Search results for “रामायण”

श्रद्धावानों के लिये जीवन में सुंदरकांड का महत्व

हरि ॐ, आज दुनियाभर में जो परिस्थिति है, उस परिस्थिति में भी बापुजी के सभी श्रद्धावान मित्र उपासना के माध्यम से बापुजी के साथ दृढ़तापूर्वक जुड़ गये हैं और इस सांघिक उपासना के साथ ही, श्रद्धावान अपनीं व्यक्तिगत उपासनाएँ और खुद की प्रगति के लिए आवश्यक होनेवाले विभिन्न Online Courses इनके माध्यम से, बापुजी के बतायेनुसार समय का यथोचित इस्तेमाल करके इस संकट के दौर को अवसर में परिवर्तित कर

अग्नि का महत्त्व (The Importance of Agni)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २० अप्रैल २०१७ के प्रवचन में ‘अग्नि के महत्त्व(The Importance of Agni)’ के बारे में बताया।   हम लोगों ने, जिन लोगों ने ग्रंथ पढ़े हुए हैं, जानते हैं कि तीन प्रकार के अग्नि हमारे शरीर में, देह में होते हैं। कौन से, कौन से? जाठराग्नि, प्राणाग्नि और ज्ञानाग्नि। जाठराग्नि यानी सिर्फ जठर में यानी पेट में रहनेवाला अग्नि नहीं, जिसे हमें भूख लगती हैं।

मूलाधार चक्र का लम् बीज और भक्तमाता जानकी - भाग १

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ४ फरवरी २०१६ के प्रवचन में ‘मूलाधार चक्र का ‘लम्’ बीज और भक्तमाता जानकी (Lam beej of the Mooladhara Chakra and Bhakta-Mata Janaki – Part 1) ’ इस बारे में बताया। ये मूलाधार चक्र की बात हम लोग कर रहे हैं। मूलाधार चक्र में बीज है – ‘ॐ लं’ – ‘लं’ ‘लं’ ये बीज है। ‘लं’ ये पृथ्वीबीज है, ‘लं’ ये इंद्रबीज है ये हम लोगों

परमपूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ३ सितंबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘दिन में कम से कम चौबीस मिनट तो उपासना करनी ही चाहिए’ इस बारे में बताया। एक चीज बोलता हूँ कि बड़े प्यार के साथ। वेद हैं चार, अठारह पुराण हैं, तेईस उपपुराण हैं, एक सौ आठ उपनिषद हैं, गीता है, रामायण है, महाभारत है, अपने ही सारे ग्रंथ हैं और बहुत सारे ग्रंथ हैं। इस भारत में

सुंदरकांड पठन उत्सव - पहला दिन

सभी श्रद्धावान जिसकी अत्यधिक प्रतीक्षा कर रहे थे, उस ‘ सुंदरकांड पठन उत्सव ’ की, मंगलवार १७ मई २०१६ से शुरुआत हुई। हनुमानजी तो पहले से ही सभी श्रद्धावानों के लाड़ले देवता हैं; ऊपर से ‘सुंदरकांड’ जैसे, ‘तुलसीरामायण’ के बहुत ही मधुर भाग का पठन, इस तरह यह मानो ‘सोने पे सुहागा’ ही रहनेवाला कार्यक्रम होने के कारण, सुबह से ही श्रद्धावान बड़ी संख्या में पठन में सम्मिलित होने के

सुन्दरकाण्ड पाठ, पूजन एवं अभिषेक (Sunderkand Paath) - Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने ०३ मार्च २०१६ के पितृवचनम् में श्रीहरिगुरुग्राम में १७ मई २०१६ से २१ मई २०१६ तक होनेवाले सुन्दरकाण्ड पाठ के बारे में जानकारी दी। १७ मई २०१६ से २१ मई २०१६ तक ५ दिन यहां श्री हरिगुरुग्राम में सुबह ९ बजे से शाम को ७ बजे तक पूरे के पूरे वैदिक पध्दति से उपाध्याय गणों के द्वारा यहां सुन्दरकाण्ड का पठण, पूजन और

सुंदरकांड पठण उत्सव - १७ मई से २१ मई २०१६

संतश्रेष्ठ श्री तुलसीदास जी विरचित ‘श्रीरामचरितमानस’ यह ग्रंथ भारत भर के श्रद्धावान-जगत् में बड़ी श्रद्धा के साथ पढ़ा जाता है। इस ग्रन्थ के ‘सुंदरकांड’ का श्रद्धावानों के जीवन में बहुत ही महत्त्वपूर्ण स्थान है। सद्गुरु श्री अनिरुद्ध जी को भी ‘सुंदरकांड’ अत्यधिक प्रिय है।  सीतामैया की खोज करने हनुमान जी के साथ निकला वानरसमूह सागरतट तक पहुँच जाता है, यहाँ से सुन्दरकांड का प्रारंभ होता है। उसके बाद हनुमान जी

सुंदरकांड पठण उत्सव - १७ मे ते २१ मे २०१६

संतश्रेष्ठ श्रीतुलसीदासजी विरचित ‘श्रीरामचरितमानस’ हा ग्रंथ सर्व भारतभर श्रद्धावानजगतात अत्यंत जिव्हाळ्याचा आहे आणि त्यातील ‘सुंदरकांड’ ह्या भागाला श्रद्धावानांच्या जीवनात आगळंवेगळं स्थान आहे. सद्गुरु बापूंसाठीही ‘सुंदरकांड’ ही अतिशय प्रिय गोष्ट आहे. सीतामाईच्या शोधाकरिता हनुमंताबरोबर निघालेल्या वानरांचा समूह समुद्रकाठी पोहोचतो इथपासून सुंदरकांडाची सुरुवात होते. त्यानंतर हनुमंत समुद्रावरून उड्डाण करून लंकेत प्रवेश करून सीतेचा शोध घेतो?व लंका जाळून पुन्हा श्रीरामांच्या चरणांशी येऊन त्यांना वृत्तांत निवेदन करतो. मग बिभीषणही श्रीरामांकडे येतो व श्रीराम वानरसैनिकांसह

श्रीसूक्ताच्या पहिल्या ऋचेचा अर्थ - भाग १३ (The Meaning Of The First Rucha Of Shree Suktam - Part 13) - Aniruddha Bapu‬ ‪Marathi‬ Discourse 16 April 2015

श्रीसूक्ताच्या पहिल्या ऋचेचा अर्थ – भाग १३ (The Meaning Of The First Rucha Of Shree Suktam-Part 13) भारतवासीयांच्या जीवनात सुवर्ण (gold) आणि रौप्य (silver) यांचे स्थान प्राचीन काळापासून अबाधित आहे आणि ऋषिसंस्थेने भारतीय समाजजीवन सुन्दर रित्या घडवले आहे. (Ramayan) रामायणकाळातील ऋषि हे राजसत्तेसमोर लाचार झालेले नाहीत, हे आम्ही पाहतो. या ऋषिसंस्थेने भारतीय समाजास प्रपंच-परमार्थ दोन्ही सुन्दर रित्या करण्यासंबंधी मार्गदर्शन केले. जातवेद हा मूळ ऋषि आहे आणि पुरोहितही. श्रीसूक्ताच्या पहिल्या ऋचेत

सुन्दरकाण्ड महिमा - भाग २ (Glory of Sunderkand Part - 2) - Aniruddha Bapu Marathi Discourse 28 Oct 2004

सुन्दरकाण्डातील ‘दीनदयाल बिरिदु सँभारी । हरहुँ नाथ मम संकट भारी ।।’ ही या जगातील श्रेष्ठ प्रार्थना आहे. साक्षात भक्तमाता सीतेने स्वत:च्या पतिला म्हणजेच रामाला तिचा देव म्हणून केलेली ही प्रार्थना सर्वोत्तम प्रार्थना आहे. या प्रार्थनारूपी चौपाईचा पल्लव लावून रामायणाचा पाठ करण्याची पद्धत पूर्वापार चालत आली आहे. रामदूत सीताशोकविनाशन हनुमन्त हा जगात सर्वांत सुन्दर आहे आणि म्हणूनच या काण्डाला सुन्दरकाण्ड म्हटले आहे. सुन्दरकाण्डाची महती सांगताना परम पूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या गुरूवार