रामनाम बही का कम से कम एक पन्ना प्रतिदिन लिखिए

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २० अप्रैल २०१७ के प्रवचन में ‘रामनाम बही का कम से कम एक पन्ना प्रतिदिन लिखिए (Write at least one page of Ramnaam book daily)’ इस बारे में बताया।

 

रामनाम बही का यही महत्व है, उस में जो नाम हैं, राम, कृष्ण जो भी दिये हुए हैं जो मंत्र, ये सब क्या करते हैं? हमारे इन तीन चक्रों की, मणिपूर चक्र, स्वाधिष्ठान चक्र, मूलाधार चक्र इन तीन चक्रों की उपासना हम से अपने आप हो जाती हैं। लेकिन कब? चार महिने में एक बार एक पन्ना लिखने से नहीं। आप चार महिने में एक बार खाना खाओगे तो जी सकोगे? हर रोज कम से कम एक पेज लिखना आवश्यक है। एक पेज लिखने को कितना टाईम लगता है? बोलो, अरे बोलो बेटे? एक मिनीट या दो मिनीट या ढ़ाई मिनीट ओ.के. तो ढ़ाई अक्षर प्यार के तो हम लोग ज़ानते हैं, लेकिन ये ढ़ाई मिनीट हमारे पास नहीं होते।

अभी देखिए, कोई अच्छा वाला कॅलक्युलेटर होगा तो देख लो, वैभव, किस का मॅथमॅटिक्स अच्छा है? सुचितदादा होते तो उत्तर दे देते। उनका Mathamatics is a superb है। आप लोगों को मालूम है, अभी ये बच्चों को तो मालूम नहीं होगा, मेरे उमर के हैं और मेरे से बड़े हैं वो जान सकेंगे की हम लोगों के स्कूल में पाढे होते थे, पाढे यानी टेबल्स उसे कहते हैं ना? हमारे दादा-दादी बैठ कर हमसे पाढे बुलवाते थे। बे एके बे, बे दूणे चार, बे त्रीक सहा आज भी सबको आते हैं, उन्नतीस एके उन्नतीस, उन्नतीस दुणे बोला, आता बोला? बीस तक के तो, सोलह तक के आ जाते हैं सोलह के बाद थोड़ा रूक-रूक के बोलते हैं, बीस-इक्कीस तक ठीक है उसके बाद में डिशॅव, बराबर। तो ये पाढे में ना हम लोगों को सीधे पाढ़े नहीं होते थे, उसके साथ में पावकी होती थी यानी एक पाव पाव, दो पाव आधा, तीन पाव पावणा, चार पाव एक। बाद में निमकी होती थी।

यानी एक निम्मे एक, अर्धा दो निम्मे एक, तीन नीम्मे दिड, चार निम्मे दो जो भी है। वैसे सवाई की होती थी, डेढकी होती थी देड़ पट ok then दुक्की होती थी और अढ़ाई की होती थी, अडी़च की। ये सब दादा को अभी भी याद है। 365 in to 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12, 13, 14, 15, 16, eleven years हो गये तो 365 x 11 कितने दिन हो गये 4015 अभी ये साडेचार महिने के दिन डाल दो उसमें, अब ये जानेवारी, फेब्रुवारी, मार्च, एप्रिल हो गया एप्रिल आधा हो गया…. 4190 देखिये बॉस लोग कितने दिन आते हैं आपके पास? 4190। एक नोट बुक में कितने पेजेस है? 216 अब ये डिव्हीजन करके बोल दें, हर रोज एक पेज करते हैं तो कितने नोटबुक्स हो जाते हैं कम से कम, 19.40 तो कम से कम हमारी कितनी नोट बुक होनी चाहिये थी exactly? बीस, राईट, एक पेज लिखते तो, राईट। राईट इतनी भी हुई है क्या? नहीं नहीं हफ्ते में एक बार लिखके नहीं हर रोज लिखके मैं बोल रहां हूँ? मैंने आज ही ये क्यों सबजेक्ट निकाला? सिर्फ रं बीज के लिये नहीं।

आज तक हम लोग एक एक पत्ता भी लिखते तो हमारे कितने होते थे? 19, और मैंने पहले दिन क्या बोला था, जब रामनाम बही के बारे में, रामनाम बँक के बारे में बोला तब? कि जब तक अठारह नोटबुक्स कमप्लीट नहीं होते, तब हमें समझना चाहिये की हम लोग पूरे श्रद्धावान नहीं हुए हैं और जिन लोगों के यानी अठारह नोटबुक कमल्पीट नहीं किये है वहाँ से लेकर और जो बीच में से आये उनकी बात अलग हैं तो हम लोग श्रद्धावान बन जाते हैं अपने आप और क्यों श्रद्धावान बनते? तो श्रद्धावान बनने के लिये आवश्यकता होती है फेथ की, भक्ति की और ये भक्ति और फेथ कहाँ से आता है? इन चक्रों के, तीन चक्रों के सहकार्य से ही।

रामनाम बही का कम से कम एक पन्ना प्रतिदिन लिखिए’ इस बारे में हमारे सद्गुरु श्री अनिरुद्ध ने प्रवचन में बताया, जो आप इस व्हिडिओ में देख सकते हैं।

ll हरि: ॐ ll ll श्रीराम ll ll अंबज्ञ ll

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