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खेळ मांडियेला

While explaining Sant Tukaram’s abhang ‘Khel Mandiyela Valvanti Ghai’, Sadguru Aniruddha (Bapu) described the beautiful relation that Lord Vitthal shares with each of his devotees. This relation is such that it cannot be stated in words and also cannot be compared with anything else. ही भक्तीची भूमी म्हणजेच वाळवंट. ही वाळवंट असून मात्र ही उगवते, ह्या लोकांच्या डोळ्यांना दिसत नाही. वाळवंटामध्ये जर तुम्ही एकादशीच्या दिवशी ह्या भक्तांना नाचताना बघितलं तर

माँ दुर्गा , Mother Durga

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने ३१ मार्च २०१६ के पितृवचनम् में ‘माँ दुर्गा हमारी प्रार्थनाओं का उत्तर देती हैं’ इस बारे में बताया। मुझे अच्छा लगता है हमें, कोई भी सीधा ऐसा बैठा है, तो मुझे अ़च्छा नहीं लगता, वो काम करता रहे बस, बस, बस। I am myself workaholic and I want everyone be is workaholic absolutely. काम करते रहिए यार, शान से जियेंगे। So improve your english. ये अध्यात्मिक

अनिरुद्धजी की ‘ईशा माँ’

॥ हरि ॐ ॥ कुन्दनिका कापडिया अर्थात् अनिरुद्धजी की ‘ईशा माँ’ का देह आज मूलतत्त्व में विलीन हो गया। आज दिनांक ३०/०४/२०२० को भोर के दो बजे उन्होंने देह त्याग दिया और सुबह ग्यारह बजकर चालीस मिनट पर उनका अन्तिम संस्कार नंदिग्राम में हुआ। अनिरुद्धजी के दुख में हम सभी श्रद्धावान सम्मिलित हैं। । हरि ॐ । श्रीराम । अंबज्ञ । । नाथसंविध्‌ ।      समीरसिंह दत्तोपाध्ये गुरुवार, दि.

अनिरुद्धांच्या ‘ईशा माँ’

॥ हरि ॐ ॥ कुन्दनिका कापडिया अर्थात अनिरुद्धांच्या ‘ईशा माँ’चा देह आज मूलतत्त्वात विलीन झाला. आज तारीख ३०/०४/२०२० रोजी पहाटे दोन वाजता त्यांनी देह सोडला आणि सकाळी अकरा वाजून चाळीस  मिनिटांनी त्यांचे अंत्यसंस्कार नंदिग्राम मध्ये झाले. अनिरुद्धांच्या दुःखात आम्ही सर्व श्रद्धावान सहभागी आहोत. । हरि ॐ । श्रीराम । अंबज्ञ । । नाथसंविध्‌ ।  समीरसिंह दत्तोपाध्ये गुरुवार, दि. ३० एप्रिल २०२०  ११ जानेवारी १९९३ – जगदंबेच्या मूर्तीची नंदिग्राममध्ये प्राणप्रतिष्ठा आधुनिक

सब श्रद्धावानों के लिये माँ जगदंबा का आशीर्वाद

मेरे श्रद्धावान मित्रों और बालकों! वर्तमान जागतिक परिस्थिति दिनबदिन अधिक ही बिकट बनती जा रही है। इस साल भारतवर्ष के तथा भारतधर्म के शत्रु अधिक जोर लगाने की कोशिश कर रहे हैं। भारतवर्ष सारे शत्रुओं का यशस्वी रूप से मुकाबला करेगा इस में संदेह ही नहीं है। लेकिन इसके बाद का ढाई हजार वर्ष का समय सभी स्तरों पर विचित्र एवं विलक्षण मोड लेने वाला ही होगा। श्रद्धावानों को इस

mothi-aai-navratri

हरि ॐ, इस गुरुवार को यानी दिनांक १४ दिसंबर २०१७ को परमपूज्य सद्‌गुरु श्रीअनिरुद्ध एक महत्त्वपूर्ण विषय पर विडियो क्लिपिंग के माध्यम से श्रीहरिगुरुग्राम में श्रद्धावानों के साथ संवाद करनेवाले हैं। यह किसी भी प्रकार की योजना न होकर, सभी श्रद्धावानों के लिए यह ‘मोठी आई’ (माँ चण्डिका) का सुंदर वरदान होगा। कृपया सभी श्रद्धावान इस पर ग़ौर करें। हरि ॐ, या गुरुवारी म्हणजेच दिनांक १४ डिसेंबर २०१७ रोजी परमपूज्य

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 14 Jan 2016 that, 'Mother Chandika resides in all beings in the form of Sleep'

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १४ जनवरी २०१६ के पितृवचनम् में  ‘सब जीवों में रहने वाली निद्रा यह भी माँ चण्डिका का रुप है, इस बारे में बताया।  कुछ लोग भूल ही जाते हैं, पूरे दिन, सातों दिन हफ्ते के, महिने के तीस के तीस, इकत्तिस जो दिन हैं, साल के सारे के सारे दिन मुँह खट्टा करके जीते हैं। कभी भी देखो, चेहरा ऐसा ही बना रहता है।

बच्चे का जन्म यह माँ और बच्चे के बीच का युद्ध नहीं है, बल्कि एक स्वाभाविक प्रक्रिया है (The Childbirth is a natural process and not a conflict between Mother and Child) - Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २८ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में  ‘बच्चे का जन्म यह माँ और बच्चे के बीच का युद्ध नहीं है, बल्कि एक स्वाभाविक प्रक्रिया है’, इस बारे में बताया। बच्चा जब जनम लेता है, तब भी कितना संघर्ष होता है उसके लिये। युद्ध नहीं वो करता अपनी माँ के साथ, उसकी माँ भी उसके साथ युद्ध नही कर रही। ये सोचिये जो बालक, एक very

'Kuputro Jaayeta Kvachid-Api Kumaataa Na Bhavati' Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam 22 Oct 2015

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २२ अक्तूबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘गलती के लिए सच्चे दिल से क्षमा मांगने पर मां दुर्गा तुरंत क्षमा करती हैं’ इस बारे में बताया। हम याद करते हैं साईसत्‌चरित्र की चौपाई – ‘करणे नित्य नैमित्तिक कर्म। शुद्ध स्वधर्म या नाव॥’ ये शुद्ध स्वधर्म है। सनातन धर्म है। मानव का धर्म है। मानवता का धर्म है। मानव धर्म में जनम लेने के बाद उद्धरेत्

श्रीशब्दध्यानयोग-विधि

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने १५ अक्तूबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘ब्रह्मांड में भी सप्तचक्र हैं’ इस बारे में बताया। श्रीशब्दध्यानयोग के बारे में पहले हमको समझ लेना चाहिए। ये है क्या? अभी आज तो सब लोग  जानते हैं, जिन लोगों ने ग्रंथ पढे हुए हैं या जिन लोगों ने कुछ नेट पर पढा है कि हर इन्सान के शरीर में ९ चक्र होते हैं। उन में से