Mumbai

Solid Waste Management is one of the major challenges faced by almost all the countries and particularly by mega cities over the globe. The mega cities in India too are facing it. The collection of waste and its disposal is a major question and headache before the administration. The recent fire incidents at Deonar dumping ground in Mumbai is a stark example. The recurrent fires in same manner and at same place are raising multiple questions. The quality of city’s air is continuously deteriorating due to the blazes. Hopefully as per report from ‘System of Air Quality and Weather Forecasting and Research’ (SAFAR) the situation should improve with fire extinguishing and management operations. However it would take time for the air to get clean.

But what is further worrying is the use of potable water on massive scale in fire extinguishing operations. On the one hand major parts of Maharashtra is facing acute water scarcity problem, while on the other hand around 14.4 lakhs litres of potable water was used to fight the fire at the Deonar dumping ground. Had there been a proper scientific and methodical system in place for solid waste management, the water wastage could have been avoided easily.

"नित्य उपासना" और "हरिगुरु गुणसंकीर्तन" का अनन्यसाधारण महत्व - (The importance of "Daily Prayers" & "Hariguru Gunasankirtan") - Aniruddha Bapu Pitruvachanam 31st Dec 2015

नये साल का स्वागत करते समय, ३१ दिसंबर २०१५, गुरुवार के दिन सद्‌गुरु बापू ने अपने पितृवचन में, अगले साल याने २०१६ साल में “नित्य उपासना” (daily prayers) और “हरिगुरु गुणसंकीर्तन” के अनन्यसाधारण महत्व को विशद किया था। इस पितृवचन का महत्वपूर्ण भाग संक्षिप्त रूप में मेरे श्रद्धावान मित्रों के लिए इस पोस्ट के द्वारा मैं दे रहा हूँ। “अभी २०१६ साल चंद घण्टों में शुरु होनेवाला है । हर

‘मैं हूँ’ यह त्रिविक्रम का मूल नाम है - भाग २ (‘ I Am ’ Is Trivikram's Original Name - Part 2) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 01 Jan 2015

‘मैं हूँ’ यह त्रिविक्रम का मूल नाम है – भाग २ (‘ I Am ’ Is Trivikram’s Original Name – Part 2) मानव को स्वयं के बारे में कभी भी नकारात्मक रूप में नहीं सोचना चाहिए। भगवान से कुछ मांगते समय भी सकात्मक सोच ही होनी चाहिए। ‘भगवान आप मेरे पिता हो और मैं आपका पुत्र हूं। आप ऐश्वर्यसंपन्न हो, ऐश्वर्यदाता हो इसलिए मेरे पास भी ऐश्वर्य है, आप उसे

स्तुति-प्रार्थना (Stuti-Prarthana) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 01 Jan 2015

स्तुति-प्रार्थना (Stuti-Prarthana) मानव जो सोचता है वही तत्त्व उसके पास आता है और जैसा वह सोचता है वैसा वह बनता है। मैं त्रिविक्रम की संतान हूं और इसलिए मेरे पास मेरे पिता के सारे गुण अल्प प्रमाण में ही सही मगर अवश्य ही हैं, इस विश्वास के साथ भगवान से मांगना चाहिए। भगवान सर्वसमर्थ हैं, भगवान सर्वगुणसंपन्न हैं, इस तरह भगवान पर विश्वास जाहिर करके उनसे प्रार्थना करनी चाहिए। इसे

दररोज दहा मिनिटे शान्त बसा- भाग २ (Sit Quite For 10 Minutes Every Day- Part 2) - Aniruddha Bapu‬ ‪Marathi‬ Discourse 18 June 2015

दररोज दहा मिनिटे शान्त बसा- भाग २ (Sit Quite For 10 Minutes Every Day- Part 2) रोज दिवसातून कमीत कमी दहा मिनिटे शान्तपणे बसा (Sit Quite). शान्तपणे बसण्याआधी ‘हरि ॐ, श्रीराम अंबज्ञ’ म्हणा आणि उठण्याआधी ‘जय जगदंब जय दुर्गे’ म्हणा. लक्ष्मी म्हणजे सर्व प्रकारची संपन्नता. अशा या लक्ष्मीमातेला श्रद्धावानाकडे घेऊन येणारा तिचा पुत्र त्रिविक्रम आहे. लक्ष्मीमातेचा श्रद्धावानाच्या जीवनात सर्वत्र संचार करण्याचा मार्ग प्रशस्त करणारा त्रिविक्रम आहे. या शान्तपणे बसण्यामुळे हा

तुम शरीर नहीं हो जिसमें आत्मा है, बल्कि तुम वह आत्मा हो जिसके पास शरीर है  (You Are Not A Human With A Soul But You Are A Soul With A Human Body) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 25 Dec 2014

तुम शरीर नहीं हो जिसमें आत्मा है, बल्कि तुम वह आत्मा हो जिसके पास शरीर है (You Are Not A Human With A Soul But You Are A Soul With A Human Body) मानव ऐसा समझता है कि शरीर में आत्मा है, लेकिन यह गलत है। सच तो यह है कि मूलत: तुम एक आत्मा हो जिसके कार्य के लिए भगवान ने तुम्हें शरीर दिया है। मानव को चाहिए कि

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अनावश्यक विचारांसाठी स्वत:ची ऊर्जा वाया घालवू नका – भाग १ (Don’t Waste Your Energy On Unnecessary Thoughts -Part 1) प्रपंचामध्ये परस्पर-संवादाबरोबरच आवश्यकता असते ती एकमेकांना समजून घेण्याची(Understanding Each Other). माणसाला वाटते की समोरच्याने स्वत:च्या मनातील प्रत्येक गोष्ट मला सांगावी. पण ही अपेक्षा करण्याआधी त्याने हा विचार करावा की मी समोरच्याशी असा वागतो का? परस्परांना समजून न घेण्याच्या वृत्तीतूनच बर्‍याच अडचणी निर्माण होतात. एकमेकांना समजून घेणे आवश्यक का आहे, याबद्दल परमपूज्य

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धारा शब्द को उलटा करने पर राधा शब्द बनता है (The Revert of Dhara Is Radha) मनुष्य के जीवन का सफर यह एक ‘धारा’ है। सृजन से लेकर विनाश तक बहनेवाली यह जीवनरूपी धारा होती है। विधायक से विघातक की दिशा में रहनेवाली गति धारा कहलाती है। विघातक शक्ति का रूपान्तरण जो विधायक शक्ति में करती है, वही राधा (Radha) है। धारा शब्द को उलटा करने पर राधा (Radha) शब्द

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विचार के विधायक और विघातक ये दो पहलू – भाग २ (Constructive And Destructive Aspects Of Thought-Part 2) हर एक विचार (Thought) की, हर एक बात की मानव के जीवन में एक भूमिका रहती है। विचार (Thought) या कोई बात ये विधायक और विघातक दो प्रकार के रहते हैं। वह विचार या बात विधायक या विघातक इनमें से किस रूप में कार्य करेगी, यह मानव अपनी कर्मस्वतन्त्रता का उपयोग किस

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श्री त्रिविक्रम जलाचे त्रिविध देहांवरील कार्य ( Trivikram Jal makes Trividh Deha Competent & Potent) परम पूज्य सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापुंनी गुरूवार दिनांक ६ मार्च २०१४ रोजी च्या मराठी प्रवचनात श्री हरिगुरुग्राम येथे श्री त्रिविक्रम जल (Trivikram Jal) मानवाच्या त्रिविध देहाला कसे समर्थ बनवते हे स्पष्ट केले. जे आपण ह्या व्हिडिओमध्ये पाहू शकतो. ॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥ ॥ अंबज्ञ ॥

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श्रीत्रिविक्रमके ‘त्रातारं इन्द्रं अवितारं इंद्रं..’ इस महत्वपूर्ण मन्त्र का अर्थ ( The Meaning of Important mantra of shree Trivikram – ‘Trataram Indram Avitaram Indram …’ ) परम पूज्य सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापु ने गुरूवार ६ मार्च २०१४ के हिंदी प्रवचन में श्रीत्रिविक्रमके ‘त्रातारं इन्द्रं अवितारं इंद्रं…..’ इस महत्वपूर्ण मन्त्र का अर्थ स्पष्ट किया है। वह आप इस व्हिडियो में देख सकते हैं। ॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥ ॥

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श्रीत्रिविक्रमाच्या त्रातारं इंद्रं अवितारं इंद्रं …’ ह्या महत्वपूर्ण मन्त्राचा अर्थ ( The Meaning of Important mantra of shree Trivikram – ‘Trataram Indram Avitaram Indram …’ ) सर्व समर्थ असणार्‍या आणि आमची हर तर्‍हेने काळजी घेणार्‍या श्री त्रिविक्रमाचे आवाहन या मंत्राद्वारे केले गेले आहे. सद्‍गुरु तत्वात्वर विश्वास असणार्‍याचे हित करणार्‍या त्रिविक्रमाच्या केवळ असण्यानेच आमचे जीवन आनंदमय होणार आहे आणि आम्हाला सर्व प्रकारच्या भय, क्लेश व अनुचितता यांपासून मुक्ति मिळणार आहे. अशा

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श्रीसूक्तावरील प्रवचनासंबंधीची सूचना (Announcement Regarding The Discourses On Shree-Suktam) श्रीहरिगुरुग्राम येथे गुरुवार दिनांक १२ मार्च २०१५ रोजी ‘श्रीश्वासम्’बद्द्ल सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध म्हणजेच बापू स्वत: माहिती देणार आहेत. त्याचबरोबर त्यापुढील गुरुवारपासून बापू ‘श्रीसूक्ता’वर (Shree-Suktam) बोलण्यास सुरुवात करणार आहेत हेदेखील बापुंनी सांगितले. श्रीसूक्तात पवित्र, शुभ, मंगल असे सर्व काही आहेत. श्रीसूक्ताचा महिमा सांगून श्रीसूक्तावरील प्रवचनासंबंधीची सूचना सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या २६ फेब्रुवारी २०१५ रोजीच्या प्रवचनात दिली, जे आपण या व्हिडियोत पाहू शकता. ॥

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‘श्रीश्वासम्’विषयक प्रवचनासंबंधीची सूचना – भाग २ ( Announcement Regarding Discourse On ShreeShwaasam – Part 2 ) ‘श्रीश्वासम्’ या उत्सवाची सर्वच श्रद्धावान उत्सुकतेने वाट पाहत आहेत. गुरुवार दिनांक १२ मार्च २०१५ रोजी श्रीहरिगुरुग्राम येथे या उत्सवाबद्दलची माहिती सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध म्हणजेच बापू स्वत: देणार आहेत. हा उत्सव ही जीवनातील सर्वोच्च भेट मी तुम्हाला देत आहे, असे बापुंनी या वेळी सांगितले. ‘श्रीश्वासम्’ची माहिती देणार्‍या या विशेष प्रवचनाबद्दलची सूचना सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या २६

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‘श्रीश्वासम्’विषयक प्रवचनासंबंधीची सूचना – भाग १ ( Announcement Regarding Discourse On ShreeShwaasam – Part 1 ) ‘श्रीश्वासम्’ या उत्सवाची सर्वच श्रद्धावान उत्सुकतेने वाट पाहत आहेत. गुरुवार दिनांक १२ मार्च २०१५ रोजी श्रीहरिगुरुग्राम येथे या उत्सवाबद्दलची माहिती सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध म्हणजेच बापू स्वत: देणार आहेत. हा उत्सव ही जीवनातील सर्वोच्च भेट मी तुम्हाला देत आहे, असे बापुंनी या वेळी सांगितले. ‘श्रीश्वासम्’ची माहिती देणार्‍या या विशेष प्रवचनाबद्दलची सूचना सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या २६

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सॉरी म्हणताना मनापासून म्हणा ( Say Sorry Sincerely ) मानवाने स्वत:च्या हातून घडलेली चूक मनापासून कबूल करायला हवी आणि ती सुधारण्याचे प्रयास करायला हवेत. स्वत:ची चूक इतरांपासून एकवेळ लपवता येईल, पण आदिमाता चण्डिकेस आणि तिच्या पुत्रास कुणीही फसवू शकत नाही. माफी मागताना म्हणजेच सॉरी (Sorry) म्हणताना मनापासून म्हणावे, याबद्दल सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या ८ जानेवारी २०१५ रोजीच्या प्रवचनात सांगितले, जे आपण या व्हिडियोत पाहू शकता. ॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम