Thursday Pravachan

रामनाम बही का कम से कम एक पन्ना प्रतिदिन लिखिए - ०२

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २० अप्रैल २०१७ के प्रवचन में ‘रामनाम बही का कम से कम एक पन्ना प्रतिदिन लिखिए’ (Write at least one page of Ramnaam book daily – 02) इस बारे में बताया।   स्वाधिष्ठान चक्र क्या देता है? फाऊंडेशन फ़ॉर्म करता है। फाऊंडेशन यानी हिंदी में क्या कहेंगे? पाया मराठी में कहते हैं, हिंदी में? नींव रखते हैं, नींव। तो मूलाधार चक्र हर चीज की नींव

मणिपुर चक्र और रामनाम बही (Manipur Chakra And Ramnaam Book)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २० अप्रैल २०१७ के प्रवचन में ‘मणिपुर चक्र और रामनाम बही (Manipur Chakra And Ramnaam Book)’ इस बारे में बताया।   ये मणिपुर चक्र जो है, ये इन्सान के लिये, मूलाधार चक्र, स्वाधिष्ठान चक्र, मणिपुर चक्र, ये बहोत, बहोत, बहोत आवश्यक हैं, इनकी उपासना होनी चाहिए। इसका मतलब ये नहीं की अनाहत चक्र, विशुद्ध चक्र और आज्ञा चक्र कुछ काम के नहीं, हैं ही काम

रामनाम बही का कम से कम एक पन्ना प्रतिदिन लिखिए

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २० अप्रैल २०१७ के प्रवचन में ‘रामनाम बही का कम से कम एक पन्ना प्रतिदिन लिखिए (Write at least one page of Ramnaam book daily)’ इस बारे में बताया।   रामनाम बही का यही महत्व है, उस में जो नाम हैं, राम, कृष्ण जो भी दिये हुए हैं जो मंत्र, ये सब क्या करते हैं? हमारे इन तीन चक्रों की, मणिपूर चक्र, स्वाधिष्ठान चक्र, मूलाधार

मणिपुर चक्र और प्राणाग्नि - भाग २

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २० अप्रैल २०१७ के प्रवचन में ‘मणिपुर चक्र और प्राणाग्नि (Manipur Chakra And Pranagni – Part 2)’ इस बारे में बताया।   रात जो है, नींद जो है, वह भी एक मृत्यु ही है। वैसे ही दूसरे एक मृत्यु की, मृत्यु का प्रकार रहता है यानी कि देखिये हम लोग कुछ काम कर रहे हैं, वह कार्य पूर्ण हो गया, ओ.के। आपने समझो एक घर

मणिपुर चक्र और प्राणाग्नि   (Manipur Chakra And Pranagni)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २० अप्रैल २०१७ के प्रवचन में ‘मणिपुर चक्र और प्राणाग्नि (Manipur Chakra And Pranagni)’ इस बारे में बताया।   तो ये बात जान लीजिये और ये जो प्राणाग्नि हैं जो शांत हो जाता हैं यहां, वहीं प्राणाग्नि वहाँ चेतनामय हो जाता है। यानी एक आदमी श्रद्धावान यहां मृत हो गया तो उसके देह में जो प्राणाग्नि है वो शांत हो गया। जब ये लिंगदेह भर्गलोक

अग्नि का महत्त्व (The Importance of Agni)

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २० अप्रैल २०१७ के प्रवचन में ‘अग्नि के महत्त्व(The Importance of Agni)’ के बारे में बताया।   हम लोगों ने, जिन लोगों ने ग्रंथ पढ़े हुए हैं, जानते हैं कि तीन प्रकार के अग्नि हमारे शरीर में, देह में होते हैं। कौन से, कौन से? जाठराग्नि, प्राणाग्नि और ज्ञानाग्नि। जाठराग्नि यानी सिर्फ जठर में यानी पेट में रहनेवाला अग्नि नहीं, जिसे हमें भूख लगती हैं।

मणिपुर चक्र और यज्ञपुरुष महाविष्णु

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने २० अप्रैल २०१७ के प्रवचन में ‘मणिपुर चक्र और यज्ञपुरुष महाविष्णु (Manipur Chakra And Yagyapurusha Mahavishnu)’ इस बारे में बताया।   so, स्वाधिष्ठानचक्र का बीज था ‘ॐ वं’, अभी हम लोग देखनेवाले हैं मणिपुर चक्र। स्वाधिष्ठानचक्र का बीज ‘वं’ ये बेसिक वरूण का है यानी वृष्टिदाता का हैं, राईट। अभी ये जो चक्र है मणिपुर चक्र, ये मणिपुर चक्र बहोत अजीब चक्र है, बहोत ही,

आप कभी भी अकेले नहीं हैं, त्रिविक्रम आपके साथ है

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध ने ४ फरवरी २०१६ के प्रवचन में ‘आप कभी भी अकेले नहीं हैं, त्रिविक्रम आपके साथ है (You Are Never Alone, Trivikram Is With You)’ इस बारे में बताया।   आप बोलेंगे बापू किसकी भक्ति करें हम लोग? किसी भी, किसी भी रूप की भक्ति कीजिये। मैंने कभी नहीं कहा कि इसी की भक्ति करो। मैं इसे माँ चण्डिका, माँ जगदंबा बोलता हूँ, आप दूसरे किसी की उपासना

मूलाधार चक्र का लम् बीज और भक्तमाता जानकी - भाग १

सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ४ फरवरी २०१६ के प्रवचन में ‘मूलाधार चक्र का ‘लम्’ बीज और भक्तमाता जानकी (Lam beej of the Mooladhara Chakra and Bhakta-Mata Janaki – Part 1) ’ इस बारे में बताया। ये मूलाधार चक्र की बात हम लोग कर रहे हैं। मूलाधार चक्र में बीज है – ‘ॐ लं’ – ‘लं’ ‘लं’ ये बीज है। ‘लं’ ये पृथ्वीबीज है, ‘लं’ ये इंद्रबीज है ये हम लोगों

स्तोत्र-सूक्ते भक्तीपूर्वक म्हणावीत (Chant the hymns with devotion)

सद्गुरू श्री श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या २८ मे २०१५ च्या मराठी  प्रवचनात ‘स्तोत्र-सूक्ते भक्तीपूर्वक म्हणावीत’ याबाबत सांगितले. तर आपण म्हणतो ना मनाला स्पर्श करणं सगळ्यात महत्वाच असतं आणि हे श्रीसूक्त जे आहे ना, हे मनाला स्पर्श करते मानवांच्या. महालक्ष्मीचं आणि लक्ष्मीचं ह्या माय लेकींचं एकत्रित असणारे सूक्त जे आहे, ते आपल्या मनाला स्पर्श करतो, अगदी अर्थ नाही कळला ना, तरीदेखील करतच. बापू! असं कसं? अर्थ कळलाच पाहिजे. हो! मी अर्थावर बोलतो़च आहे. सगळे अर्थ