Sadguru Aniruddha

चिन्तन का महत्त्व (Importance of Chintan) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 26 Feb 2004

चाहे सुख हो या दुख, मानव को किसी भी स्थिति में भगवान से दूरी बढानी नहीं चाहिए । जीवन के हर मोड पर, कदम कदम पर भगवान से जुडे रहना जरूरी है । मानव के जीवनरूपी वर्तुल (सर्कल) की केन्द्रबिन्दु भगवान ही रहनी चाहिए । जो भगवान का हमेशा चिन्तन करता है, उसके योगक्षेम की चिन्ता भगवान करते हैं । बुद्धि से भगवान की पर्युपासना करने की ताकत राधाजी देती

उपासना शब्द का अर्थ (The meaning of 'Upasana') - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 26 Feb 2004

उपासना शब्द का अर्थ हैं भगवान के नज़दीक बैठना। याने भगवान के गुणों के नज़दीक बैठना। मेरे मन को भगवान के नज़दीक बिठाने की कोशिश करना, कम से कम मेरी बुद्धी पूरी तरह से भगवान के शरण में लगानाl इस बारे में परमपूज्य सद्‌गुरु अनिरुद्ध बापू ने अपने गुरूवार दिनांक २६ फरवरी २००४ के हिंदी प्रवचन में मार्गदर्शन किया वह आप इस व्हिडियो में देख सकते हैं। ॥ हरि ॐ

भगवान के शरण जाना चाहिये (One should seek God's refuge) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 26 Feb 2004

जब तक हम बुद्धी का अपराध नहीं करते तब तक प्राणो से ताकत आती रहती हैंl जबभी बुद्धी का अपराध करते हैं तो प्राणो की ताकत हम तक आ नहीं पहुचती l हमारे नीतिमन को ताकतवर बनाने के लिए बुद्धी का इस्तेमाल करके हमें भगवान के शरण जाना चाहिए, इस बारे में परमपूज्य सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने अपने गुरूवार दिनांक २६ फरवरी २००४ के हिंदी प्रवचन में मार्गदर्शन किया

श्रद्धावान का जीवन यह भगवान की देन है (Shraddhavan's life is the gift of God) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 24 July 2014

श्रद्धावान को स्वयं के जीवन की कभी भी घृणा नहीं करनी चाहिए । ’मेरा जीवन यह मेरे भगवान की देन है’, यह बात हर एक श्रद्धावान को याद रखनी चाहिए । भगवान की देन कभी भी गलत, घातक, अहितकारी, दुखदायी नहीं हो सकती । भगवान पर भरोसा करनेवाले श्रद्धावान को जीवन को सकारात्मक नजरिये से देखना चाहिए, इस बारे में परम पूज्य सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापु ने अपने गुरूवार दिनांक

तुम स्वयं ही स्वयं के मार्गदर्शक हो । (You are your own guide) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 24 July 2014

हर एक व्यक्ति स्वयं ही स्वयं का मार्गदर्शक है । मनुष्य को चाहिए कि वह अपने अस्तित्व का एहसास रखकर स्वयं के हित का विचार करके, स्वयं का आत्मपरीक्षण करके अपना विकास करे । उपलब्ध जीवनकाल का उचित उपयोग करके मानव अपना आत्महित किस तरह कर सकता है, इस बारे में परम पूज्य सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापु ने अपने गुरूवार दिनांक २४ जुलाई २०१४ के हिंदी प्रवचन में बताया, जो

अस्तित्व का एहसास (Awareness of Being) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 24 July 2014

मानव को प्राथमिक स्तर पर यह जानना चाहिए कि वह है, उसका अस्तित्व है, इसलिए उसके लिए सब कुछ है । `मैं हूँ’ इस बात का मानव को एहसास रखना चाहिए । मानव को अन्तर्मुख होकर `मैं कैसा हूँ’ यह स्वयं से पूछना चाहिए । बहुत बार मानव अपने अस्तित्व का एहसास खोकर जीवन भर कल्पना में जीता है और इस वजह से जीने के आनन्द से वंचित रह जाता

भक्त भगवान से जुडा हुआ होता है। (The Devotee is constantly connected with The God) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 24 July 2014

मानव को यह श्रद्धा रखनी चाहिए कि मैं भगवान से जुडा हुआ हूँ और भगवान दयालु एवं क्षमाशील हैं, वे मुझे सजा देने के लिए नहीं, बल्कि प्रेम से मेरा उद्धार करने आये हैं । भगवान से क्षमा अवश्य माँगिए, परंतु भगवान ने मेरा साथ छोड दिया है, ऐसा कभी भी मत मानना । भगवान से मुझे अन्य कोई भी अलग नहीं कर सकता, इस श्रद्धा के महत्त्व के बारे

भय से मुक्ति पाने के लिए भगवान पर भरोसा रखिए (Keep Faith in God to get rid of Fear) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 15 May 2014.

मानव जिस बात से डरता है, उसके बारे में वह ज्यादा सोचता है । जिस बात से उसे डर नहीं लगता उसके बारे में वह नहीं सोचता । सच्चे श्रद्धावान की जिम्मेदारी भगवान उठाते हैं और निरपेक्ष प्रेम के साथ उसके लिए सब कुछ करते रह्ते हैं । मानव का भगवान पर पूरा भरोसा होना चाहिए । भय से मुक्ति पाने के लिए भगवान पर भरोसा रखना आवश्यक है, यह

सर्वोच्च प्रेमस्वरूप परमात्मा (Paramatma - The Supreme Love) - Aniruddha Bapu Marathi Discourse 28 October 2004

भगवंतावर प्रेम करत रहा, मग तो तुमची काळजी घेतोच. कुणी कितीही पापी असेल, तरी ज्याला खरा पश्चात्तात झाला आहे आणि भक्तिमार्गावर चालून सुधारण्याची इच्छा आहे, त्याचा उद्धार भगवंत करतोच. आमचे भले करण्यास राम समर्थ आहे, आम्हाला त्याच्यावर प्रेम करायचे असते. प्रेमस्वरूप परमात्मा (Paramatma) हा सच्चिदानन्द आहे, याबाबत सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या गुरूवार दिनांक २८ ऑक्टोबर २००४ रोजीच्या प्रवचनात मार्गदर्शन केले, जे आपण या व्हिडियोत पाहू शकता. ॥ हरि ॐ ॥ ॥

सुन्दरकाण्ड महिमा - भाग २ (Glory of Sunderkand Part - 2) - Aniruddha Bapu Marathi Discourse 28 Oct 2004

सुन्दरकाण्डातील ‘दीनदयाल बिरिदु सँभारी । हरहुँ नाथ मम संकट भारी ।।’ ही या जगातील श्रेष्ठ प्रार्थना आहे. साक्षात भक्तमाता सीतेने स्वत:च्या पतिला म्हणजेच रामाला तिचा देव म्हणून केलेली ही प्रार्थना सर्वोत्तम प्रार्थना आहे. या प्रार्थनारूपी चौपाईचा पल्लव लावून रामायणाचा पाठ करण्याची पद्धत पूर्वापार चालत आली आहे. रामदूत सीताशोकविनाशन हनुमन्त हा जगात सर्वांत सुन्दर आहे आणि म्हणूनच या काण्डाला सुन्दरकाण्ड म्हटले आहे. सुन्दरकाण्डाची महती सांगताना परम पूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या गुरूवार