Navaratri

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हरि ॐ, हर साल चैत्र नवरात्रि (शुभंकरा नवरात्रि) तथा आश्विन नवरात्रि (अशुभनाशिनी नवरात्रि) इन दोनों मंगलमय उत्सवों के दौरान श्रीअनिरुद्ध गुरुक्षेत्रम्‌ में नवरात्रि उत्सव बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। पहले दिन भोर में इस उत्सव का शुभारंभ गुरुक्षेत्रम्‌ में स्थित माता श्रीशिवगंगागौरी के मंगलस्नानम्‌ विधि से होता है और उसके बाद मोठी आई महिषासुरमर्दिनी के हाथ में पहनाये जानेवाले आभूषणों (तोडे – बड़े कंगन) के साथ गुरुक्षेत्रम्‌

आश्विन नवरात्रि उत्सव (अशुभनाशिनी नवरात्रि उत्सव) के संदर्भ में सूचना

हरि ॐ, कोरोना वायरस, “कोविद – १९” की व्यापकता का अंदाज़ा सभी श्रद्धावानों को है ही। आज के इस दौर में श्रीअनिरुद्ध गुरुक्षेत्रम्‌ बंद होकर, आनेवाली आश्विन नवरात्रि में भी वह बंद ही रहेगा और नवरात्रि का कोई भी कार्यक्रम गुरुक्षेत्रम्‌ में नहीं होगा, इसपर कृपया सभी श्रद्धावान ग़ौर करें। इस पृष्ठभूमि पर, सद्‍गुरु बापुजी के कहेनुसार, श्रद्धावान इस साल आश्विन नवरात्रि उत्सव (अशुभनाशिनी नवरात्रि उत्सव) में “अंबज्ञ इष्टिका पूजन”

Significance Of Navratri Jagaran - Aniruddha Bapu‬

नवरात्रीतील जागरणाचे महत्त्व – (Significance Of Navaratri Jagaran) परमपूज्य सद्‍गुरू श्री अनिरुद्ध बापूंनी त्यांच्या २८ मे २०१५ च्या मराठी प्रवचनात ‘नवरात्रीतील जागरणाचे महत्त्व’ (Significance Of Navaratri Jagaran) या मुद्द्याबाबत सांगितले. नवरात्रीच्या रूपात जी संधी आपल्याला मोठी आईने उपलब्ध करून दिली आहे ती संधी आपण दवडू नये असेही बापू म्हणाले. आम्हाला श्रीसूक्तम्‌(Shreesuktam) म्हणता येत असेल तर म्हणू, साधी ‘दुर्गे दुर्घट भारी तुजविण संसारी’ आरती जरी म्हणता येत असेल ती तरी आपण