Maharashtra

During the Adhiveshan held on the day following Aniruddha Pournima 2012, Bapu had announced the names of 125 new centres who had been recognized as ‘Authorized Kendras’. The ceremony for distribution of Padukas viz. ‘Paduka Pradan Sohala‘ for these Centres was held yesterday at Shri Harigurugram. The ceremony commenced in the morning and Shraddhavans from various parts of Maharashtra and outside could be seen at the function. Such was the intense desire to receive Sadguru Bapus’s Padukas, that the representatives of centres from London, Dubai and Lagos came for the function.

Representatives of three new centres from Australia had informed about their inability to be able to make it for this function. They will be coming at a later date to receive the padukas. One more centre was not represented. Hence, a total of 121 sets of padukas were distributed. More than 3000 Shraddhavans participated in this ceremony. Before receiving Sadguru Bapu’s Padukas, the Pramukh Sevaks from each Centre performed the poojan of Bapu’s Chinmay Padukas on the stage specially made up for the function. After the poojan and upasana, aarti was performed by all the poojaks who then also offered their dandavat before the Padukas. Finally came the big moment!!! Padukas were handed over to the respective Centres along with other requisite paraphernalia that forms an integral part of the Upasana. Shraddhavan Bapu bhaktasdanced to their heart’s content to the tune of melodious gajars and abhangs. The atmosphere at Shree Harigururam was truly charged and each of the Shraddhavans who attended the event carried home happy moments that they will cherish forever.

‘मैं हूँ’ यह त्रिविक्रम का मूल नाम है - भाग २ (‘ I Am ’ Is Trivikram's Original Name - Part 2) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 01 Jan 2015

‘मैं हूँ’ यह त्रिविक्रम का मूल नाम है – भाग २ (‘ I Am ’ Is Trivikram’s Original Name – Part 2) मानव को स्वयं के बारे में कभी भी नकारात्मक रूप में नहीं सोचना चाहिए। भगवान से कुछ मांगते समय भी सकात्मक सोच ही होनी चाहिए। ‘भगवान आप मेरे पिता हो और मैं आपका पुत्र हूं। आप ऐश्वर्यसंपन्न हो, ऐश्वर्यदाता हो इसलिए मेरे पास भी ऐश्वर्य है, आप उसे

स्तुति-प्रार्थना (Stuti-Prarthana) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 01 Jan 2015

स्तुति-प्रार्थना (Stuti-Prarthana) मानव जो सोचता है वही तत्त्व उसके पास आता है और जैसा वह सोचता है वैसा वह बनता है। मैं त्रिविक्रम की संतान हूं और इसलिए मेरे पास मेरे पिता के सारे गुण अल्प प्रमाण में ही सही मगर अवश्य ही हैं, इस विश्वास के साथ भगवान से मांगना चाहिए। भगवान सर्वसमर्थ हैं, भगवान सर्वगुणसंपन्न हैं, इस तरह भगवान पर विश्वास जाहिर करके उनसे प्रार्थना करनी चाहिए। इसे

दररोज दहा मिनिटे शान्त बसा- भाग २ (Sit Quite For 10 Minutes Every Day- Part 2) - Aniruddha Bapu‬ ‪Marathi‬ Discourse 18 June 2015

दररोज दहा मिनिटे शान्त बसा- भाग २ (Sit Quite For 10 Minutes Every Day- Part 2) रोज दिवसातून कमीत कमी दहा मिनिटे शान्तपणे बसा (Sit Quite). शान्तपणे बसण्याआधी ‘हरि ॐ, श्रीराम अंबज्ञ’ म्हणा आणि उठण्याआधी ‘जय जगदंब जय दुर्गे’ म्हणा. लक्ष्मी म्हणजे सर्व प्रकारची संपन्नता. अशा या लक्ष्मीमातेला श्रद्धावानाकडे घेऊन येणारा तिचा पुत्र त्रिविक्रम आहे. लक्ष्मीमातेचा श्रद्धावानाच्या जीवनात सर्वत्र संचार करण्याचा मार्ग प्रशस्त करणारा त्रिविक्रम आहे. या शान्तपणे बसण्यामुळे हा

तुम शरीर नहीं हो जिसमें आत्मा है, बल्कि तुम वह आत्मा हो जिसके पास शरीर है  (You Are Not A Human With A Soul But You Are A Soul With A Human Body) - Aniruddha Bapu‬ Hindi‬ Discourse 25 Dec 2014

तुम शरीर नहीं हो जिसमें आत्मा है, बल्कि तुम वह आत्मा हो जिसके पास शरीर है (You Are Not A Human With A Soul But You Are A Soul With A Human Body) मानव ऐसा समझता है कि शरीर में आत्मा है, लेकिन यह गलत है। सच तो यह है कि मूलत: तुम एक आत्मा हो जिसके कार्य के लिए भगवान ने तुम्हें शरीर दिया है। मानव को चाहिए कि

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अनावश्यक विचारांसाठी स्वत:ची ऊर्जा वाया घालवू नका – भाग १ (Don’t Waste Your Energy On Unnecessary Thoughts -Part 1) प्रपंचामध्ये परस्पर-संवादाबरोबरच आवश्यकता असते ती एकमेकांना समजून घेण्याची(Understanding Each Other). माणसाला वाटते की समोरच्याने स्वत:च्या मनातील प्रत्येक गोष्ट मला सांगावी. पण ही अपेक्षा करण्याआधी त्याने हा विचार करावा की मी समोरच्याशी असा वागतो का? परस्परांना समजून न घेण्याच्या वृत्तीतूनच बर्‍याच अडचणी निर्माण होतात. एकमेकांना समजून घेणे आवश्यक का आहे, याबद्दल परमपूज्य

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धारा शब्द को उलटा करने पर राधा शब्द बनता है (The Revert of Dhara Is Radha) मनुष्य के जीवन का सफर यह एक ‘धारा’ है। सृजन से लेकर विनाश तक बहनेवाली यह जीवनरूपी धारा होती है। विधायक से विघातक की दिशा में रहनेवाली गति धारा कहलाती है। विघातक शक्ति का रूपान्तरण जो विधायक शक्ति में करती है, वही राधा (Radha) है। धारा शब्द को उलटा करने पर राधा (Radha) शब्द

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विचार के विधायक और विघातक ये दो पहलू – भाग २ (Constructive And Destructive Aspects Of Thought-Part 2) हर एक विचार (Thought) की, हर एक बात की मानव के जीवन में एक भूमिका रहती है। विचार (Thought) या कोई बात ये विधायक और विघातक दो प्रकार के रहते हैं। वह विचार या बात विधायक या विघातक इनमें से किस रूप में कार्य करेगी, यह मानव अपनी कर्मस्वतन्त्रता का उपयोग किस

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श्री त्रिविक्रम जलाचे त्रिविध देहांवरील कार्य ( Trivikram Jal makes Trividh Deha Competent & Potent) परम पूज्य सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापुंनी गुरूवार दिनांक ६ मार्च २०१४ रोजी च्या मराठी प्रवचनात श्री हरिगुरुग्राम येथे श्री त्रिविक्रम जल (Trivikram Jal) मानवाच्या त्रिविध देहाला कसे समर्थ बनवते हे स्पष्ट केले. जे आपण ह्या व्हिडिओमध्ये पाहू शकतो. ॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥ ॥ अंबज्ञ ॥

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श्रीत्रिविक्रमके ‘त्रातारं इन्द्रं अवितारं इंद्रं..’ इस महत्वपूर्ण मन्त्र का अर्थ ( The Meaning of Important mantra of shree Trivikram – ‘Trataram Indram Avitaram Indram …’ ) परम पूज्य सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापु ने गुरूवार ६ मार्च २०१४ के हिंदी प्रवचन में श्रीत्रिविक्रमके ‘त्रातारं इन्द्रं अवितारं इंद्रं…..’ इस महत्वपूर्ण मन्त्र का अर्थ स्पष्ट किया है। वह आप इस व्हिडियो में देख सकते हैं। ॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥ ॥

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श्रीत्रिविक्रमाच्या त्रातारं इंद्रं अवितारं इंद्रं …’ ह्या महत्वपूर्ण मन्त्राचा अर्थ ( The Meaning of Important mantra of shree Trivikram – ‘Trataram Indram Avitaram Indram …’ ) सर्व समर्थ असणार्‍या आणि आमची हर तर्‍हेने काळजी घेणार्‍या श्री त्रिविक्रमाचे आवाहन या मंत्राद्वारे केले गेले आहे. सद्‍गुरु तत्वात्वर विश्वास असणार्‍याचे हित करणार्‍या त्रिविक्रमाच्या केवळ असण्यानेच आमचे जीवन आनंदमय होणार आहे आणि आम्हाला सर्व प्रकारच्या भय, क्लेश व अनुचितता यांपासून मुक्ति मिळणार आहे. अशा

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श्रीसूक्तावरील प्रवचनासंबंधीची सूचना (Announcement Regarding The Discourses On Shree-Suktam) श्रीहरिगुरुग्राम येथे गुरुवार दिनांक १२ मार्च २०१५ रोजी ‘श्रीश्वासम्’बद्द्ल सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध म्हणजेच बापू स्वत: माहिती देणार आहेत. त्याचबरोबर त्यापुढील गुरुवारपासून बापू ‘श्रीसूक्ता’वर (Shree-Suktam) बोलण्यास सुरुवात करणार आहेत हेदेखील बापुंनी सांगितले. श्रीसूक्तात पवित्र, शुभ, मंगल असे सर्व काही आहेत. श्रीसूक्ताचा महिमा सांगून श्रीसूक्तावरील प्रवचनासंबंधीची सूचना सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या २६ फेब्रुवारी २०१५ रोजीच्या प्रवचनात दिली, जे आपण या व्हिडियोत पाहू शकता. ॥

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‘श्रीश्वासम्’विषयक प्रवचनासंबंधीची सूचना – भाग २ ( Announcement Regarding Discourse On ShreeShwaasam – Part 2 ) ‘श्रीश्वासम्’ या उत्सवाची सर्वच श्रद्धावान उत्सुकतेने वाट पाहत आहेत. गुरुवार दिनांक १२ मार्च २०१५ रोजी श्रीहरिगुरुग्राम येथे या उत्सवाबद्दलची माहिती सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध म्हणजेच बापू स्वत: देणार आहेत. हा उत्सव ही जीवनातील सर्वोच्च भेट मी तुम्हाला देत आहे, असे बापुंनी या वेळी सांगितले. ‘श्रीश्वासम्’ची माहिती देणार्‍या या विशेष प्रवचनाबद्दलची सूचना सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या २६

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‘श्रीश्वासम्’विषयक प्रवचनासंबंधीची सूचना – भाग १ ( Announcement Regarding Discourse On ShreeShwaasam – Part 1 ) ‘श्रीश्वासम्’ या उत्सवाची सर्वच श्रद्धावान उत्सुकतेने वाट पाहत आहेत. गुरुवार दिनांक १२ मार्च २०१५ रोजी श्रीहरिगुरुग्राम येथे या उत्सवाबद्दलची माहिती सद्‍गुरु श्री अनिरुद्ध म्हणजेच बापू स्वत: देणार आहेत. हा उत्सव ही जीवनातील सर्वोच्च भेट मी तुम्हाला देत आहे, असे बापुंनी या वेळी सांगितले. ‘श्रीश्वासम्’ची माहिती देणार्‍या या विशेष प्रवचनाबद्दलची सूचना सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या २६

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सॉरी म्हणताना मनापासून म्हणा ( Say Sorry Sincerely ) मानवाने स्वत:च्या हातून घडलेली चूक मनापासून कबूल करायला हवी आणि ती सुधारण्याचे प्रयास करायला हवेत. स्वत:ची चूक इतरांपासून एकवेळ लपवता येईल, पण आदिमाता चण्डिकेस आणि तिच्या पुत्रास कुणीही फसवू शकत नाही. माफी मागताना म्हणजेच सॉरी (Sorry) म्हणताना मनापासून म्हणावे, याबद्दल सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या ८ जानेवारी २०१५ रोजीच्या प्रवचनात सांगितले, जे आपण या व्हिडियोत पाहू शकता. ॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम

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संवाद गरजेचा का आहे – भाग ३ ( Why The Conversation Is Necessary – Part 3 ) संवाद हे एक अत्यंत महत्त्वाचे माध्यम आहे. पण संवाद म्हणजे केवळ गप्पा मारणे नव्हे, तर संवाद म्हणजे एकमेकांना नीट समजून घेणे. संवादामुळे माणसांतील प्रेमाचे नाते अधिक घट्ट होते. संवाद गरजेचा का आहे, याबद्दल सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या ८ जानेवारी २०१५ रोजीच्या प्रवचनात सांगितले, जे आपण या व्हिडियोत पाहू शकता. ॥ हरि ॐ ॥ ॥