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Kartik

In this pravachan clip dated 03 Nov 2011, Sadguru Aniruddha Bapu explains about ‘Kartik’ month of Marathi Calendar. Bapu also explains Importance of ‘Tripurari’ Pournima that occurs in the ‘Kartik’ month and what one can achieve on this auspicious day.  Speaking about Tripurari Pournima, Bapu says that this is the supreme day on which one can attain success, contentment and peace through contemplation, exploration and study.  On this day, Bapu

गुरुमंत्र का बीज ‘रं’ बीज ही है

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २० अप्रैल २०१७ के प्रवचन में ‘गुरुक्षेत्रम् मंत्र का बीज ‘रं’ बीज ही है(Ram beej is the beej of Guru-Mantra)’ इस बारे में बताया।   तो ये शृंगीप्रकाश और भृंगीप्रकाश। पहले उनका नाम क्या था, महर्षि शृंगी, महर्षि भृंगी। बाद में नाम क्या था? शृंगीनाथ, भृंगीनाथ। बाद में नाम क्या हो गया? शृंगीप्रकाश, भृंगीप्रकाश। अभी नाम क्या हो रहा है? शृंगीप्रसाद, भृंगीप्रसाद। ये जो शृंगीप्रसाद,

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 18 Feb 2016 about ’God can read your mind’

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १८ फरवरी २०१६ के पितृवचनम् में ‘भगवान आपके मन को जानता है’ इस बारे में  बताया। ये जो मूलाधार चक्र हमारे हर एक के शरीर मे है, इसके स्वामी हैं ये (गणेशजी), और ये जो चक्र है, ये मनुष्य के आनंद के लिये है। उसके जीवन का अभ्युदय करने के लिये है। यहां परमानंद की बात नहीं है, यहां परमार्थ की बात नहीं है,

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 16 Mar 2017 about, Panchamukha-Hanumat-kavacham Explanation - 11 (Virat Trivikram)

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १६ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में पंचमुखहनुमत्कवचम् के विवेचन में ‘विराट त्रिविक्रम’ के बारे में बताया। भगवान विष्णु के, महाविष्णु के, शिवशंकरजी के, परमशिव के कितने भी अवतार यहां क्यों न आयें, वे सिर्फ वसुंधरा पर ही आते हैं। लेकिन उनसे भी, उनके साथ साथ हमें ये ध्यान में रखना चाहिये, जब ये भगवान का स्वरूप परमात्मा का अवतार हो जाता है, तो वो

Shivapanchakshari Stotra

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ०२ मार्च २०१७ के पितृवचनम् में ‘शिवपंचाक्षरी स्तोत्र’ के बारे में बताया। तो हम लोग ये जानते हैं, पंचाक्षरी मंत्र, ॐ नमः शिवाय, इसमें बहुत सारी ताकद है, भारत में सबसे ज्यादा मंदिर किसके हैं, तो शिवजी के हैं और हनुमानजी के हैं। हनुमानजी तो बहुत जगह, शिवजी के ही साक्षात अवतार माने जाते हैं, उनकी पूँछ जो है वो उमाजी का रूप मानी

‘ ॐ लं ’ यह कहना ही काफी है - भाग २ (Chanting Om Lam is sufficient - Part 2) - Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ७ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में ‘ ॐ लं यह कहना ही काफी है’ इस बारे में बताया। ये जो ‘शं’ बीज है, ये रुद्र का भी है और भद्र का भी है। हमें हमारी जिंदगी में दोनो चाहिए, लेकिन ये स्वरुप किसके लिये हैं? आवश्यकता क्या है? हम कोशिश करते हैं, मैं किसी को ना फसाऊं और मैं अध्यात्म मार्ग पर रहूं, भगवान

श्रीशब्दध्यानयोग-विधि

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने १५ अक्तूबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘श्रीशब्दध्यानयोग-विधि’ के बारे में बताया।   अनिरुद्ध बापू ने पितृवचन में यह बताया कि पहले मूलाधार चक्र की उपासना होगी, पूजन होगा। उसके बाद स्वाधिष्ठान चक्र की प्रतिमा होगी। मूलाधार चक्र के बाद स्वाधिष्ठान चक्र इसी क्रम से सप्त चक्रों की उपासना एवं पूजा होगी।   स्वाधिष्ठान चक्र – इसके स्वामी है प्रजापति ब्रह्मा। यहाँ प्रजापतति हिरण्यगर्भ

मोठी आई आणि तिचा पुत्र त्रिविक्रम सर्वकाही जाणतातच- ०२ (The Aadimata And Her Son Trivikram Know Everything- 02) - Aniruddha Bapu‬

परमपूज्य सद्‍गुरू श्री अनिरुद्ध बापूंनी त्यांच्या २८ मे २०१५ च्या मराठी प्रवचनात ‘मोठी आई आणि तिचा पुत्र त्रिविक्रम सर्वकाही जाणतातच’ (The Aadimata And Her Son Trivikram Know Everything) याबाबत सांगितले. आदिमाता (मोठी आई) आणि तिचा पुत्र, तुम्ही त्या पुत्राला महाविष्णू, परमशिव, प्रजापति किंवा त्रिविक्रम काहीही म्हणा, पण या दोघांना काही समजत नाही किंवा कळू शकत नाही असा विचार करण्याची चूक कधीच करू नका. आणि जर ही गोष्ट कधी घडली तर

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हरि ॐ, श्रीराम, अंबज्ञ! पहले हमें अब श्रीसूक्त सुनना है। श्रीसूक्त… वेदों का यह एक अनोखा वरदान है जो इस… हमने उपनिषद् और मातृवात्सल्यविंदानम् में पढ़ा है कि लोपामुद्रा के कारण हमें प्राप्त हुआ है…महालक्ष्मी और उसकी कन्या लक्ष्मी… इस माँ-बेटी का एकसाथ रहनेवाला पूजन, अर्चन, स्तोत्र, स्तवन… सब कुछ… यानी यह ‘श्रीसूक्तम्’। तो आज पहले… स़िर्फ आज से हमें शुरुआत करनी है। ‘श्रीसूक्तम्’ का पाठ हमारे महाधर्मवर्मन् करनेवाले हैं।

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  हरि ॐ, श्रीराम, अंबज्ञ. पहिल्यांदा आपल्याला आता श्रीसूक्त ऐकायचं आहे. श्रीसूक्त…वेदांमधील एक अशी अनोखी देणगी आहे की जी ह्या…आपण उपनिषदामध्ये आणि मातृवात्सल्यविंदानम् मध्ये बघितलंय की लोपामुद्रेमुळे आपल्याला मिळाली…महालक्ष्मी आणि तिची कन्या लक्ष्मी…ह्या मायलेकींचं एकत्र असणारं पूजन, अर्चन, स्तोत्र, स्तवन…सगळं काही…म्हणजे हे ‘श्रीसूक्तम्’. तर आज पहिल्यांदा…फक्त आजपासून सुरु करायचं आहे आपल्याला ‘श्रीसूक्तम्’. आपले महाधर्मवर्मन म्हणणार आहेत.   हरि ॐ. अर्थ आज आपल्याला कळला नसेल…काही हरकत नाही. पण ह्या आईचं…माझ्या आदिमातेचं