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World-Opposition-China

चीन के खिलाफ़ जारी शीत युद्ध में यूरोप ने अमरीका का साथ देना अहम – जर्मनी के वरिष्ठ अधिकारी का बयान बर्लिन – अमरीका और चीन के बीच शीत युद्ध शुरू हुआ है। यह शीत युद्ध इस सदी को आकार देनेवाली निर्णायक घटना साबित होगी। ऐसी स्थिति में चीन ने अपने सामने खड़ी की हुई चुनौतियों का मुकाबला करना है तो यूरोप ने अमरीका के कंधे से कंधा मिलाकर ड़टकर

प्रपत्ती - आप्पत्ती निवारण करणारी शरणागती... (Prapatti)

मागच्या वर्षीप्रमाणे, याही वर्षी , परम पूज्य नंदाईंच्या मार्गदर्शनाखाली, हॅपी होममध्ये, श्रीमंगलचण्डिका प्रपत्तीची धावपळ सुरू झालेली पाहिली. नंदाई, तेथील काही श्रद्धावान स्त्रियांशी बोलत असताना म्हणाल्या, ‘तयारीची सुरुवातच आपण रामराज्याच्या पुस्तकात बापूंनी प्रपत्तीबद्दल सांगितलेली माहिती वाचूनच करुया. म्हणजे बापूंना काय अपेक्षित आहे ते आपल्याला नीट कळेल. दरवर्षी प्रपत्तीच्या आधी ही माहिती सर्व श्रद्धावान स्त्रियांनी वाचली म्हणजे त्यांना बापूंची भूमिका नीट समजून घेता येईल. ….आणि तेव्हाच मला आठवण झाली रामराज्याच्या प्रवचनाची, तो दिवस

विठू सावळा

सद्गुरु श्री श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या १३ नोव्हेंबर २००३ च्या मराठी प्रवचनात ‘देव माझा विठू सावळा’ याबाबत सांगितले. ‘देव माझा विठू सावळा। माळ त्याची माझिया गळा॥’ हा अभंग आम्ही लाख वेळा ऐकला असेल, पण आमच्या डोक्यात कधी हा प्रकाश पडला नाही. ‘देव माझा विठू सावळा। माळ त्याची माझिया गळा॥’ विठ्ठलाची माळ कधीच विठ्ठलाच्या गळ्यात राहिली नाही राजांनो. ती भक्तांच्या गळ्यासाठीच आसुसलेली असते. परंतु आम्ही कधीतरी, ही माळ तेवढ्या मनाने, प्रेमाने विठ्ठलाच्या गळ्यात

समयोग

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने ३० जून २००५ के पितृवचनम् में ‘समयोग’ इस बारे में बताया। योग जो है, भगवान, उस भगवती शक्ति और भक्त तीनों का एक समवान हिस्से में आना, एक ही ट्रान्ससेक्शन में, एक ही समय, एक ही पल, तीनों आनंद जो होते हैं, उसे योग कहते हैं। भगवान तो हमेशा आनंदस्वरूप हैं। भगवती जो हैं, वो तो आल्हादिनी स्वरूप हैं, आनन्दप्रदायक, उत्पन्न करनेवाली हैं। खुद आनन्दस्वरूप भगवान,

अग्नि और जल

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने ३० जून २००५ के पितृवचनम् में ‘अग्नि और जल’ इस बारे में बताया। जल, यह जो हमारा शरीर है, यह शरीर दिखता है तो, क्या पानी दिखता है शरीर में कहीं? बाहर से नहीं दिखता। हर कोई जो सायन्स का स्टुडण्ड है, जानता है कि शरीर का कितना हिस्सा पानी है? ७०% वॉटर है इस शरीर में। पृथ्वी पर कितना पानी है और कितनी जमीन है?

क्षीरसागर का मन्थन

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने २४ फरवरी २००५ के पितृवचनम् में ‘क्षीरसागर का मन्थन’ इस बारे में बताया। ये विमलचित्त सबको मिला है भाई। उसी का मंथन करना यही हमारी जीवन की इतिकर्तव्यता है, प्रमुख ध्येय है। एम्स ऍण्ड ऑबजेक्टीव जिसे हम लोग कहते हैं तो मोस्ट इम्पॉर्टंट एम्स ऍज वेल ऍज ऑब्जेक्टीव इज ओनली धिस। भाई, हमें अमृत पाना है यानी क्या पाना है? अमर नहीं होना है, कोई आदमी,

सच्चिदानन्द सद्‌गुरुतत्त्व - भाग ४

सद्‍गुरुश्री अनिरुद्धजी ने ०७ अक्टूबर २०१० के पितृवचनम् में ‘सच्चिदानन्द सद्‍गुरुतत्त्व(Satchidanand Sadgurutattva)’ इस बारे में बताया। सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने ०७ अक्तूबर २०१० के पितृवचनम् में ‘सच्चिदानन्द सद्गुरुतत्त्व’ इस बारे में बताया। गुरु के चरण क्या हैं? एक चरण जब शुभंकर होता है, दूसरा अशुभनाशन होता है। यानी balanced perfect. देखिए, एक जगह आप अच्छी चीज़ों को collect करते रहिए और साथ-साथ बुरी चीज़ों को निकालना रोक दीजिए, क्या होगा?

सच्चिदानन्द सद्गुरुतत्त्व - भाग ३

सद्‍गुरुश्री अनिरुद्धजी ने ०७ अक्टूबर २०१० के पितृवचनम् में ‘सच्चिदानन्द सद्‍गुरुतत्त्व(Satchidanand Sadgurutattva)’ इस बारे में बताया। तो ये सद्‍गुरुतत्त्व क्या है? सच्चिदानंद स्वरुप है। क्योंकि उसके पास कोई एक्सपेक्टेशन नहीं है, सिर्फ एक इच्छा रखता है, जो मेरा नाम ले, जो मुझसे प्रेम करे, जो मेरी आज्ञा का पालन करे, वो मेरे अपने हैं और उनकी जिंदगी में कैसे ज्यादा से ज्यादा आनंद से भरपूर कर दूँ। कुछ नहीं चाहता

सद्‍गुरु महिमा-भाग १ , Sadguru Mahima-Part 1

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धने १५ अप्रैल २०१० के पितृवचनम् में ‘सद्‍गुरु महिमा’ इस बारे में बताया।   साईनाथजी की महिमा हेमाडपंत लिख रहे हैं, हम लोग देख रहे हैं। हेमाडपंतजी ने हमें सद्‍गुरु क्या था, क्या होता है, कैसे होता है यह खुद की आँखों से देखा था, महसूस किया था और पूरी तरह से जान लिया था और सिर्फ जाना नहीं बल्कि जानने के साथ-साथ खुद को निछावर कर दिया

अफवांचे भोई

हरि ॐ आज श्री.वैभवसिंह कुलकर्णीने पोस्ट केलेली नोट बघितली. ही नोट म्हणजे शब्दश: माझे मनोगत आहे. ——————————————————————– अफवांचे भोई हरी ओम .. सोशिअल मीडियावर सध्या एका मेसेजची खूप देवाण घेवाण केली जात आहे. परदेशातील श्रद्धावानांसोबत समीरदादांनी केलेल्या व्हिडीओ कॉन्फरन्सिंग मधले हे मुद्दे आहेत असा दावा ह्या मेसेज मध्ये केलेला आहे. हे मेसेजेस वाचल्यावर पहिला विचार माझ्या डोक्यात आला की समीरदादांना जेंव्हा एखादा मेसेज आपल्यापर्यंत पोहोचवायचा असतो तो ऑफिशिअल मार्गानी आपल्या