Thursday Pravachan

तुमचा विश्वास मजबूत करा (Make your faith stronger)

सद्गुरू श्री अनिरुद्ध बापूंनी त्यांच्या २४ जुलै २०१४ च्या मराठी प्रवचनात ‘तुमचा विश्वास मजबूत करा’ याबाबत सांगितले.   आता तुम्ही म्हणाल, बापू आम्ही faith ठेवायचा म्हणजे काय? विश्वास ठेवायचा म्हणजे काय? हा आम्हाला प्रश्न पडतो. बापू आम्ही साधी माणसं आहोत. आमचा कधी कधी विश्वास डळमळीत होतो हो! मला एक सांगा, जर हे तुम्हाला कळतं, तर मला कळत नाही का? बरोबर? म्हणजे तुमचा विश्वास डळमळीत होऊ शकतो. तुमची भक्ती थोडीफार weak

विश्वास आणि जबाबदारी  (Faith and Responsibility)

सद्गुरू श्री अनिरुद्ध बापूंनी त्यांच्या २४ जुलै २०१४ च्या मराठी प्रवचनात ‘विश्वास आणि जबाबदारी’ याबाबत सांगितले.   विश्वास ठेवा! विश्वास ठेवा कि तुम्ही विश्वास ठेवलात कि तो सगळं करु शकतो, सगळं करु शकतो. कुठल्या मार्गाने करेल हे तुम्हाला माहित नाही. त्यांचे मार्ग त्यांना माहिती असतील. Why should we bother for it. मी का म्हणून काळजी करायची. अगदी वादळात सापडला आहात. चारही बाजूंनी समजा चारही समुद्र सगळ्या जगाचे समुद्र तुमच्या अंगावर

खुद के कंधे पर खुद का सर होना चाहिये (Should be the head of self on own shoulder)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ९ अक्तुबर २०१४ के प्रवचन में ‘खुद के कंधे पर खुद का सर होना चाहिये’ इस बारे में बताया।   खुद के जिंदगी में इसलिये सिर्फ ये सिखो, कि बाबा जो है वो क्या करता है हमारी अच्छी मूरत बनाना चाहता है। लेकिन हमारा पाषाण जो है, हमारा पत्थर जो है, जब हम लोग सोचेंगे, कि बाबा चाहे तो आप छिन्नी उठाओ, बाबा आप चाहे

हमारी हर एक की अपनी अपनी क्षमता होती है (We All Have Our Own Abilities)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ९ अक्तूबर २०१४ के प्रवचन में ‘हमारी हर एक की अपनी अपनी क्षमता होती है’ इस बारे में बताया।   पहले inter science था, अभी तो उसके बाद में, बहुत सालों के बाद, १२वीं आयी, inter-science के बाद, मतलब १२वीं के बाद समझो, 12th के बाद, एक तो बच्चे मेडिकल में जायेंगे, engineering में जायेंगे तो सिर्फ कौन से, तो इलेक्ट्रिकल, mechanical, उसके बाद में

प्रार्थना ही हमारे सामर्थ्य का स्रोत है (The Prayer is the source of our strength)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २७ मार्च २०१४ के प्रवचन में ‘प्रार्थना ही हमारे सामर्थ्य का स्त्रोत है’ इस बारे में बताया। हमारे लिये जो आवश्यक है जितनी प्रार्थना, उतनी प्रार्थना वो हमे जरूर देगा। दर-दर जाकर भीक माँगने की आवश्यकता नहीं है। मेरा बाप जो है उसने हमें जनम देते समय जो इस्टेट दी है हमें, उसपर पूरा जनम चल रहा है। right? दिन में कितनी बार हार्ट बीट्स

साईनाथ अपने भक्त को अपने समीप खींच लेते हैं  (Sainath pulls His devotee closer to him)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २७ मार्च २०१४ के प्रवचन में ‘साईनाथ अपने भक्त को अपने समीप खींच लेते हैं’ इस बारे में बताया। हम मंदिर में जाते हैं, जरुर! ये इच्छा कैसे उत्पन्न हुई? बाबा की इच्छा ना हो, बाबा के मंदिर में या बाबा के पास, कभी नहीं जा सकते, ये पूरा भरोसा रखो। बाबा ने सौ बार बोला है साईचरित्र में कि मेरी इच्छा के बिना कोई

भगवान को एक प्यारी सी स्माईल दो (Give The Lord your warm smile)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २७ मार्च २०१४ के प्रवचन में ‘भगवान को एक प्यारी सी स्माईल दो’ इस बारे में बताया। सो पहले जान लें कि इस स्थान पर हम लोग बाबा की उपासना करने को आये हैं, इसका मतलब है यहां बाबा हैं। तो पहले स्माईल देना, ये क्या है, हमारा कर्तव्य है। भगवान को सुबह उठने के बाद भी, उसका चित्र हमारे सामने रहेगा, तो पहले give

प्रत्येक जण स्वत:ची लढाई लढत असतो  (Everyone is fighting their own battle)

परमपूज्य सद्गुरू श्री अनिरुद्ध बापूंनी त्यांच्या २२ जानेवारी २०१५ च्या मराठी प्रवचनात ‘प्रत्येक जण स्वत:ची लढाई लढत असतो’ याबाबत सांगितले.   पण आम्हाला एक मात्र नीट कळावं लागतं की प्रयास कुठवर करायचे आणि कुठे थांबवायचे, हे आपल्याला कुठेतरी निर्णय घ्यावाच लागतो. नाहीतर शेवटी लक्षात घ्या, प्रत्येकाचं जीवन शेवटी स्वतंत्र आहे. आपण कुटुंबाच्या नात्याने, मित्रत्वाच्या नात्याने आपण आपल्या धर्माच्या नात्याने, समाजाच्या नात्याने जोडलेले जरुर असू, पण मग बाकीचे हजारो लाखो लोक

सारे भय ये मूलत: भ्रम हैं (All the fears are basically delusions)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने १५ मई २०१४ के पितृवचनम् में ‘सारे भय ये मूलत: भ्रम हैं’ इस बारे में बताया।   मैंने ये किया इसलिये भगवान ने ये किया, इस विश्वास पर अगर कभी जाओगे तो आप कहां जाओगे, गलत दिशा में जाओगे। डेव्हिल की दिशा में जाओगे, शैतान की दिशा में जाओगे। फिर वहां कारोबार ऐसे ही चलता है, लेनेदेन का। तुमने ये तंत्र मंत्र किया तो डेव्हिल

अंबज्ञ रहना बहुत आवश्यक है (It is necessary to stay Ambadnya)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धने १५ मई २०१४ के पितृवचनम् में ‘अंबज्ञ रहना बहुत आवश्यक है’ इस बारे में बताया।   बात देखिये क्या है? कि ये भगवान का तरीका है अपने बच्चों के लिये सबकुछ वो Ready to cook. आजकल आते हैं ना पार्सल्स, ready to cook आते हैं ना, so that is what is His strategy, Ready to cook लेकिन आप लोग सोचिये वो निकाल के मैं ऐसे ही खा

जन्म और मृत्यु ये भी हमारे लिए बडे संदर्भ-बिन्दु हैं

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धने १५ मई २०१४ के पितृवचनम् में ‘जन्म और मृत्यु ये भी हमारे लिए बडे संदर्भ-बिन्दु हैं(The Birth and The Death are also the biggest reference points for us)’ इस बारे में बताया। हमारे जन्म और मृत्यु भी क्या है? They are two biggest reference points. ये संदर्भ-बिन्दु हैं। जन्म मृत्यु क्या होते हैं? संदर्भ-बिन्दु हैं, that is not a frame of reference. ये संदर्भ-बिन्दु हैं। ये कैसे

‘ रामनामतनु ’चा अर्थ (The Meaning of `Ramnamtanu')

परमपूज्य सद्गुरू श्री अनिरुद्ध बापूंनी त्यांच्या १५ मे २०१४च्या मराठी प्रवचनात ‘ रामनामतनु ’च्या अर्थाबाबत सांगितले. त्रिविक्रमाचं काम सांगणारा हा मंत्र आहे, तो कसा आहे? तो रामनामतनु आहे. तो कसा आहे? राम नाम आणि तनु. बघा, तनु म्हणजे काय? तनु म्हणजे शरीर. नाम म्हणजे काय? नाम म्हणजे नाम ना साधं, पण नाम काय आहे? इकडे आपण बघितलं तनु, प्राण आणि काल ह्या दोन गोष्टी आहेत, मग इकडे नाम म्हणजे काय?

इन्द्र-शक्ति (Indra-Shakti) - Aniruddha Bapu

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध ने ६ मार्च २०१४ के पितृवचनम् में ‘ इन्द्र-शक्ति ’ के बारे में बताया। नीचे से गंदा पानी ऊपर लेके जाना, ऊपर रख देना, ऊपर रखते हुए भी नीचे फेंक देना, नीचे दे देना, वो भी without any charge. ये एक ही साथ तीन पैर चलनेवाला, तीन कदम चलनेवाला, ये त्रिविक्रम है और ये जल की शक्ति सारी उसी की है। और उसका जो मंत्र है, ‘त्रातारं इन्द्रं अवितारं

त्रिविक्रम एकसाथ तीन कदम चलते हैं  (Trivikram walks 3 steps at a time) - Aniruddha Bapu

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध ने ६ मार्च २०१४ के पितृवचनम् में ‘त्रिविक्रम एकसाथ तीन कदम चलते हैं’ इस बारे में बताया। जल जो है इस पृथ्वी पर, पृथ्वी के अंतरिक्ष में हो या पृथ्वी पर हो, कुए में हो या नदी में हो या सागर में हो, आपके बदन में हो, कहीं भी हो, ये जल जितना बना पहले, उतना ही है। करोडों करोडों साल पहले जितना जल बना, वही, उतना

भगवान का प्यार हमें बदल देता है (God's love changes us)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्धने ३० जनवरी २०१४ के पितृवचनम् में ‘भगवान का प्यार हमें बदल देता है’ इस बारे में बताया। अपनापन चाहिये। अपनापन कब टिकता है? जब हम सोचते हैं कि जिससे मैं प्रेम करता हूँ, उसने मेरे लिये क्या किया है और हम गिनती बंद कर देते हैं । यह सोचोगे कि मैंने क्या किया है, तभी ध्यान में आयेगा कि ९९ चीज उसने दी है, एक चीज नहीं