Social Media

As we all know that from past many years Sadguru Aniruddha Bapu has been elaborating on the importance of Social Media in today’s times. The New Year Issue of Dainik Pratyaksha of the year 2014 was completely dedicated to the very topics of Social Media titled “Social Media – Mature and Appropriate Use”. In the Agralekh of this issue, along with other topics Bapu had specifically mentioned about use of ‘Twitter’ and it’s increasing influence in the present times. An altogether separate article on ‘Twitter’ was also published in the same special issue.

Around three months ago I too have actively joined ‘Twitter’ and I share my thoughts on various subjects on a regular basis through it. My twitter handle is @samirsinh189 – https://twitter.com/samirsinh189. In today’s modern times ‘Twitter’ has become one of the best and fastest medium toconnect with the world and current happenings. To help Shraddhavans adapt with the changing times and for their convenience Sanstha had organized a seminar on ‘Twitter’ on Friday, 25th December, 2015. It gives me pleasure to say that post this seminar many of our Shraddhavans have joined ‘Twitter’.

वेबसाईट की विशेषताएं- भाग ४

फोटो गॅलरी वेबसाईट को और आकर्षक बनाने के लिये हम इस में फोटोज् अ‍ॅड कर सकते है। इसके लिये हम एक और पेज अ‍ॅड करेंगे। लेकीन इस पेज का अलगपन कायम रखने के लिये इस पर सिर्फ फोटोज् होना जरूरी है। पेज पर फोटोज् अपलोड करने के लिये बांई ओ की सेटिंग पॅनल के ‘गॅलरी’ ऑप्शन को ‘ड्रॅग अ‍ॅण्ड ड्रॉप’ से पेज पर लाये। इसके बाद पहले की तरह इमेजेस

वेबसाईट बनाने की जानकारी - भाग ३

टेम्प्लेट मतलब रेडिमेड डिझाईन्स. वेबसाईट का पेहराव….‘लूक ऍण्ड फिल’। रेडी टू युज। इस में पेज के डिझाईन तथा रंगसंयोजन, फॉन्ट इत्यादी अनेक चीज़ें पहले ही निश्चित की गई है। इस वजह से हमारा पेज डिझाईनिंग का समय बच जाता है। वैसे ही जिन्हें पेज डिझाईन करना मुश्किल लगता है उनके लिए ये टेम्पलेटस् तो किसी वरदान कम नही। टेम्प्लेट सिलेक्ट करके ‘चूझ’ बटन पर क्लिक करें। टेम्पलेट दिखाने से पहले

website

२. डोमेन (Domain) हर एक प्रांत की अलग पहचान कायम रखने के लिए, उस प्रदेश अथवा स्थान को एक नाम दिया जाता है। मतलब वह नाम उस जगह की पहचान बन जाता है। उस नाम से उसी स्थान की साधारण कल्पना सामान्य मानव कर सकता है। उसीप्रकार से विविध प्रकार के वेबसाईट की पहचान होने के लिए उनका विभाजन किया गया है। उन्हें विशेष प्रकार से नाम दिये गये है। हम

website

‘‘इंटरनेट मॉम्स की तो बात ही कुछ और है’’…..यह पंक्तियाँ हमे टिव्हीपर आनेवाली एक अ‍ॅडव्हर्टाईजमेंट मे बार बार सुनने को मिलती हैं। इसमें माँ अपने बेटे को पढा रही है। बच्चा समझता है कि मेरे subject के बारे मे मॉम को क्या पता होगा! पर उस ‘स्मार्ट मॉम’ ने इंटरनेट के जरिये पहले से ही जानकारी ले रखी थी। जब बच्चे को यह बात समझती है, तो उसके चेहेरे का

mobile hangout

२.२ गुगल हॅग आउट पर व्हिडिओ कॉल का उत्तर कैसे दें? जिस तरह हम किसी व्यक्ति को कॉल करते है तो हमे रिंग सुनायी देती हैं। उसी तरह जब हमे कोई व्हिडिओ कॉल आता है तभी अपने स्पीकर से रिंग सुनायी देती हैं और एक पॉप अप विंडो अपनी स्क्रीन पर देखायी देती हैं। हम उस विंडो पर ‘Join video call’ बटन पर क्लिक करके वो कॉल उठा सकते हैं

व्हिडिओ कॉन्फरन्सिंग - भाग ४

२ गुगल हॅन्गआउट (Google Hangout) हॅन्गआउट अर्थात ऑनलाइन मुक्त रुप से बातें करना। हॅन्गआउट, गुगल कंपनी द्वारा सभी के लिए ऑनलाइन व्हिडिओ के माध्यम से झटपट बातें करने के लिये (Instant Chat) तैयार की गयी एक मंच है। जिसका उपयोग करके हम हमारे अपने प्रियजनों को कॉमप्युटर पर देखते – देखते उनसे बातचीत कर सकते है। अपने प्रियजनों से उन्हें ऑनलाईन देखते हुये व्हिडिओ चैटिंग का आनंद कुछ और ही

Video Conferencing

१.५ स्काईप पर व्हिडिओ कॉल कैसे करें ? (How to make video call on Skype) स्काईप पर व्हिडिओ कॉल करना सरल और बिल्कुल आसान है। व्हिडिओ कॉल करने के लिये सबसे महत्वपूर्ण है हार्डवेअर। अब व्हिडिओ कॉल करने से पहले हमें यह जांच लेना चाहिये कि हमारा वेबकॉम व स्पीकर ठीक तरहसे चल रहा है या नही। अब हम देखेंगे कि अपनी कॉन्टॅक्ट लिस्ट में से अपना कौन सा मित्र

व्हिडिओ कॉन्फरन्सिंग - भाग २

१.२ स्काईप पर अपना युजरनेम कैसे बनाये। (How to create username on Skype) १. स्काईप के पूरी तरह इन्स्टॉल हो जाने के बाद जो विंडो खुलती है उस विंडो के नीचे की ओर ‘Create an account’ नाम का बटन है। नया युजरनेम बनाने के लिये इस बटन पर क्लिक करें। २. उसके बाद आपको एक विंडो दिखेगी। उस ब्राऊझर विंडो में एक फॉर्म (form) आता है। ३. इस फॉर्म को

व्हिडिओ कॉन्फरन्सिंग - भाग १

हमारे पडोस में रहने वाली चाची का लडका विगत कई वर्षो से विदेश में रहता है। जब वह विदेश गया था तो शुरआत का कुछ समय चाची के लिये काफी कठिन गुजरा। वहाँ पर उसका कौन खयाल रखेगा? वो क्या खाता होगा? इत्यादि इत्यादि अनेक चिंताओं ने चाची को घेर रखा था। इसीलिये विदेश से फोन आते ही वह उसपर प्रश्नों की झड़ी लगा दिया करती थी। उसके लिये वह

ई-मेल – भाग ५

पिछले लेख में हम ने ई-मेल की संकल्पना को समझा। ई-मेल इस्तेमाल करते समय सामनेवाले व्यक्ति से सीधे संपर्क नहीं होता। इसलिए उस व्यक्ति के समक्ष हम खुद को कितनी अच्छी तरह से पेश कर सकते हैं यह बात मायने रखती है। इसी को ई-मेल एटिकेट्स (शिष्टाचार) कहा जाता है। इन शिष्टाचारों द्वारा यह जाना जाता है कि हम कितने प्रभावी ई-मेल यूजर हैं। यह कहना कतई गलत नहीं होगा

ई-मेल – भाग ४

ई-मेल फोल्डर का प्रभावी उपयोग : मान ले हम एक ही साथ ४ प्रोजेक्टस्पर काम कर रहे हैं व इन चारों प्रोजेक्ट से संबंधित ई-मेल हमारे इनबॉक्स में आती हैं। समय के साथ-साथ मेल्स् की संख्या भी बढ़ती हैं व पुराने मेल्स् ढूंढ़ना कठीन होता जाता है, तब मेल्स् का प्रकारानुसार विभाजन आवश्यक हो जाता है व यही फोल्डर व्यवस्था काम आती हैं। प्रोजेक्ट अनुसार फोल्डर बनाकर वहीं मेल्स् को

ई-मेल – भाग ३

ई-मेल सर्च :     भेजे व प्राप्त होनेवाले मेल्स की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जाती हैं। ऐसे में पुराना मेल खोजना हो तो ई-मेल सर्च समय की बर्बादी से बचाता है। इस के दो भाग हैं – बेसिक व एडवान्सड। जी-मेल के होम-पेज पर एक लम्बा चौड़ा सर्च बार होता है। बेसिक सर्च : यदि हमें फेसबुक शब्द वाला ई-मेल ढूंढ़ना हैं – सर्च बार में फेसबुक लिखे। व

ई-मेल - भाग २

थीम्स : मूल ई-मेल का इन्टरफ़ेस सफ़ेद होता है । इस में रंग संगति व पृष्ठचित्र बदला जा सकता हैं । सबसे पहले जी-मेल के होम-पेज में आए । अगर चॅट ऑफ करना है, तो उसके बाजूवाले रेडिओ बटन पर क्लिक करें । इसके बाद सेव्ह चेंजेस्का बटन गहरा होगा वहाँ क्लिक करे । अब होम-पेज पर गुगल हँगआऊटस् बाँए निचले कोने में दिखना बंद हो जाएगा । यहाँ चॅट ऑन

‘ FireChat ’ – Frequently Asked Questions (FAQ)

1. What is ‘FireChat’? ‘FireChat’ is a messaging app that works with or without internet connectivity. 2. What are chatrooms, how are they different from Whatsapp groups? Whatsapp groups are used for a closed community, where messages circulate within the group members only. Members outside the group have no access to the messages circulated within the group. However, there is no ‘group’ concept in ‘FireChat’. ‘FireChat’ has ‘chatrooms’. They are

फ़ायरचॅट

आज अगर कोई हमसे ये कहे कि बिना इंटरनेट का इस्तेमाल किये या फ़िर बिना मोबाइल नेटवर्क का इस्तेमाल किये हम लोग अपने मोबाइल फ़ोन से कम्युनिकेट कर सकते हैं, मेसेजेस भेज सकते हैं! तो हमे क्या लगेगा? हमे इस बात बिलकुल विश्वास नही होगा| लेकिन आज हमे एक ऐसा ऍप देखना हैं, जो कि बिना इंटरनेट के और बिना मोबाइल फ़ोन नेटवर्क कव्हरेज के भी चलता रहता हैं, और