Hanumant

“O Subhata (Shreehanumanta – the supreme, the ultimate bhakta) lead me on the path of bhakti, show me the way to the bhagavanta. It is from You, that I want to learn bhakti” says Sant Tukaram in one of his compositions. Bapu (Aniruddhasinh) too has said time and again that it is guided by Hanumant that every bhakta takes his first step or in other words begins his journey on the path of bhakti. And so Bapu (Aniruddhasinh) initiated for all His shraddhavaan friends, the ‘Shree Ashwatthamaruti poojan’ – the celebration of bhakti. In 1996 Bapu (Aniruddhasinh) initiated the Ramnavmi festival which was the very first followed by the Shree Ashwatthamaruti poojan festival in 1997.

About the Upasana:
* This festival is marked by the installation of the idol of the Hanumanta that Bapu (Aniruddhasinh) Himself has created. Bapu (Aniruddhasinh) actually sculpted this idol using the hammer and the chisel. Bapu (Aniruddhasinh) is an excellent sculptor. “Sculpting -carving out and lending the desired shape, is Bapu’s (Aniruddhasinh) inherent nature”. It comes so easily to Him!” The highlight of the festival is that all shraddhavaan bhaktas can take the darshan of this idol of the Hanumant and feel blessed. Also, this idol is endowed with all the aspects and features possessed by Shree Hanumanta as described in the Panchamukhahanuman stotra.

* A small idol of Shree Hanumanta is kept in a platter placed before the main idol of the Hanumanta sculpted by Bapu (Aniruddhasinh).
* A small sapling of the Peepal, a symbolic representation of the Ashwattha tree, is placed behind the idol of the Hanumanta.
* Sugarcane stalks are arranged around the idol as part of the decoration.
* The ‘Dhuni Mata’ is installed before the idol of Hanumanta. On this day the poojan is also offered to the ‘Dhuni’ i.e. Anjani Mata, the ‘Mata’  – the Mother of Bhagvan Hanumanta. A group of Prapathak do a continuous and uninterrupted recitation of the Shree Hanumanchalisa.
* Following the ‘shodashopchar poojan’ of Shree Hanumanta (shodash=16. the term ‘shodash+upchar’ indicates the 16 manners of offering the poojan), five unmarried men apply the ‘shendur’ to the idol coating it completely. All the shraddhavaan bhaktas too can then apply a little ‘shendur’ to the idol and take the darshan.
श्रीहनुमानचलिसा पठणासंदर्भात सूचना व शंकानिरसन

हरि ॐ, आपल्या संस्थेने दि. २१ ते २७ सप्टेंबर ह्या आठवडाभराकरिता श्रीहनुमानचलिसा पठणाचे ऑनलाईन पद्धतीने आयोजन केले आहे, हे आपणा सर्वांना माहीतच आहे. ह्या पठणाबाबत काही श्रद्धावानांनी काही शंका उपस्थित केल्या. त्या शंकांच्या निरसनाकरिता पुढील स्पष्टीकरण व काही सूचना देत आहे : १. हे पठण भारतीय प्रमाणवेळेनुसार (IST) सकाळी ८.०० वाजता सुरू होईल व भारतीय प्रमाणवेळेनुसार सायंकाळी ८.१५ पर्यंत सुरू राहील. मंगळवार, गुरुवार व शनिवारी (२२, २४ व २६ सप्टेंबर

श्रीहनुमानचलिसा पठन के संदर्भ में सूचनाएँ एवं प्रश्नोत्तर

  हरि ॐ, अपनी संस्था ने दि. २१ से २७ सितम्बर इस हफ़्तेभर के लिए श्रीहनुमानचलिसा पठन का ऑनलाईन पद्धति से आयोजन किया है, यह हम सब जानते ही हैं। इस पठन के संदर्भ में श्रद्धावानों ने कुछ प्रश्न उपस्थित किये। उन प्रश्नों के उत्तरस्वरूप निम्न स्पष्टीकरण तथा कुछ सूचनाएँ आगे दी गई है : १. यह पठन भारतीय मानक समयानुसार (IST) सुबह ८.०० बजे शुरू होगा और भारतीय मानक

Hanuman-chalisa

Hari Om, As we all know, we will be having the week-long online Hanuman Chalisa pathan from 21st to 27th September. We have received a few queries from Shraddhavans regarding the pathan. For clarification, instructions and a few FAQ’s regarding the Hanuman Chalisa pathan are given below: 1. The pathan will begin at 8 am IST and will continue till 8:15 pm IST. On Tuesday, Thursday and Saturday (22nd, 24th

हनुमान चलिसा पठण

हरि ॐ, हर साल श्रीअनिरुद्ध गुरुक्षेत्रम्‌ में होनेवाला हनुमानचलिसा पठन इस साल के अधिक आश्विन मास में, सोमवार दि. २१ सितम्बर २०२० से रविवार दि. २७ सितम्बर २०२० इन ७ दिनों में संपन्न होनेवाला है। लेकिन इस साल गुरुक्षेत्रम्‌ में प्रत्यक्ष पठन करना संभव नहीं होगा, इस असुविधा को मद्देनज़र रखते हुए, पिछले कुछ सालों के रेकॉर्डिंग का इस्तेमाल करके, अनिरुद्ध टी.व्ही., फेसबुक पेज, यु. ट्युब. के माध्यम से; साथ

सुंदरकाण्ड पाठ और चैत्र पूर्णिमा (हनुमान पूर्णिमा) संबंधी सूचना

  हरि ॐ, सुंदरकाण्ड पाठ का होनेवाला प्रक्षेपण: सभी श्रद्धावान जानते ही हैं कि इन दिनों शुरू चैत्र नवरात्रि (शुभंकरा नवरात्रि) में, हररोज़ शाम को अनिरुद्ध टी.व्ही. तथा मेरे फेसबुक पेज के माध्यम से, नित्य उपासना के बाद “सुंदरकाण्ड पाठ” का प्रक्षेपण किया जाता है। फिलहाल कोरोना वायरस, “कोविद – १९” ने पूरी दुनिया में ही निर्माण की हुई तनाव की परिस्थिति में, इस सुंदरकाण्ड के पाठ के कारण बहुत

श्री पंचमुख-हनुमत्-कवच - मराठी अर्थ

॥हरि: ॐ ॥  ॥श्री पंचमुख-हनुमत्-कवच ॥  (संस्कृत आणि मराठी अर्थ)  ॥अथ श्रीपञ्चमुखहनुमत्कवचम् ॥ श्रीगणेशाय नम:| ॐ अस्य श्रीपञ्चमुखहनुमत्कवचमन्त्रस्य ब्रह्मा ऋषि:| गायत्री छंद:| पञ्चमुख-विराट् हनुमान् देवता| ह्रीम् बीजम्| श्रीम् शक्ति:| क्रौम् कीलकम्| क्रूम् कवचम्| क्रैम् अस्त्राय फट् | इति दिग्बन्ध:|  या स्तोत्राचा ऋषि ब्रह्मा असून छंद गायत्री, ह्या स्तोत्राची देवता पंचमुख-विराट-हनुमान आहे, ह्रीम् बीज आहे, श्रीम् शक्ति आहे, क्रौम् कीलक आहे, क्रूम् कवच आहे आणि ‘क्रैम् अस्त्राय फट्’ हा दिग्बन्ध आहे. ॥श्री

श्री पंचमुख-हनुमत्-कवच - हिन्दी अर्थ

॥हरि: ॐ ॥   ॥श्री पंचमुख-हनुमत्-कवच ॥   (मूल संस्कृत और हिन्दी अर्थ)   ॥अथ श्रीपञ्चमुखहनुमत्कवचम् ॥   श्रीगणेशाय नम:| ॐ अस्य श्रीपञ्चमुखहनुमत्कवचमन्त्रस्य ब्रह्मा ऋषि:| गायत्री छंद:| पञ्चमुख-विराट् हनुमान् देवता| ह्रीम् बीजम्| श्रीम् शक्ति:| क्रौम् कीलकम्| क्रूम् कवचम्| क्रैम् अस्त्राय फट् | इति दिग्बन्ध:|  इस स्तोत्र के ऋषि ब्रह्मा हैं, छंद गायत्री है, देवता पंचमुख-विराट-हनुमानजी हैं, ह्रीम् बीज है, श्रीम् शक्ति है, क्रौम् कीलक है, क्रूम् कवच है और ‘क्रैम् अस्त्राय फट्’

सप्तचक्र उपासना - अधिक सुलभतेने कशी करावी?

गुरुवार, दि. १५ ऑक्टोबर २०१५ रोजी परमपूज्य सद्‌गुरु बापूंनी “श्रीशब्दध्यानयोग” ही, श्रद्धावानांचा अभ्युदय (सर्वांगीण विकास) घडवून आणणारी सप्तचक्रांची उपासना श्रीहरिगुरुग्राम येथे सुरु केली. त्यानंतर संस्थेतर्फे ह्या उपासनेची माहिती देणारी पुस्तिकाही श्रद्धावानांकरिता उपलब्ध करण्यात आली. पुस्तिकेत दिलेल्या माहितीनुसार, श्रद्धावान पुस्तिकेतील चक्रांच्या प्रतिमेकडे पाहता पाहता त्या संबंधित चक्राचा गायत्री मंत्र आणि स्वस्तिवाक्य म्हणत घरी उपासना करू शकतात. गुरुवार, दि. २१ जानेवारी २०१६ रोजी आपल्या पितृवचनामध्ये सद्‌गुरु बापूंनी अकारण कारुण्याची पुन्हा एकदा प्रचिती

सप्तचक्र उपासना - अधिक सुलभतासे कैसे करे?

गुरुवार, दि. १५ अक्तूबर २०१५ को परमपूज्य सद्‌गुरु बापू ने “श्रीशब्दध्यानयोग” यह, श्रद्धावानों का अभ्युदय (सर्वांगीण विकास) करानेवाली सप्तचक्रों की उपासना श्रीहरिगुरुग्राम में शुरू की। उसके बाद, इस उपासना की जानकारी देनेवाली पुस्तिका भी संस्था की ओर से श्रद्धावानों के लिए उपलब्ध करायी गयी। पुस्तिका में दी गयी जानकारी के अनुसार, श्रद्धावान पुस्तिका में दी गयीं चक्रों की प्रतिमाओं की ओर देखते हुए उस संबंधित चक्र का गायत्री मंत्र और