Trivikram

Bapu said that in the Indian spiritual studies the concept of Pi (п) is represented by the Tripurari Trivikram symbol. Explaining it further He said, “The expanse of the cosmos (the Brahmaanda), i.e. of the universe created by the Aadimata is well-balanced. Shree Hanumanta signifies its limit and so He is the first son (Dattatreya, the sacred white light). The diameter of the cosmos is the Trivikram (Harihar) in other words Mahavishnu and Paramshiva together; Shreeram and Hanumant together; valour and forgiveness together.

The mathematical figure of 22/7 is but an approximation of Pi (п). It is the estimated value of Pi (п) and the world uses it thus in the field of mathematics.

Like Bapu told us, the Trivikram is infinite and so it is just impossible to work out the exact value of the mathematical expression of Pi (п).

Published at Mumbai, Maharashtra – India

Hari Om Shreeram Ambadnya

Instagram-Image

Hari Om, I am glad to inform you that we have started Instagram handle of Aniruddha Devotion Sentience website. The front page of the site quotes Bapu saying, “To remain in Devotion Sentience is indeed the one supreme and ultimate purpose of life.” The handle will help Shraddhavans to realise this saying as its an extension to connect with the Aniruddha Devotion Sentience website and to our beloved, the Supreme

Aniruddha TV

हरि ॐ, हमने पहले भेजी हुई सूचना के अनुसार, हर गुरुवार शाम ८:०० बजे गुरुवार की नित्य उपासना, श्रीस्वस्तिक्षेम संवाद तथा आरती एवं दर्शन और हर शनिवार शाम ७:३० बजे अनिरुद्ध उपासना (मराठी, हिन्दी एवं अँग्रेज़ी भाषा में), श्रीस्वस्तिक्षेम संवाद तथा अभंग aniruddha.tv के माध्यम से हम दिखा ही रहे हैं। उसी के साथ, आज से गुरुवार एवं शनिवार के अलावा हर दिन शाम ८:०० बजे हम विभिन्न स्तोत्र एवं

Aniruddha Gurukshetram

हरि ॐ, शनिवार, दि. ०७ मार्च २०२० को संस्था ने, फिलहाल दुनियाभर में तेज़ी से फ़ैल रहे कोरोना वायरस, “कोविद – १९” के सिलसिले में श्रद्धावानों को एक महत्त्वपूर्ण सूचना भेजी थी; जिसमें सावधानता और जागरूकता के उपाय के रूप में, हर गुरुवार श्रीहरिगुरुग्राम में होनेवाली और शनिवार को विभिन्न स्थानों पर उपासना केंद्रों में होनेवाली सामूहिक उपासना, अगली सूचना मिलने तक बंद रखने का निर्णय सूचित किया था। इसी

'अनिरुद्ध भक्तिभाव चैतन्य' महासत्संग समारोह के व्हिडीओज्‌ संबंधी सूचना

  हरि ॐ, अनिरुद्ध भक्तिभाव चैतन्य – महासत्संग समारोह के पश्चात् श्रद्धावान आतुरता से प्रतीक्षा कर रहे थे, इस समारोह के व्हिडीओज्‌ की। श्रद्धावानों की इस माँग को मद्देनज़र रखते हुए ९ फ़रवरी को हमने महासत्संग के पहले सत्र (सेशन) के व्हिडीओज्‌ अपनी www.aniruddha-devotionsentience.com इस वेबसाईट पर उपलब्ध करा दिए हैं। ये व्हिडीओज्‌ सबके लिए खुले तथा विनामूल्य हैं। फिर भी, ऐसा ज्ञात हुआ है कि कुछ लोग ये व्हिडीओज्‌

आप कभी भी अकेले नहीं हैं, त्रिविक्रम आपके साथ है

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध ने ४ फरवरी २०१६ के प्रवचन में ‘आप कभी भी अकेले नहीं हैं, त्रिविक्रम आपके साथ है (You Are Never Alone, Trivikram Is With You)’ इस बारे में बताया।   आप बोलेंगे बापू किसकी भक्ति करें हम लोग? किसी भी, किसी भी रूप की भक्ति कीजिये। मैंने कभी नहीं कहा कि इसी की भक्ति करो। मैं इसे माँ चण्डिका, माँ जगदंबा बोलता हूँ, आप दूसरे किसी की उपासना

श्रीत्रिविक्रम भक्तिभाव चैतन्य का सहज, सुंदर और उत्स्फूर्त आविष्कार

स्वयंभगवान श्रीत्रिविक्रम के सार्वभौम मंत्रगजर के कारण हमारे मन में भक्तिभाव चैतन्य सहजता से प्रवाहित होता है। सद्गुरु श्रीअनिरुद्धजी ने हमें इस गजर के ताल पर डोलने के लिए कहा है। इस व्हिडियो में दिखायी देनेवाले इस बालक का सहज प्रतिसाद (Natural Reaction), यह उस मंत्रगजर के साथ डोलने का है। उसे डोलने के लिए कहा नहीं गया था। इसीसे यह स्पष्ट होता है कि बापू के कहेनुसार हर एक

त्रिविक्रम मठ स्थापना

माता जगदंबा और सद्‍गुरु श्रीअनिरुद्ध के कृपाशीर्वाद से, श्रावणी सोमवार के मंगल दिन, यानी दिनांक ३ सितम्बर २०१८ को, पुणे तथा वडोदरा में स्थापित होनेवाले त्रिविक्रम मठों के लिए शंख, ताम्हन, पीतांबर, तीर्थपात्र एवं तसवीरें श्रीअनिरुद्ध गुरुक्षेत्रम्‌ में प्रदान की गयीं। अत्यंत भक्तिमय, प्रसन्न और हर्षोल्लासपूर्ण वातावरण में, संस्था के महाधर्मवर्मन डॉ. योगींद्रसिंह तथा डॉ. विशाखावीरा जोशी के हाथों, ये आध्यात्मिक चीज़ें त्रिविक्रम मठ के लिए श्रद्धावानों को सुपुर्द की

त्रिविक्रम मठ स्थापना

आई जगदंबा व सद्‍गुरु श्रीअनिरुद्धांच्या कृपाशिर्वादाने, श्रावणी सोमवारच्या मंगल दिनी, म्हणजेच दिनांक ३ सप्टेंबर २०१८ रोजी, पुणे व वडोदरा येथे स्थापन होणार्‍या त्रिविक्रम मठासाठी शंख, ताम्हन, पीतांबर, तीर्थपात्र व तसबिरी श्रीअनिरुद्ध गुरुक्षेत्रम्‌ येथून देण्यात आल्या. अत्यंत भक्तिमय, प्रसन्न व जल्लोषपूर्ण वातावरणात, संस्थेचे महाधर्मवर्मन डॉ. योगींद्रसिंह व डॉ. विशाखावीरा जोशी यांच्या हस्ते या आध्यात्मिक गोष्टी त्रिविक्रम मठासाठी श्रद्धावानांकडे सुपूर्द करण्यात आल्या. ह्या सोहळ्यादरम्यान पुण्याहून सुमारे ६५ श्रद्धावान व वडोदरा येथून सुमारे

स्वयंभगवान त्रिविक्रम के अठारह वचन

कल गुरुवार २ अगस्त २०१८ के दिन श्रीहरिगुरुग्राम में बापू ने, अत्यधिक महत्त्वपूर्ण ‘स्वयंभगवान त्रिविक्रम के अठारह वचनों’ के बारे में बताया। हम इन वचनों का लाभ गुरुवार १६/०८/२०१८ को बापू के साथ ले पायेंगे। इसी के साथ बापू ने ‘स्वयंभगवान त्रिविक्रम’ का गजर शारण्य तथा आनंद भाव से कैसे करना है इसके बारे मे भी बताया है। इसकी वीड़ियो क्लिप मैं blog तथा WhatsApp और YouTube पर अपलोड़ कर

स्वयंभगवान त्रिविक्रम

आज गुरुवार दि. २६-०४-२०१८ रोजी प्रकाशित झालेल्या ‘दैनिक प्रत्यक्ष’मधील ‘तुलसीपत्र-१४८६’ ह्या अग्रलेखामध्ये, ‘स्वयंभगवान त्रिविक्रम’ प्रथमच प्रकट झाल्याचे वर्णन केले गेले आहे, तेच हे ‘महासाकेत’ ह्या सर्वोच्च स्थानावर स्थित ‘स्वयंभगवान त्रिविक्रमा’चे स्वरूप. आज गुरुवार दि. २६-०४-२०१८ को ‘दैनिक प्रत्यक्ष’ में प्रकाशित हुए ‘तुलसीपत्र-१४८६’ इस अग्रलेख में, ‘स्वयंभगवान त्रिविक्रम’ के पहली ही बार प्रकट होने का वर्णन किया गया है। यही वह ‘महासाकेत’ इस सर्वोच्च स्थान पर स्थित ‘स्वयंभगवान त्रिविक्रम’ का स्वरूप।