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he Shraddhavan is connected to Chandikakul

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ७ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में ‘श्रद्धावान यह चण्डिकाकुल से जुडा ही है’ इस बारे में बताया। माँ भगवती और उसका जो बेटा है त्रिविक्रम, वो हमारा मन बदलने के लिये सारी सहायता करता है। हमारी बुद्धी को और ताकद देता है, हमारे मन को और सामर्थ्य देता है, हमारे प्राणों में ऐसे ‘बदलाव’ करते हैं, जिससे हम मन कंट्रोल कर सके। लेकिन मन

स्वस्तिक्षेम संवादम्‌ - दिव्य चण्डिकाकुल के साथ संवाद (Swastikshem Samvadam - The Conversation with the divine Chandikakul) - Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ७ एप्रिल २०१६ के पितृवचनम् में ‘स्वस्तिक्षेम संवादम्‌ यह दिव्य चण्डिकाकुल के साथ किया जानेवाला संवाद है’ इस बारे में बताया। अनिरुध्द बापू ने कहा कि अभी हम स्वस्तिक्षेम संवादम्‌ करने जा रहे हैं। फिर एक बार मै बताता हूं कि स्वस्तिक्षेम संवादम्‌ क्या है? हर एक व्यक्ति अपने मन में, अपने मन की जो भी बात करना चाहता हो, इस चण्डिकाकुल के किसी

चण्डिकाकुलाच्या तसबिरीचे आम्ही श्रध्देने व विश्वासाने दर्शन घेत असतो, ही चांगलीच गोष्ट आहे पण जेवढे जमेल तेवढे चण्डिकाकुलास प्रेमाने न्याहाळण्याने काय लाभ मिळतो याबद्द्ल परम पूज्य सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापुंनी गुरूवार दिनांक १७ एप्रिल २०१४ रोजी च्या मराठी प्रवचनात श्री हरिगुरुग्राम येथे स्पष्ट केले. ॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥ ॥ अंबज्ञ ॥

चण्डिकाकुलास प्रेमाने न्याहाळणे (To stare at Chandikakul (चण्डिकाकुल) with Love) - Aniruddha Bapu Marathi Discourse -17 April 2014

चण्डिकाकुलाच्या तसबिरीचे आम्ही श्रध्देने व विश्वासाने दर्शन घेत असतो, ही चांगलीच गोष्ट आहे पण जेवढे जमेल तेवढे चण्डिकाकुलास प्रेमाने न्याहाळण्याने काय लाभ मिळतो याबद्द्ल परम पूज्य सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापुंनी गुरूवार दिनांक १७ एप्रिल २०१४ रोजी च्या मराठी प्रवचनात श्री हरिगुरुग्राम येथे स्पष्ट केले. Chandikakul ॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥ ॥ अंबज्ञ ॥

श्रीशब्दध्यानयोग - ०१

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने १५ अक्टूबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘श्रीशब्दध्यानयोग- ०१’ इस बारे में बताया। तो हमारा मूल निवास कहाँ था, हम लोग नहीं जान सकते, ओ.के., ये एक बात है। दूसरी बात क्या होती है, बहुत बार हम लोगों का कुलदैवत कौनसा है, यह भी हमें मालूम नहीं होता। हमारा ग्रामदैवत कौन सा है, हमें मालूम नहीं रहता। ये वास्तुदेवता भी होती है डेफिनेटली। ये सब क्या है?

Sudeep

हरि ॐ, सद्‌गुरु श्रीअनिरुद्धजी के कृपा-आशीर्वाद से और उन्हीं के मार्गदर्शन के अनुसार श्रद्धावान भक्तिमार्ग पर अपना सर्वांगीण विकास कराते रहते हैं। सद्गुरु श्री अनिरुद्धलिखित ‘श्रीमद्पुरुषार्थ ग्रंथराज’ तृतीय खण्ड ‘आनन्दसाधना’ के ‘आचमन-१२२’ में, परमात्मा को पसन्द होनेवालीं नौं बूँदों के बारे में जो वर्णन किया गया है, उसके ८ वें मुद्दे में कहा गया है – ‘८) श्रीमद्पुरुषार्थ ग्रंथराज के समीप प्रज्वलित किये जानेवाले दीपक के तेल, घी तथा मोम

नामस्पर्श

हरि ॐ, श्रीराम, अंबज्ञ, नाथसंविध्‌, नाथसंविध्‌, नाथसंविध्‌. हम यह जो मंत्रगजर करते हैं – ‘रामा रामा आत्मारामा….’, वह कहाँ जाकर पहुँचता हैं? क्या हवा में घूमता रहता है इधर कहाँ? या पूरे ब्रह्मांड में या हवा में जाकर पहुँचता है? कहाँ जाता होगा? There is a definite place, where it goes….where it reaches….where it is absorbed….where it is pulled. Only one place. कौनसी जगह हैं वह? त्रिविक्रमनिलयम श्रीगुरुक्षेत्रम्‌॥ हम लोग

महादुर्गेश्वर प्रपत्तीसंबंधित माहिती

महादुर्गेश्वर प्रपत्तीच्या मांडणीमध्ये प्रपत्ती करणारे पुरुष श्रद्धावान चौरंगावर श्रीचण्डिकाकुलाची तसबीर  ठेवून त्या तसबिरीसमोर श्रीत्रिविक्रमाची तसबीर अथवा मूर्ती ठेवतात. अनेक श्रद्धावानांकडून प्रपत्तीसंबंधात एक विचारणा झाली होती की महादुर्गेश्वर प्रपत्तीत श्री महादुर्गेश्वराची तसबीर किंवा मूर्ती कुठे दिसत नाही. सद्गुरु श्री अनिरुद्धांनी श्रीचण्डिकाकुल तसबिरीच्या उद्घाटनाच्या वेळी, तसेच सद्गुरुंच्या श्रीस्वस्तिक्षेम तपश्चर्येच्या वेळी याविषयी मार्गदर्शन केले होते. सद्गुरुंनी दिलेली माहिती पुढीलप्रमाणे आहे- ‘श्रीचण्डिकाकुलाच्या तसबिरीत श्रीहनुमन्तापुढे विराजमान असणारे ‘शिवलिंग’ हे हनुमन्ताचे ‘आत्मलिंग’ अर्थात् श्रीमहादुर्गेश्वरच आहे.’ सद्गुरुंच्या

महादुर्गेश्वर प्रपत्तिसंबंधित जानकारी

महादुर्गेश्वर प्रपत्ति की रचना में प्रपत्ति करने वाले पुरुष श्रद्धावान चौकी पर श्रीचण्डिकाकुल की तसवीर रखकर उस तसवीर के सामने श्रीत्रिविक्रम की तसवीर अथवा मूर्ति रखते हैं। अनेक श्रद्धावानों से प्रपत्ति के संदर्भ में एक प्रश्न पूछा गया कि महादुर्गेश्वर प्रपत्ति में श्री महादुर्गेश्वर की तसवीर या मूर्ति कहीं पर दिखायी नहीं देती। सद्गुरु श्री अनिरुद्ध ने श्रीचण्डिकाकुल तसवीर के उद्घाटन के समय, तथा सद्गुरु की श्रीस्वस्तिक्षेम तपश्चर्या के समय

अनिरुद्ध बापु

हरि ॐ, श्रीराम, अंबज्ञ। जय जगदंब जय दुर्गे। श्रीराम। मेरे सारे श्रद्धावान मित्रों को नूतन वर्ष की शुभकामनाएँ, अनंत शुभकामनाएँ। मेरे प्यारों, इस २०१७ से २०२४ तक के ७ से ८ वर्ष ….. ये इस समाजजीवन में…… भारतीय समाजजीवन में….. जागतिक समाजजीवन में….. राजनीति में….. अनेक प्रकार से, अनेकविध पद्धतियों से….. अनेकविध कारणों से…. निरंतर बदलते रहने वाले हैं। निरंतर बदलाव….. अनेक दिशाओं से परिवर्तन। ये बदलाव हम हर एक