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ब्रह्मांड में भी सप्तचक्र हैं (The Universe also has seven chakras) – Aniruddha Bapu

परमपूज्य सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने १५ अक्तूबर २०१५ के पितृवचनम् में ‘ब्रह्मांड में भी सप्तचक्र हैं’ इस बारे में बताया।

ब्रह्मांड में भी सप्तचक्र हैं (The Universe also has seven chakras) - Aniruddha Bapu Pitruvachanam 15 Oct 2015

ब्रह्मांड में भी सप्तचक्र हैं (The Universe also has seven chakras) – Aniruddha Bapu Pitruvachanam 15 Oct 2015

श्रीशब्दध्यानयोग के बारे में पहले हमको समझ लेना चाहिए। ये है क्या? अभी आज तो सब लोग  जानते हैं, जिन लोगों ने ग्रंथ पढे हुए हैं या जिन लोगों ने कुछ नेट पर पढा है कि हर इन्सान के शरीर में ९ चक्र होते हैं। उन में से सप्तचक्र active होते हैं, कार्यरत होते हैं, कार्यशील रहते हैं और २ चक्र सुप्तावस्था में रहते हैं। तो सुप्त चक्रों के बारे मे तो मैंने ग्रंथो में बात की है। जो सप्तचक्र होते हैं, मूलाधार से लेकर सहस्रार चक्र तक, वे हर एक इन्सान के प्राणमय देह में रहते हैं।

हर एक इन्सान के पास ३ देह होते हैं। एक बाह्य देह – स्थूल देह, जिसे हम अवयव कहते हैं, इंद्रिोयां कहते हैं। दूसरा देह उसके भीतर होता है वो प्राणमय देह होता है। और प्राणमय देह के भीतर तीसरा मनोमय देह होता है। इस प्राणमय देह में ये सप्तचक्र रहते हैं।

हम लोग सोचते हैं कि बस हम मानव हैं। मानवों के ही सप्तचक्र होते हैं। येस, एक प्रकार से यह सही है। और एक प्रकार से दूसरी बाजू से देखें तो यह गलत भी है। प्राणियों में ये सप्तचक्र नहीं होते हैं। प्राणियों में सिर्फ चार चक्र होते हैं, मॅक्झीमम। मानव यही एकमात्र ऐसा प्राणि होता है, जिसमें सात चक्र होते हैं। लेकिन सप्त चक्र सिर्फ मानव में ही हैं, यह मानना गलत है। हमे जानना चाहिए कि ये सप्तचक्र और कहां होते हैं? मानव में है इसका मतलब है कि एक व्यक्ति में हैं। यानी एक पिंड में हैं। हमारे अध्यात्म, वेदों ने क्या कहा है? – व्यक्ति को पिंड कहा है। ये जो पूरी सृष्टी है उसे क्या कहा है? ब्रह्मांड यानी समष्टि। व्यक्ती, एक व्यक्ती है, विश्व को समष्टि कहते है। एक व्यक्ती को पिंड और  सृष्टी को क्या कहते हैं? ब्रह्मांड कहते हैं। सृष्टी यानी जो भी अस्तित्व में है। ऐसे अनंत कोटी ब्रम्हांड है। हमारा ब्रम्हांड है जिसमें हम रहते है। तो हमे जानना चाहिए व्यक्ती मे अगर सप्तचक्र है, पिंड में अगर सप्तचक्र है, तो समस्त ब्रम्हांड में भी सप्तचक्र होने चाहिए।

हमारे वेदों और उपनिषदों में क्या कहा है? ‘जे जे पिंडी ते ते ब्रम्हांडी।’ जो पिंड में है वही ब्रह्माण्ड में भी है। जो व्यक्ती में है वही समष्टि में भी है। जो ब्रह्माण्ड में है वही व्यक्ती में है। इसका मतलब है अगर हमारे देह में सप्तचक्र है तो इस ब्रह्माण्ड में भी सप्तचक्र हैं। ब्रह्मांड में भी सप्तचक्र होते हैं’, इस बारे में हमारे सद्गुरु अनिरुद्ध बापू ने पितृवचनम् में बताया, जो आप इस व्हिडिओ में देख सकते हैं।

॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥ ॥ अंबज्ञ ॥

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