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क्षमा

In the Hindi discourse from 29th December 2005, Sadguru Aniruddha (Bapu) explains to us the true meaning of Kshama (क्षमा/ forgiveness) in a lucid manner. Besides, he clarifies upon the difference between माफी and क्षमा. २९ दिसंबर २००५ के हिंदी प्रवचन में सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू हमें क्षमा का सही अर्थ बड़ी सरलता से बताते है| साथ ही में ‘माफ़ करना’ एवं ‘क्षमा करना’, इन दोनों में क्या अंतर है,

'Kuputro Jaayeta Kvachid-Api Kumaataa Na Bhavati' Aniruddha Bapu told in his Pitruvachanam 22 Oct 2015

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २२ अक्तूबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘गलती के लिए सच्चे दिल से क्षमा मांगने पर मां दुर्गा तुरंत क्षमा करती हैं’ इस बारे में बताया। हम याद करते हैं साईसत्‌चरित्र की चौपाई – ‘करणे नित्य नैमित्तिक कर्म। शुद्ध स्वधर्म या नाव॥’ ये शुद्ध स्वधर्म है। सनातन धर्म है। मानव का धर्म है। मानवता का धर्म है। मानव धर्म में जनम लेने के बाद उद्धरेत्

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आदिमाता जिसे क्षमा न कर सके इतना बडा कोई पाप ही नहीं है (There Is No Sin Too Big For Aadimata To Forgive) मातृवात्सल्य उपनिषद्‍ में हम पढते हैं कि कोई भी यदि सच्चे दिल से पश्चात्तापपूर्वक आदिमाता की शरण में जाकर सुधरने के लिए प्रयास करता है तो वह चाहे कितना भी पापी क्यों न हो, यहाँ तक कि राक्षस या शैतान भी क्यों न हो, मगर तब भी

परिणाम

तीसरा विश्‍वयुद्ध शुरू हुआ तो परमाणु हथियारों का इस्तेमाल होगा किव/मास्को – तीसरा विश्‍वयुद्ध शुरू हुआ तो इसमें परमाणु हथियारों का इस्तेमाल किया जाएगा और यह युद्ध अतिभंयकर संहार करेगा, ऐसा दहलानेवाला इशारा रशिया के विदेशमंत्री सर्जेई लैवरोव ने दिया। रशिया ने अपनी नौसेना की परमाणु पनडुब्बी के समावेश के साथ युद्धाभ्यास शुरू करके यह इशारा खोखला ना होने की बात भी दिखाई। इसके अलावा यूक्रैन को हथियारों की आपूर्ति

श्री पञ्चमुखहनुमत्कवच

।। हरि: ॐ ।। ॥ अथ श्रीपञ्चमुखहनुमत्कवचम् ॥ श्रीगणेशाय नम: । ॐ अस्य श्रीपञ्चमुखहनुमत्कवचमन्त्रस्य ब्रह्मा ऋषि: । गायत्री छंद: । पञ्चमुख-विराट् हनुमान् देवता । ह्रीम् बीजम् । श्रीम् शक्ति: । क्रौम् कीलकम् । क्रूम् कवचम् । क्रैम् अस्त्राय फट् । इति दिग्बन्ध: । ॥ श्री गरुड उवाच ॥ अथ ध्यानं प्रवक्ष्यामि शृणु सर्वांगसुंदर । यत्कृतं देवदेवेन ध्यानं हनुमत: प्रियम् ॥१॥ पञ्चवक्त्रं महाभीमं त्रिपञ्चनयनैर्युतम् । बाहुभिर्दशभिर्युक्तं सर्वकामार्थसिद्धिदम् ॥​२​॥ पूर्वं तु वानरं

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सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धजी ने ३१ मार्च २०१६ के पितृवचनम् में ‘समय के साथ चलो’ इस बारे में बताया। कईं लोगों को देखता हूँ, तो बस पढ़ते ही रहते हैं, कभी भी देखो खेलते रहते हैं मोबाईल पर, नहीं तो पढ़ते रहते हैं। इससे कुछ नहीं मिलता, ध्यान में रखिए। ये हमारे जो समय भगवान ने दिया हुआ है वो सिर्फ गिना-चुना है। कोई नहीं आज अगर सोचता है, कोई भी

श्रीवर्धमान व्रताधिराज व्रतपुष्प संबंधी सूचना

हरि ॐ, सभी श्रद्धावान यह जानते ही हैं कि हमारे ‘श्रीवर्धमान व्रताधिराज’ के शुरू होने में अब चन्द कुछ दिनों की ही देर है। हर साल व्रताधिराज का पालन करते समय श्रद्धावान अपनी-अपनी पसन्द के स्तोत्र, प्रार्थना, मंत्र आदि का बतौर ‘व्रतपुष्प’ चयन करते हैं। कई श्रद्धावानों ने यह पूछा था कि “क्या हम गुरुवार की नित्य उपासना में होनेवाले ‘ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी, दुर्गा क्षमा शिवा धात्री

जयंती मंगला काली

हरि ॐ २१-०२-२०१९ हरि ॐ. श्रीराम. अंबज्ञ. नाथसंविध् नाथसंविध् नाथसंविध्. ‘रामा रामा आत्मारामा त्रिविक्रमा सद्गुरुसमर्था, सद्गुरुसमर्था त्रिविक्रमा आत्मारामा रामा रामा’ जो कोई भी यह जप करता है, मंत्रगजर करता है, (वह) भक्तिभावचैतन्य में रहने लगता है। कुछ लोगों के मन में प्रश्न उठा है। सही प्रश्न है – ‘बापू, यह मंत्रगजर तो सर्वश्रेष्ठ है, आपने बताया, मान्य है हमें Definitely। लेकिन ‘माँ’ का नाम नहीं है इसमें?’ यह मैंने पहले

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ३० नवंबर २०१७ के पितृवचनम् में ‘४ सेवाओं का उपहार’ इस बारे में बताया। हर साल, हर दिन, हर पल हर एक श्रद्धावान के मन में, हर एक इन्सान के मन में ये विचार रहता है कि मैं जिस स्थिति में हूं, उस स्थिति से मैं और कैसे आगे चला जाऊं, मेरा विकास कैसा हो जाये, मुझे सुख कैसा प्राप्त हो जाये, मेरे दुख

नवरात्रिपूजन करण्याची शुद्ध, सात्त्विक, सोपी व तरीही श्रेष्ठतम पवित्र पद्धती

         दिनांक १४ सप्टेंबर २०१७ च्या ’दैनिक प्रत्यक्ष’ मधील अग्रलेखात दिल्याप्रमाणे ’नवरात्रीपूजनाचे’ विधीविधान खालीलप्रमाणे आहे. हिंदी व मराठी या दोन्ही भाषांमध्ये हे विधीविधान देण्यात आले आहे. प्रत्येक श्रद्धावान आपल्या घरी अशा प्रकारे नवरात्रीपूजन करु शकतो.  प्रतिष्ठापनाः १)     नवरात्रीच्या प्रथम दिवशी पूजनास प्रारंभ करण्याआधी इष्टिकेस सर्व बाजुंनी गेरूचा लेप व्यवस्थित लावावा. (अंबज्ञ इष्टिका असल्यास ही कृती करायची गरज नाही) २)   तद्नंतर एका परातीत आवश्यक तेवढी मृत्तिका घेऊन