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मूलाधार चक्र का लम् बीज और भक्तमाता जानकी - भाग ३

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ४ फरवरी २०१६ के प्रवचनमें ‘मूलाधार चक्र का ‘लम्’ बीज और भक्तमाता जानकी – भाग ३(Lam beej of the Mooladhara Chakra and Bhakta-Mata Janaki – Part 3)’ इस बारे में बताया।   सो, ये ‘लं’ बीज हमें बताता है कि भाई, इस पृथ्वी पर हो, पृथ्वी से जुड़े हुए हो, राईट! तो पृथ्वी का बीज जो ‘लं’ बीज जो है, वो जानकीजी का है, श्रीरामजी

​भूमाता को प्रणाम करते समय की प्रार्थना

हरि ॐ दिनांक २७ जून २०१९ के गुरुवार के पितृवचन में सद्‌गुरु श्रीअनिरुद्ध बापु ने, भूमाता को प्रणाम करने का महत्त्व हम सबको बताया। ”यह भूमाता विष्णुजी की शक्ति है ऐसी हमारी धारणा है, यह हमारी संस्कृति है। सुबह जाग जाने पर ज़मीन पर कदम रखने से पहले भूमाता को प्रणाम करने से, दिन की शुरुआत मंगलमयी तथा पवित्रता से, अंबज्ञता से भरी होती है।” ऐसा बापु ने कहा। भूमाता

मूलाधार चक्र का लम् बीज और भक्तमाता जानकी - भाग २

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ४ फरवरी २०१६ के प्रवचन में ‘मूलाधार चक्र का ‘लम्’ बीज और भक्तमाता जानकी’ इस बारे में बताया।   जानकी जो है, सीतामैया जो है, ये directly ‘लं’ बीज का आविष्कार है। ये वसुंधरा की कन्या होने के कारण, ये ‘लं’ बीज का मूर्तिमंत आविष्कार क्या है? तो ये ‘जानकी’ है। और उसकी शादी किसके साथ हो रही है? ‘राम’ के साथ – ‘श्रीराम’ के

मूलाधार चक्र का लम् बीज और भक्तमाता जानकी - भाग १

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ४ फरवरी २०१६ के प्रवचन में ‘मूलाधार चक्र का ‘लम्’ बीज और भक्तमाता जानकी (Lam beej of the Mooladhara Chakra and Bhakta-Mata Janaki – Part 1) ’ इस बारे में बताया। ये मूलाधार चक्र की बात हम लोग कर रहे हैं। मूलाधार चक्र में बीज है – ‘ॐ लं’ – ‘लं’ ‘लं’ ये बीज है। ‘लं’ ये पृथ्वीबीज है, ‘लं’ ये इंद्रबीज है ये हम लोगों

नवरात्रि-पूजन - आदिमाता दुर्गा एवं भक्तमाता पार्वती का एकत्रित पूजन

फिलहाल मनाये जा रहे आश्विन नवरात्रि-उत्सव से, नवरात्रिपूजन की शुद्ध, सात्त्विक, आसान, मग़र फिर भी श्रेष्ठतम पवित्र पद्धति श्रद्धावानों के लिए उपलब्ध कराके परमपूज्य सद्‍गुरु ने सभी श्रद्धावानों को अत्यधिक कृतार्थ कर दिया है। इस उत्सव के उपलक्ष्य में, कई श्रद्धावानों ने अपने घर में बहुत ही भक्तिमय एवं उत्साहपूर्ण माहौल में मनाये जा रहे इस पूजन की, आकर्षक एवं प्रासादिक सजावट के साथ खींचीं तस्वीरें, “नवरात्रिपूजन” इस शीर्षक के

नवरात्रि-पूजन - आदिमाता दुर्गा एवं भक्तमाता पार्वती का एकत्रित पूजन

सध्या सुरु असलेल्या आश्विन नवरात्रोत्सवापासून, परमपूज्य सद्‍गुरु बापूंनी नवरात्रीपूजनाची शुद्ध, सात्त्विक, सोपी व तरीही श्रेष्ठतम्‌ पवित्र पद्धती सर्व श्रद्धावानांसाठी उपलब्ध करून देऊन अत्यंत कृतार्थ केले आहे. ह्या उत्सवानिमित्त, अनेक श्रद्धावानांनी त्यांच्या घरी अत्यंत भक्तीमय व उत्साही वातावरणात सुरु असलेल्या ह्या पूजनाचे, आकर्षक व प्रासादिक सजावटीसहित काढलेले फोटो, “नवरात्रीपूजन” या शीर्षकांतर्गत खास उघडलेल्या फेसबुकपेजवर पोस्ट केले आहेत. अशा ह्या विशेष नवरात्रीपूजनासंदर्भात, दैनिक प्रत्यक्षमध्ये रविवार, दि. १३ ऑगस्ट २०१७ रोजी प्रसिद्ध झालेल्या

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 14 Jan 2016 about, 'Panchamukha-Hanumat-kavacham Explanation - 04 (Panchamukhi Mata Gayatri)’.

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ०९ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में, पंचमुखहनुमत्कवचम् विवेचन करते समय ‘पंचमुखी माता गायत्री’ के बारे में बताया। तो माता गायत्री भी पंचमुखी ही हैं और उनके मुखों के पाँच मुखों के रंग भी पंचमुख-हनुमत्‌ जैसे ही हैं। और गय गायत्री। गायत्री शब्द का अर्थ हम लोग ने जाना है, गायत्री मंत्र का भी जाना है। गय यानी प्राण। जो प्राणों का त्राण यानी तारण

आदिमाता तुम्हें तुम्हारे दुख में से बाहर निकालती है (Aadimata takes you out of your pain) Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ३ मार्च २०१६ के पितृवचनम् में ‘आदिमाता तुम्हें तुम्हारे दुख में से बाहर निकालती है’ इस बारे में बताया।      मेरे बच्चों, प्यार से कह रहा हूं, My dear friends, हम लोग जिस दौर से गुजर रहे हैं, उस में मैं चाहता हूं कि मेरा हर बच्चा बडे प्यार से निकल जाए। कठिनाईयॉं तो आती रहती हैं प्रारब्ध के अनुसार, उसके बाद उसके

शिवगंगागौरीमाता-गदास्तोत्र का महत्त्व (Importance of Shivagangagauri-gadastotram) - Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने १० मार्च २०१६ के पितृवचनम् में  ‘ शिवगंगागौरीमाता-गदास्तोत्र का महत्त्व ’ इस बारे में बताया। आज हम शिवगंगागौरीमाता-गदास्तोत्र का मतलब संक्षिप्त में देखते हैं। अभीष्टा है, अभीष्ट करनेवाली है, सब कुछ अच्छा करनेवाली है। अरिष्टस्तंभनकारिणी है। अरिष्ट याने जो संकट आनेवाला है उसका स्तंभन करनेवाली उसे वहीं रोक देनेवाली। ये कैसी है, तो वडवानला है। यानी पानी में भी जो अग्नि नहीं बुझती, ऐसी

'Kuputro Jaayeta Kvachid-Api Kumaataa Na Bhavati' Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam 22 Oct 2015

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २२ अक्तूबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति’ इस बारे में बताया। दुर्गा , क्षमा, शिवा। क्रम भी हमने देखा हुआ है। क्रम का महत्त्व भी देखा हुआ है। प्रसन्नोत्सव करने वाले थे तभी देखा है। ये दुर्गा है यानी पाने के लिए दुर्गम है ये एक मतलब है। बडे बडे ज्ञानियों को ये हातों में भी नहीं आती है।