapu pitruvacahanam

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १५ अक्तूबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘ श्रीशब्दध्यानयोग यह अद्भुत है’ इस बारे में बताया।    श्रीशब्दध्यानयोग में उपस्थित रहना है सिर्फ हमको। ना कोई एन्ट्री फीज्‌ है, ना कोई दक्षिणा मूल्य है, या और कुछ भी नहीं है। हमें उपस्थित रहना है, जितना हो सके। अगर एक गुरुवार आ सके, बात ठीक है, अगर महिने में एक ही बार आ सकते हैं तो भी