रामनाम बही का कम से कम एक पन्ना प्रतिदिन लिखिए – ०२

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २० अप्रैल २०१७ के प्रवचन में ‘रामनाम बही का कम से कम एक पन्ना प्रतिदिन लिखिए’ (Write at least one page of Ramnaam book daily – 02) इस बारे में बताया।

 

स्वाधिष्ठान चक्र क्या देता है? फाऊंडेशन फ़ॉर्म करता है। फाऊंडेशन यानी हिंदी में क्या कहेंगे? पाया मराठी में कहते हैं, हिंदी में? नींव रखते हैं, नींव। तो मूलाधार चक्र हर चीज की नींव रखता है। स्वाधिष्ठान चक्र क्या करता है? उसपर बिल्डिंग बांधता है और मणिपूर चक्र क्या है? उस बिल्डिंग को घर बना देता है। बिल्डिंग और घर में बहोत सारा फरक है, सिर्फ दिवार के बन जाने से घर – घर नहीं बनता। उसमें टॉयलेट चाहिये, ये चाहिये, विन्डो चाहिये, डोअर चाहिये, डोअर पर लॉक चाहिये, रहनेवाले लोगों का एक दूसरे से प्यार चाहिये, प्राणाग्नि है ना? तो सजीव हो जाता है घर पूरा। तो ये जो तीन चक्र हैं, ये तीन चक्र बहुत आवश्यक होते हैं हमारे विश्वास को मजबूत करने के लिये। नहीं तो विश्वास कभी ना कभी इंसान का जिंदगी में दोलायमान हो जाता है। ऐसी परिस्थिति आती है जीवन में कि इतना हम लोगों ने विश्वास रखा ये क्या हो गया आज? तब हम लोग भगवान को कोसते हैं या खुद कोसते हैं, खुद को भी नहीं कोसना और भगवान को भी नहीं कोसना।

ये जानना चाहिये कि हर रोज पठन करने के बाद अगर ये आपत्ती आयी है इसका मतलब है अगर मैं पठन नहीं करता तो क्या हो जाता, ये जान लो। अगर भगवान सहायता नहीं कर सकता तो कोई नहीं कर सकता और ऐसे क्षण भी हर एक इंसान के, nobody is exception, हर एक इंसान के जीवन में ऐसे पल आते हैं कि वो बेबस होके उठता है कि अब मैं क्या करू? ये भगवान मेरे लिये कुछ कर ही नहीं रहा है? नहीं भाई, भगवान कर रहा है, walk in faith. विश्वास के साथ आगे बढ़ो, ओ.के।

बहोत बार ऐसा होता है मैं देखता हूँ, अरे, दो कदम चलो भाई, सिर्फ दो कदम तुम आ जाओगे नहीं, दो कदम चलने के पहले ही दो कदम की भी, दो कदम की सबूरी भी हमारे पास नहीं होती। तो ये न होने के लिये इन तीन चक्रों का सहाय, परस्पर सहाय बहोत आवश्यक है और ये हमें रामनाम रामनाम वही से मिलता हैं, राईट।

अब ढाई मिनीट में एक पेज लिखते हैं, राईट। समझिये अगर हम लोगों ने हर रोज दस पेज लिखे होते तो हमारी १९९ बुक्स हो जातीं। दस पेजस लिखने के लिये कितना टाईम लगेगा? बीस मिनट। समझो हफ्ते में एक बार बैठिये दो घंटा तो, तो भी हो जाती मान लिया। लेकिन हररोज एक पेज तो हम लोग लिख सकते हैं, राईट और ये लिखना आवश्यक है, क्योंकि हमारे पास इतनी शुद्धता नहीं होती। अपने जीवन के हर पल में जितनी धारणा चाहिये आप के पास, जितना आत्मविश्वास चाहिये, उतना नहीं होता, जितना पावित्र्य चाहिये उतना नहीं होता। आप पवित्र कार्य कर रहे हैं, फिर भी साथ में कौन है, आप जानते नहीं। ये इस समय पर हमें जानना चाहिये, इसी लिये हमें क्या चाहिये? हमारा मूलाधार चक्र यानी आहार, विहार, आचार, विचार ये जो चार पंखुडियां हैं, ये शुद्ध रहें, हमारा जल यानी जो जीवन की मूलभूत आवश्यकता है ओ.के। इस से इलेक्ट्रीसीटी बनती है, विद्युत् शक्ति बनती है, आगे हम लोग विद्युत् शक्ति भी देखने वाले हैं। ये सब जो अच्छा है ये प्राणाग्नि है, यानी हमारी कार्यशक्ति हैं। प्राणाग्नि यानी हमारी कार्य करने की कॉंपीटन्सी और पोटन्सी ओ.के। कार्यशक्ति यानी क्या? हमारी कॉंपीटन्सी और पोटन्सी, हमारी क्षमता, सक्षमता और कुशलता हमें इन तीन चक्रों के परस्पर सहायसे मिलती है।

‘रामनाम ही का कम से कम एक पन्ना प्रतिदिन लिखिए’ इस बारे में हमारे सद्गुरु श्री अनिरुद्ध ने प्रवचन में बताया, जो आप इस व्हिडिओ में देख सकते हैं।

ll हरि: ॐ ll ll श्रीराम ll ll अंबज्ञ ll

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