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ध्यान के प्रकार - चिंतनात्मक और एकाग्रता (Types of Meditation- Contemplative & Concentrative) - Aniruddha Bapu Pitruvachanam 22 Oct 2015

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २२ अक्तूबर २०१५ के पितृवचनम् में ध्यान के दो प्रकारों के बारे में बताया। ध्यान के दो प्रकार होते हैं – एक है चिंतनात्मक और दूसरा है एकाग्रता, ऐसा बापू ने कहा।      ध्यान के चिंतनात्मक (contemplative) और एकाग्रता (concentrative) इन दो प्रकारों की जानकारी देकर बापू ने बताया कि हम यहॉ पर concentrative के मार्ग से नहीं जा रहे हैं। एक सामन्य

Kartik

In this pravachan clip dated 03 Nov 2011, Sadguru Aniruddha Bapu explains about ‘Kartik’ month of Marathi Calendar. Bapu also explains Importance of ‘Tripurari’ Pournima that occurs in the ‘Kartik’ month and what one can achieve on this auspicious day.  Speaking about Tripurari Pournima, Bapu says that this is the supreme day on which one can attain success, contentment and peace through contemplation, exploration and study.  On this day, Bapu

जिज्ञासा यह भक्ति का पहला स्वरूप

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने ०७ अप्रैल २००५ के पितृवचनम् में ‘जिज्ञासा यह भक्ति का पहला स्वरूप है’ इस बारे में बताया। यह जिज्ञासा जो है, यही भक्ति का पहला स्वरूप है। भक्ति का पहला स्वरूप यानी राधाजी का पहला स्वरूप हर मानव के पास जिज्ञासा के रूप में रहता है। जिज्ञासा, भगवान के प्रति जिज्ञासा नहीं, इस विश्व के प्रति जिज्ञासा। यह सूरज कैसा है? यह पृथ्वी इतनी बड़ी है,

गुरुक्षेत्रम् मन्त्राचे श्रद्धावानाच्या जीवनातील महत्त्व - भाग ७

सद्गुरू श्री श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या ०८ एप्रिल २०१० च्या मराठी प्रवचनात ‘गुरुक्षेत्रम् मन्त्राचे श्रद्धावानाच्या जीवनातील महत्त्व’ याबाबत सांगितले.   त्याचप्रमाणे वर्तमानकाळात तर तो राहणारच आहे, ऑब्व्हियसली. प्रत्येक गोष्ट जी घडत असेल, ती घडवताना तुमची सर्व सेफ्टी बघण्याचं काम हा करणारच आहे, आपोआपच. तो चारी बाजूला असणार आहे वर्तमानकाळामध्ये. तर ह्या मंत्रामधली सगळ्यात सुंदर गोष्ट म्हणजे ‘विच्चे’. विच्चे, ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।’ ऐं, ह्रीं आणि क्लीं हे तीन ही बीजमंत्र

Sadguru Shree Aniruddha’s Pitruvachan (Part 1) – 21 March 2019

हरी ॐ. श्रीराम. अंबज्ञ. नाथसंविध्‌. नाथसंविध्‌. नाथसंविध्‌. So, होली खेलकर आये हुए हैं बहुत लोग। खेले कि नहीं खेले? खेले…नहीं खेले…क्यों? [आपके साथ खेलना था] अरे भाई, मैं तो बुढ्ढा हो चुका हूँ, कहाँ होली खेलनी हैं। रंग नहीं खेलते आप लोग? क्यों? जो नहीं खेला होगा, वो हात ऊपर करें। जिन्होंने रंग खेला, वो लोग हाथ ऊपर करें। Very good, ऍब्सोल्युटली, मस्त, क्लास। बाकी लोग क्यों नहीं खेले? हमारी

सब श्रद्धावानों के लिये माँ जगदंबा का आशीर्वाद

माझ्या श्रद्धावान मित्रांनो व बालकांनो! सध्याची जागतिक परिस्थिती दिवसेंदिवस अधिकच बिकट होत चालली आहे. ह्या वर्षामध्ये भारतवर्षाचे व भारतधर्माचे शत्रू अतिशय जोर करू पाहत आहेत. भारतवर्ष सर्व शत्रूंशी यशस्वी मुकाबला करेल ह्याविषयी संशयच नाही. परंतु ह्यापुढील अडीच हजार वर्षांचा काळ सर्व स्तरांवर विचित्र व विलक्षण वळणे घेणाराच असणार आहे. श्रद्धावानांना ह्या काळात स्वतःचे हित साधून, भारतवर्षाचे व भारतधर्माचे हित साधत, जीवनातील आपदा दूर करण्यासाठी माझ्या मनात जगदंबेच्या व दत्तगुरुंच्या प्रार्थनेनंतर

Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam dated 28 Apr 2016 that God never breaks His promises

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २८ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में ‘भगवान कभी भी अपना वादा तोडते नहीं हैं’, इस बारे में बताया। जब हम संघर्ष को युद्ध मानते हैं, और हमारा संघर्ष सबसे ज्यादा किसके साथ रहता है, भगवान के साथ। संघर्ष है तब तक अच्छा है, भगवान के साथ जब युद्ध करने लगते हैं, तब महिषासुर के सैनिक बन गये। हम बहुत बार सोचते हैं, बापू हम

Our Focus must be on chanting Swastivakyam - Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २२ अक्तूबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘हमारा ध्यान स्वस्तिवाक्यम्‌ के जाप में रहना चाहिए’ इस बारे में बताया।  अनिरुद्ध बापू ने कहा- ये जो स्वस्तिवाक्यम्‌ है उसमें हमे ध्यान किस बात पर करना है – उस वाक्य का हमे जप करना है। ओके। जिस समय, समझो कि मूलाधारचक्र का पूजन चल रहा है तो उतने समय तक मूलाधार चक्र की प्रतिमा में रहनेवाले ‘लं’

श्रीश्वासम्‌ उत्सवादरम्यान असलेली झाल (Zal During The ShreeShwasam Utsav)

सद्‌गुरू परमपूज्य बापूंनी त्यांच्या प्रवचनात सांगीतल्याप्रमाणे ’श्रीश्वासम्‌’ ही त्यांच्याकडून कडून आम्हा सर्व श्रध्दावानांना मिळालेली ही सर्वोकृष्ठ भेट आहे. श्रीश्वासम्‌ उत्सवाच्या माध्यमाने श्रध्दावानांना अनेक सुंदर व पवित्र गोष्टी अनुभवण्याची संधी बापू देत आहेत. ह्या अनेक गोष्टींपैकी एक म्हणजे मुख्यस्टेजसमोर असलेल्या ‘झाली’. उत्सवाच्या मुख्यस्टेजवर असलेली मोठीआई, चंडिकाकूल, श्रीयंत्रकूर्मपीठम्‌, शाकंभरी-शताक्षी देवी व बालहनुमंतासहीत असलेल्या अंजानामातेचे दर्शन घेण्याच्या आधी व घेतल्यानंतर देखील श्रध्दावानांना सुबक स्तंभांवर पसरलेल्या पवित्र झालींखालून जायची संधी सद्‌गुरूंच्या कृपेने उपलब्ध करुन

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हरि ॐ, श्रीराम, अंबज्ञ! पहले हमें अब श्रीसूक्त सुनना है। श्रीसूक्त… वेदों का यह एक अनोखा वरदान है जो इस… हमने उपनिषद् और मातृवात्सल्यविंदानम् में पढ़ा है कि लोपामुद्रा के कारण हमें प्राप्त हुआ है…महालक्ष्मी और उसकी कन्या लक्ष्मी… इस माँ-बेटी का एकसाथ रहनेवाला पूजन, अर्चन, स्तोत्र, स्तवन… सब कुछ… यानी यह ‘श्रीसूक्तम्’। तो आज पहले… स़िर्फ आज से हमें शुरुआत करनी है। ‘श्रीसूक्तम्’ का पाठ हमारे महाधर्मवर्मन् करनेवाले हैं।