Migration

The mass migration is putting immense pressure in many ways on the European and American nations. This illegal immigration has increasingly started to become an unwelcome eventuality for the locals as they are feeling stressed and being encroached upon with this influx ranging in millions. The refugee camps hosting the immigrants are increasingly witnessing internal and external clashes, forced clampdowns and extremist activities. A pointer to these facts has been the recently reported mass sexual attacks on the many local German women celebrating New Year’s eve right in the middle of the city square in Cologne which is the fourth largest city of Germany.

Many strategic analysts and military experts have predicted the Third World War to be just a whisker away in the light of Syrian and Iraqi skies swarming with warplanes of two of the largest opposing global camps lead by Russia on one side and US-NATO on the other. The world now needs to look at the killing concoctions in Syria not with a regional but global strategic perspective though not forgetting the need to establish peace and heal wounds of common masses if the further devastation is to be avoided.

डस्ट बोल – भाग ​ ४

    उपनिवेशियों (साम्राज्यवादिओं) ने अफ्रीका के साथ-साथ दुनिया भर में अन्य स्थानों पर भी अपना उपनिवेश स्थापित किया था। इसी उपनिवेशवाद के कारण ही हमें अफ्रीका खंड की पहचान जंगली टोलियों के रुप में, गुलामों का प्रदेश इस रुप में हुई। सच पुछा जाय तो इन उपनिवेशियों के आगमन से पूर्व अफ्रीका में कुछ समृद्ध साम्राज्य थे। परन्तु खनिज संपत्ति समृद्ध प्रदेश के रुप में अब कही जाकर अफ्रीका की

डस्ट बोल – भाग ​ ३

  इक्कीसवी सदी में जहाँ पर अनेक देशों की समृद्धता आँखों को चका चौंध कर देती है, प्रगति की होड़ लगी हुई है वहीं दूसरी ओर ऐसे गरीब राष्ट्र भी हैं जहाँ के लोगों की स्थिति एवं विपन्नावस्था देख दिल पर काफ़ी आघात पहुँचता है। प्रगत राष्ट्रों में जहाँ पर हर एक विद्यार्थी के हाथ में टॅब आ पहुँचा हैं, वहीं गरीब राष्ट्रों में बहुतांश बच्चों के लिए शिक्षा हासिल

डस्ट बोल – भाग ​२​

  सबराहन देश माने जाने वाले इथिओपियाने तो पिछली सदी से ही अनेक दुर्भिक्षों का सामना किया है और अब भी कर ही रहा है| परन्तु सुदान के साथ केनिया, सोमालिया जैसे देश भी पिछले दो वर्षों में दुर्भिक्ष्य के कारण झुलस गये हैं| इन चारों ही देशों के अनेक हिस्सों में जिन लोगों को अन्न के लिए त्राहि-त्राहि करते हुए प्राण गंवाने पड़े हैं, वे छूट गए आज यह

डस्ट बोल - भाग १

  कुछ महीने पूर्व इंटरनेट पर एक छायाचित्र (तस्वीर) उभरकर दिखायी दे रही थी। उस समय उस पर्दे पर चल रहा दृश्य कुछ इस प्रकार था कि एक छोटे से प्रवासी जहाज के पिछली ओर इंजिन के पास में होनेवाले छोटे से स्थान पर दो व्यक्ति अपना संतुलन बनाये संभलकर बैठे थे। उनका संतुलन यदि जरा सा भी ढ़ल जाता तो, पानी में गिरकर अथवा उस इंजिन के ज़कड़ में