prayer

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दरवर्षी चैत्र पौर्णिमेला ज्योतिबा आणि वणी येथे मोठी यात्रा असते या यात्रेत मोठ्या संख्येने भाविक सहभागी होत असतात. या यात्रेला येणार्‍या भाविकांच्या व्यवस्थापनासाठी अनिरूद्धाज्‌ अ‍ॅकॅडमी ऑफ डिझास्टर मॅनेजमेंट’ (Aniruddha’s Academy Of Disaster Management) तर्फे ज्योतिबा आणि सप्तशृंगी वणी येथे सेवा करण्यात आली. त्या सेवेबाबत आकडेवारी खाली देत आहे. सप्तशृंगी वणी २ एप्रिल २०१५ ते ४ एप्रिल २०१५ दरम्यान सकाळी ८ ते रात्रौ १० पर्यंत दोन शिफ्ट मध्ये ही सेवा राबविली

श्रीअनिरुद्ध गुरुक्षेत्रम्‌ मधील हनुमान चलिसा पठण (Hanuman Chalisa)

श्रद्धावानांसाठी सर्वोच्च तिर्थक्षेत्र असणार्‍या श्रीअनिरुद्ध गुरूक्षेत्रम्‌ येथे दर वर्षी ‘हनुमान चलिसा पठण’ सप्ताह आयोजित केला जातो. यात सलग सात दिवस कमीतकमी १०८ श्रद्धावान प्रेमाने व श्रद्धेने १०८ वेळा (सकाळी ८ ते रात्रौ ८ या दरम्यान) हनुमान चलिसाचे पठण करतात. यावर्षी मंगळवार दिनांक २१ एप्रिल २०१५ (अक्षय तृतिया) पासून सोमवार २७ एप्रिल २०१५ (वैशाख शुद्ध दशमी) पर्यंत ‘हनुमान चलिसा पठण’ होणार आहे. या हनुमान चलिसा पठणात इतर श्रद्धावान येथे येऊन या

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अनावश्यक विचारांसाठी स्वत:ची ऊर्जा वाया घालवू नका – भाग १ (Don’t Waste Your Energy On Unnecessary Thoughts -Part 1) प्रपंचामध्ये परस्पर-संवादाबरोबरच आवश्यकता असते ती एकमेकांना समजून घेण्याची(Understanding Each Other). माणसाला वाटते की समोरच्याने स्वत:च्या मनातील प्रत्येक गोष्ट मला सांगावी. पण ही अपेक्षा करण्याआधी त्याने हा विचार करावा की मी समोरच्याशी असा वागतो का? परस्परांना समजून न घेण्याच्या वृत्तीतूनच बर्‍याच अडचणी निर्माण होतात. एकमेकांना समजून घेणे आवश्यक का आहे, याबद्दल परमपूज्य

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एकमेकांना समजून घेण्याचे महत्त्व (Significance Of Understanding Each Other) प्रपंचामध्ये परस्पर-संवादाबरोबरच आवश्यकता असते ती एकमेकांना समजून घेण्याची(Understanding Each Other). माणसाला वाटते की समोरच्याने स्वत:च्या मनातील प्रत्येक गोष्ट मला सांगावी. पण ही अपेक्षा करण्याआधी त्याने हा विचार करावा की मी समोरच्याशी असा वागतो का? परस्परांना समजून न घेण्याच्या वृत्तीतूनच बर्‍याच अडचणी निर्माण होतात. एकमेकांना समजून घेणे आवश्यक का आहे, याबद्दल परमपूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या २२ जानेवारी २०१५ रोजीच्या प्रवचनात सांगितले, जे

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अन्त:प्रकाश – भाग २ (The Inner Light – Part 2) ‘दिव्यत्व’ यह प्रकाशदायी तत्त्व है। सिर्फ बाह्य लोक में ही नहीं, बल्कि मानव के अन्दर भी यह दिव्यत्व रहता है। मानव के भीतर रहनेवाला अन्त:प्रकाश (The Inner Light) यानी विवेक यह भगवान के द्वारा मानव के अंदर प्रकाशित किया गया दिव्यत्व है, जिसके जरिये वह भगवान के साथ जुडा रह सकता है। भगवान के द्वारा जलायी गयी इस ज्योति को

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अन्त:प्रकाश – भाग १ (The Inner Light – Part 1) ‘दिव्यत्व’ यह प्रकाशदायी तत्त्व है। सिर्फ बाह्य लोक में ही नहीं, बल्कि मानव के अन्दर भी यह दिव्यत्व रहता है। मानव के भीतर रहनेवाला अन्त:प्रकाश (The Inner Light) यानी विवेक यह भगवान के द्वारा मानव के अंदर प्रकाशित किया गया दिव्यत्व है, जिसके जरिये वह भगवान के साथ जुडा रह सकता है। भगवान के द्वारा जलायी गयी इस ज्योति को

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साँस और दिव्यत्व – भाग २ (Breathing And Divinity – Part 2) जो सही है उसे स्वीकार करना और जो गलत है उसे बाहर फेंकना यह क्रिया साँस प्रक्रिया में सहज रूप में होती रहती है और इसीलिए साँस को भी दिव्य माना गया है। मानव का बच्चा जन्म लेते ही रोने लगता है। दर असल वह रोता नहीं है, बल्कि साँस लेता है। मानव की मृत्यु का वर्णन करते

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धारा शब्द को उलटा करने पर राधा शब्द बनता है (The Revert of Dhara Is Radha) मनुष्य के जीवन का सफर यह एक ‘धारा’ है। सृजन से लेकर विनाश तक बहनेवाली यह जीवनरूपी धारा होती है। विधायक से विघातक की दिशा में रहनेवाली गति धारा कहलाती है। विघातक शक्ति का रूपान्तरण जो विधायक शक्ति में करती है, वही राधा (Radha) है। धारा शब्द को उलटा करने पर राधा (Radha) शब्द

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दिव्य शक्ति (Divya Shakti) कार्य की दृष्टि से शक्ति के विधायक और विघातक इस तरह दो प्रकार माने जाते हैं। मानव के जीवन में विधायक शक्ति को कार्यान्वित कर विश्व की विघातक शक्तियों को कम करने का काम दिव्यशक्ति ( Divya Shakti ) करती है। ‘जिससे पवित्रता और आनन्द उत्पन्न होता है, वही दिव्य है’ और जो इस दिव्यता को प्रदान करती है उसे देवी कहते हैं। ‘राधा’ यह इस

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विचार के विधायक और विघातक ये दो पहलू – भाग २ (Constructive And Destructive Aspects Of Thought-Part 2) हर एक विचार (Thought) की, हर एक बात की मानव के जीवन में एक भूमिका रहती है। विचार (Thought) या कोई बात ये विधायक और विघातक दो प्रकार के रहते हैं। वह विचार या बात विधायक या विघातक इनमें से किस रूप में कार्य करेगी, यह मानव अपनी कर्मस्वतन्त्रता का उपयोग किस

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संस्कृती मूल्यांवर अवलंबून असते ( The Culture Depends On Values ) परदेशात गेलेल्या व्यक्तींनी आपल्या मातृभूमीशी म्हणजेच भारताशी जुळलेली आपली नाळ तुटू देता कामा नये. कुठेही राहिलो तरी आपली भारतीय संस्कृती (Culture) अवश्य जपा. संस्कृती (Culture) ही बाह्य वेश, खाद्यपदार्थ वगैरे गोष्टींवर अवलंबून नसून संस्कारांवर अवलंबून असते. संस्कृती म्हणजे मूल्यांचे पालन करणे आहे, याबद्दल सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या १९ फेब्रुवारी २०१५ रोजीच्या प्रवचनात सांगितले, जे आपण या व्हिडियोत पाहू शकता. ॥

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श्रीत्रिविक्रमके ‘त्रातारं इन्द्रं अवितारं इंद्रं..’ इस महत्वपूर्ण मन्त्र का अर्थ ( The Meaning of Important mantra of shree Trivikram – ‘Trataram Indram Avitaram Indram …’ ) परम पूज्य सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापु ने गुरूवार ६ मार्च २०१४ के हिंदी प्रवचन में श्रीत्रिविक्रमके ‘त्रातारं इन्द्रं अवितारं इंद्रं…..’ इस महत्वपूर्ण मन्त्र का अर्थ स्पष्ट किया है। वह आप इस व्हिडियो में देख सकते हैं। ॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥ ॥

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श्रीत्रिविक्रमाच्या त्रातारं इंद्रं अवितारं इंद्रं …’ ह्या महत्वपूर्ण मन्त्राचा अर्थ ( The Meaning of Important mantra of shree Trivikram – ‘Trataram Indram Avitaram Indram …’ ) सर्व समर्थ असणार्‍या आणि आमची हर तर्‍हेने काळजी घेणार्‍या श्री त्रिविक्रमाचे आवाहन या मंत्राद्वारे केले गेले आहे. सद्‍गुरु तत्वात्वर विश्वास असणार्‍याचे हित करणार्‍या त्रिविक्रमाच्या केवळ असण्यानेच आमचे जीवन आनंदमय होणार आहे आणि आम्हाला सर्व प्रकारच्या भय, क्लेश व अनुचितता यांपासून मुक्ति मिळणार आहे. अशा

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श्रीसूक्तावरील प्रवचनासंबंधीची सूचना (Announcement Regarding The Discourses On Shree-Suktam) श्रीहरिगुरुग्राम येथे गुरुवार दिनांक १२ मार्च २०१५ रोजी ‘श्रीश्वासम्’बद्द्ल सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध म्हणजेच बापू स्वत: माहिती देणार आहेत. त्याचबरोबर त्यापुढील गुरुवारपासून बापू ‘श्रीसूक्ता’वर (Shree-Suktam) बोलण्यास सुरुवात करणार आहेत हेदेखील बापुंनी सांगितले. श्रीसूक्तात पवित्र, शुभ, मंगल असे सर्व काही आहेत. श्रीसूक्ताचा महिमा सांगून श्रीसूक्तावरील प्रवचनासंबंधीची सूचना सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या २६ फेब्रुवारी २०१५ रोजीच्या प्रवचनात दिली, जे आपण या व्हिडियोत पाहू शकता. ॥

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‘श्रीश्वासम्’विषयक प्रवचनासंबंधीची सूचना – भाग २ ( Announcement Regarding Discourse On ShreeShwaasam – Part 2 ) ‘श्रीश्वासम्’ या उत्सवाची सर्वच श्रद्धावान उत्सुकतेने वाट पाहत आहेत. गुरुवार दिनांक १२ मार्च २०१५ रोजी श्रीहरिगुरुग्राम येथे या उत्सवाबद्दलची माहिती सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध म्हणजेच बापू स्वत: देणार आहेत. हा उत्सव ही जीवनातील सर्वोच्च भेट मी तुम्हाला देत आहे, असे बापुंनी या वेळी सांगितले. ‘श्रीश्वासम्’ची माहिती देणार्‍या या विशेष प्रवचनाबद्दलची सूचना सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या २६