Search results for “भय”

रामनाम भय की नामोनिशानी मिटा देता है - भाग २

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ४ फरवरी २०१६ के प्रवचन में ‘रामनाम भय की नामोनिशानी मिटा देता है’ इस बारे में बताया। और ये भी जान लीजिये, कोई भी भय जो है, जो शरीर के साथ जुड़ा है, उसका नाश किससे होता है? रामनाम लेने से होता है। मूलाधार चक्र, स्वाधिष्ठान चक्र और मणिपूर चक्र ये तीन चक्र प्रबल होने के कारण, सामर्थ्यवान होने के कारण इस भय का नाश होता

रामनाम भय की नामोनिशानी मिटा देता है

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ४ फरवरी २०१६ के प्रवचन में ‘रामनाम भय की नामोनिशानी मिटा देता है (The Rama Naam erases the fear) ’ इस बारे में बताया। ये जो हनुमानजी हैं, हम लोग जानते है कि महाप्राण हैं। सो, मूलाधार चक्र से लेकर हमारे सहस्रार चक्र तक सभी चक्रों में इनका ही प्रवाह चलता हैं, यह तो हम लोगों ने श्रीश्वासम्‌ की पुस्तिका में लिखा हुआ है। राईट, पढ़ा हुआ

सारे भय ये मूलत: भ्रम हैं (All the fears are basically delusions)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १५ मई २०१४ के पितृवचनम् में ‘सारे भय ये मूलत: भ्रम हैं’ इस बारे में बताया।   मैंने ये किया इसलिये भगवान ने ये किया, इस विश्वास पर अगर कभी जाओगे तो आप कहां जाओगे, गलत दिशा में जाओगे। डेव्हिल की दिशा में जाओगे, शैतान की दिशा में जाओगे। फिर वहां कारोबार ऐसे ही चलता है, लेनेदेन का। तुमने ये तंत्र मंत्र किया तो डेव्हिल

भय यह हमेशा परिस्थिती से उत्पन्न होता है। (Fear is always because of condition)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धने २३ जनवरी २०१४ के पितृवचनम् में ‘ भय यह हमेशा परिस्थिती से उत्पन्न होता है।’ इस बारे में बताया। भय, जिस चीज से आप डरते हो, वो चीज अपनेआप तुमसे ज्यादा बलशाली हो जाती है, अपनेआप। और भय कैसे उत्पन्न होता है? It is because of condition. Fear is always because of condition. सारे के सारे fears, सारे के सारे भीतियाँ जो हमारे जिंदगी में है, वो

Shivapanchakshari Stotra_Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ०२ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में ‘भय का निर्मूलन करने के लिए शिवपंचाक्षरी स्तोत्र यह बहुत ही प्रभावी स्तोत्र है’, इस बारे में बताया।   भय निर्मूलन के लिये शिवपंचाक्षरी स्तोत्र सबसे श्रेष्ठ माना जाता है, इतना छोटा होके भी। किसी भी तरीके का भय। अगर हमारे मन में भय उत्पन्न होता है, तो क्या बापू हम इस स्तोत्र का पठन कर सकते है?

असुरक्षिततेतून भय उत्पन्न होते (Uncertainty Causes Anxiety) - Aniruddha Bapu Marathi Discourse 25 Sep 2014

असुरक्षिततेतून भय उत्पन्न होते प्रत्येक जिवाठायी असणारी स्वसंरक्षणाची सहजप्रेरणा ही मानवाच्या सुरक्षिततेसाठी त्याच्यात वसत असते. त्याचबरोबर हेदेखील लक्षात घेणे आवश्यक आहे की असुरक्षिततेमुळे मानवाला भय वाटत असते. भयाचे कारण असणार्‍या असुरक्षिततेबद्दल  परम पूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या २५ सप्टॆंबर २०१४ रोजीच्या प्रवचनात सांगितले, जे आपण या व्हिडियोत पाहू शकता. ॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥ ॥ अंबज्ञ ॥

भय आणि क्रोध यांतील संबंध (The Relation Between Fear And Anger) - Aniruddha Bapu Marathi Discourse 25 Sep 2014

भय आणि क्रोध यांतील संबंध   सतत चिडचिड करणारी व्यक्ती जास्त भित्री असते कारण त्याच्या मनात असणार्‍या सततच्या असुरक्षिततेमुळे त्याला जास्त भय वाटत असते आणि त्यातून सततचा राग त्याच्या मनात असतो. सततची चिडचिड आणि भय यांतील परस्परसंबंधाबद्दल परम पूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या २५ सप्टॆंबर २०१४ रोजीच्या प्रवचनात सांगितले, जे आपण या व्हिडियोत पाहू शकता.   ॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥ ॥ अंबज्ञ ॥

स्वार्थ (Swaarth)

भयभंजक हनुमानजी | मानव के जीवन में रामरूपी कर्म और कर्मफलरूपी सीता के के बीच में सेतु बनाते हैं महाप्राण हनुमानजी! रावणरूपी भय मानव के कर्म से कर्मफल को दूर करता है। रामभक्ति करके मानव को चाहिए कि वह हनुमानजी को अपने जीवन में सक्रिय होने दें। हनुमानजी के भयभंजक सामर्थ्य के बारे में परम पूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू  ने अपने १८ सितंबर २०१४  के हिंदी प्रवचन में बताया,

स्वार्थ (Swaarth)

मानवी गर्भ पर भय असर करता है | भाग – ३ Fear भय के कारण मानव के मन पर बुरे परिणाम होते हैं। गर्भवती महिला के गर्भ पर भी भय का असर होता है। गर्भवती महिला को इस बात का विशेष ध्यान रखते हुए भयकारी बातों से दूर रहना चाहिए। मानवी गर्भ पर भय किस तरह असर करता है, इसके बारे में परम पूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने

स्वार्थ (Swaarth)

मानवी गर्भ पर भय असर करता है | भाग – २ भय के कारण मानव के मन पर बुरे परिणाम होते हैं। गर्भवती महिला के गर्भ पर भी भय का असर होता है। गर्भवती महिला को इस बात का विशेष ध्यान रखते हुए भयकारी बातों से दूर रहना चाहिए। मानवी गर्भ पर भय किस तरह असर करता है, इसके बारे में परम पूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने १८