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विश्‍व का रहस्य त्रिविक्रम – π (Pi)

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पिछले कुछ हफ्तोंसें परमपूज्य बापूजीके प्रवचन ’ॐ रामवरदायिनी श्रीमहिषासुरमर्दिन्यै नम:l” इस श्रीअनिरुध्द गुरुक्षेत्रम्‌ मंत्र कें, अंकुरमंत्र भागकें तिसरें पद पर चालू हैंl

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इस प्रवचन अंतर्गत बापूने हमें परमेश्‍वरी सूत्र (algorithms) और शुभचिन्हों कीं पहचान करा दीl इन सूत्रोंके अंतर्गत बापूने हमें, स्कंदचिन्ह, स्वस्तिक, सृष्टी के सूर्य – चंद्र, दीप, आरती, इत्यादी अनेक algorithms की विस्तृत जानकारी दीl

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Pi π

उसके बाद जुलै के महिनें में बापू ने उनके प्रवचन की शुरुआत करते ही कहा की, “आज हमें विश्‍व का बहोत बडा रहस्य देखना हैं” और प्रवचन में बापूने प्रश्‍न किया की, गणित में Pi (п) यह constant (स्थिरांक) कैसे निर्माण हुआ?” फिर उसका जवाब समझाते समय कहा की Pi (п) यह स्थिरांक सृष्टी में कभी भी बदलता नही और यह स्थिरांक यानेकी वर्तुलका दायरा (घेरा) भागफल व्यास (चौडाई) यह होता है. यह कहते वक्त इसका संबंध हनुमानजी सें कैसा हैं, इस हनुमानजींका इस वर्तुल सें  कैसा संबंध है यह समझाते हुए श्रीमारुती स्तोत्र कें “ब्रह्मांडाभोंवते वेढे वज्रपुच्छें करूं शके” इस ओवी का जिक्र करते कहाl यह हनुमानजी कें पुच्छ का वर्तुलाकृति ब्रम्हांड को हमेशाहीं रहता है यह भी बापूनें स्पष्ट कियाl

पिछलें प्रवचन में यानें की, ८ ऑगस्ट २०१३ कें प्रवचन में बापूनें π (Pi) इस स्थिरांक कीं ३६० दशांशतक कीमत बताईl यह कीमत पाच-पाचकें हिस्सों में (set) दिखाकर वह पाच-पाच के हिस्सों में (set) क्यों यह स्पष्टीकरण करकें बतायाl

लेकिन अनेकोंकी गलत फैमि रहती की २२/७ यह Pi (π) की अचूक कीमत (exact value) हैंl पर ऎसा न होकर Pi (π) यह एक स्थिरांक हैl ’Pi or Π is an irrational number, which means that it cannot be expressed exactly as a ratio of any two integers. Fractions such as 22/7 are commonly used as an approximation of Π; no fraction can be its exact value.’ गणितज्ञो ने आजतक दशांश चिन्ह कें आगे पाच दशलक्ष अकोंतक π (Pi) की कीमत ढूढली हैl

बापू, त्रिविक्रम, Pi, π, विश्वाचे रहस्य, 22/7, अनिरुद्ध, अनिरुद्ध बापूभारतीय अध्यात्म शास्त्र में Pi (π) ही अभिधान, त्रिपुराती त्रिविक्रम चिन्हसें दर्शाई जाती हैंl यह बापूनें स्पष्ट कियाl यह स्पष्ट करते समय बापूनें आगें कहा की, “इस ब्रम्हांड का यानिं की आदिमातानें निर्माण किए हुए विश्‍व का विस्तार संतुलित हैl उसकी कक्षा (limit)  हनुमानजी हैं, इसिलिए वह प्रथमपुत्र (दत्तात्रेय स्वरुप शुभ्रप्रकाश) है और इस ब्रम्हांड का व्यास यह त्रिविक्रम (हरिहर) मतलब महाविष्णु और परमशिव एकत्रित; श्रीराम और हनुमानजीं एकत्रित, शौर्य और क्षमा एकत्रित ऎसा हैl

२२/७ यह गणितीसंख्या यह π (Pi) की approximation यानें की अंदाजसें कीमत हैंl मतलब भौतिक जगतकें सामान्य गणित में वह उस प्रकारसे इस्तमाल की जाती हैl

बापूनें  जैसें बताया की त्रिविक्रम अनंत होनेके कारण Pi (π) इस गणित संज्ञाकीं exact कीमत निकालना मुमकीन नही हैl

Published at Mumbai, Maharashtra – India

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