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श्रीमांदार गणेशजी का स्वागत (Welcoming Mandar Ganesh)

श्रीमांदार गणेश जी का स्वागत Welcoming Mandar Ganesh)

 
श्रीमांदार गणेश जी का स्वागत


श्रीमांदार गणेश अत्यंत सिद्ध एवं स्वयंभू गणेशजी का स्वरूप है | इसे श्रीमांदार गणेश या श्रीमूलार्क गणेश या  श्रीश्वेतार्क गणेश भी कहा जाता है | ऐसे श्रीमांदार गणेशजी के स्वागत के लिए / स्थापना के लिए जरुरी वेदोक्त विधियां साम्प्रत श्रीअनिरुद्ध गुरुक्षेत्रम्‌ में हो रही हैं | आम तौर पर मार्केट में / अन्यत्र इसके स्वरूप जैसी कई मूर्तियाँ दिखाई देती हैं; पर वे बनाई हुई या नक्काशी हुई होती हैं | प्राकृतिक / कुदरती स्थिति में सिद्ध एवं स्वयंभू स्वरूप का श्रीमूलार्क गणेश बहुत ही दुर्लभ बात है |

मांदार के पेड़ की कई प्रजातियाँ हैं | उनमें से कुछ हैं नील मांदार, श्वेत मांदार | नील मांदार सर्वत्र उपलब्ध होता है और श्रीगणेशजी की पूजा में तथा शनिवार को श्रीहनुमानजी की पूजा में इसका उपयोग किया जाता है | श्वेत मांदार अर्थात मांदार का पेड़ सिद्ध स्थान पर ही दिखाई देता है और इसका उपयोग बहुत ही पवित्र पूजाओं में किया जाता है | शिवजी को इस श्वेत मांदार के फूल बहुत प्रिय हैं | मांदार के पेड़ को नील मांदार या श्वेत मांदार उसके फूलों के अनुसार संबोधित किया जाता है | 

ऐसे श्वेत मांदार के पेड़ की जड़ों में श्रीमांदार गणेशजी की प्राप्ति होती है | सामान्यतः २१ से २५ साल की आयु के पेड़ की जड़ों में परिपूर्ण स्वरूप में गणेशजी का स्वरूप दिखाई देने लगता है | जिस पेड़ की जड़ों में ऐसे श्रीमांदार गणेशजी होते हैं वह पेड़ नित्य तेजोमय और पुष्पयुक्त होता है अर्थात उसका स्वरूप अत्यंत विशेषतापूर्ण होता है | 


श्रीमांदार गणेश जी का स्वागत

श्रीमांदार गणेश जी का स्वागत
ऐसे पेड़ का परिक्षण करके तथा विशिष्ट विधियाँ संपन्न करके पूर्णिमा या मंगलवार या गुरुवार के दिन आनेवाली संकष्ट चतुर्थी की रात की चांदनी में चंद्रोदय के बाद तीन घटिकाओं के भीतर मूर्ती बाहर निकाली जाती है | 


श्रीमांदार गणेशजी की मूर्ति निकालने से २१ दिन पहले आमंत्रण एवं दिग्बन्धन विधान किया जाता है, तत्पश्चात रजत (चांदी) के अस्त्रों से श्रीमांदार गणेशजी को बाहर निकाला जाता है | ऐसा माना जाता है कि, यह विधि योग्य जानकार व्यक्ति को अधिकारी व्यक्ति के मार्गदर्शन / निगरानी में ही करनी चाहिए, अन्यथा उसके अनिष्ट या विपरीत परिणाम होते हैं |

आईये हम सब ऐसे श्रीमूलार्क गणेशजी के, श्रीमांदार गणेशजी के, श्रीश्वेतार्क गणेशजी के श्रीअनिरुद्ध गुरुक्षेत्रम्‌ में आगमन का इन्तजार करें | ४ सितम्बर के दिन अंगारिका चतुर्थी से सभी श्रद्धावान श्रीमांदार गणेशजी के दर्शनों का लाभ ले सकेंगे |


श्रीमांदार गणेश जी का स्वागत



 

श्रीमांदार गणेश जी का स्वागत


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