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श्री पंचमुख-हनुमत्-कवच – मराठी अर्थ

॥हरि: ॐ ॥  ॥श्री पंचमुख-हनुमत्-कवच ॥  (संस्कृत आणि मराठी अर्थ)  ॥अथ श्रीपञ्चमुखहनुमत्कवचम् ॥ श्रीगणेशाय नम:| ॐ अस्य श्रीपञ्चमुखहनुमत्कवचमन्त्रस्य ब्रह्मा ऋषि:| गायत्री छंद:| पञ्चमुख-विराट् हनुमान् देवता| ह्रीम् बीजम्| श्रीम् शक्ति:| क्रौम् कीलकम्| क्रूम् कवचम्| क्रैम् अस्त्राय फट् | इति दिग्बन्ध:|  या स्तोत्राचा ऋषि ब्रह्मा असून छंद गायत्री, ह्या स्तोत्राची देवता पंचमुख-विराट-हनुमान आहे, ह्रीम् बीज आहे, श्रीम् शक्ति आहे, क्रौम् कीलक आहे, क्रूम् ... Read More »

श्री पंचमुख-हनुमत्-कवच – हिन्दी अर्थ

॥हरि: ॐ ॥   ॥श्री पंचमुख-हनुमत्-कवच ॥   (मूल संस्कृत और हिन्दी अर्थ)   ॥अथ श्रीपञ्चमुखहनुमत्कवचम् ॥   श्रीगणेशाय नम:| ॐ अस्य श्रीपञ्चमुखहनुमत्कवचमन्त्रस्य ब्रह्मा ऋषि:| गायत्री छंद:| पञ्चमुख-विराट् हनुमान् देवता| ह्रीम् बीजम्| श्रीम् शक्ति:| क्रौम् कीलकम्| क्रूम् कवचम्| क्रैम् अस्त्राय फट् | इति दिग्बन्ध:|  इस स्तोत्र के ऋषि ब्रह्मा हैं, छंद गायत्री है, देवता पंचमुख-विराट-हनुमानजी हैं, ह्रीम् बीज है, श्रीम् शक्ति है, ... Read More »

गुरुकुल, जुईनगर येथील ‘श्रीअश्वत्थ मारुती पूजन’ (Shree Ashwattha Maruti Poojan)

परमपूज्य सद्‍गुरु बापू नेहमीच आपल्या बोलण्यातून श्रीहनुमंताचा (Shree Hanumant) उल्लेख “माझा रक्षकगुरु” असा करतात व बापूंनी तसे स्पष्टपणे आपल्या श्रीमद्‍पुरुषार्थ ग्रंथराजात लिहीलेही आहे. त्यांच्याच बोलण्यानुसार प्रत्येक भक्ताची भक्तीमार्गाची सुरुवात हनुमंतापासूनच होते. श्रीहरिगुरुग्राम येथे दर गुरुवारी होणा-या सांघिक उपासनेमध्येसुद्धा “ॐ श्रीरामदूताय हनुमंताय महाप्राणाय महाबलाय नमो नम:” ह्या जपाचा समावेश आहे आणि स्टेजवरील मांडणीमध्ये बापूंच्या बैठकीच्या मागे आपण रक्षकगुरु श्रीहनुमंताची मोठी तसबीरही ... Read More »

श्रीअनिरुद्ध गुरुक्षेत्रम्‌ मधील हनुमान चलिसा पठण (Hanuman Chalisa)

श्रद्धावानांसाठी सर्वोच्च तिर्थक्षेत्र असणार्‍या श्रीअनिरुद्ध गुरूक्षेत्रम्‌ येथे दर वर्षी ‘हनुमान चलिसा पठण’ सप्ताह आयोजित केला जातो. यात सलग सात दिवस कमीतकमी १०८ श्रद्धावान प्रेमाने व श्रद्धेने १०८ वेळा (सकाळी ८ ते रात्रौ ८ या दरम्यान) हनुमान चलिसाचे पठण करतात. यावर्षी मंगळवार दिनांक २१ एप्रिल २०१५ (अक्षय तृतिया) पासून सोमवार २७ एप्रिल २०१५ (वैशाख शुद्ध दशमी) पर्यंत ‘हनुमान चलिसा पठण’ होणार ... Read More »

सजल मूल जिन्ह सरितन्ह नाहीं … (Sajal Mool Jinha Saritanha Naahi …) – Aniruddha Bapu Hindi Discourse 12 Jan 2006

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सजल मूल जिन्ह सरितन्ह नाहीं … (Sajal Mool Jinha Saritanha Naahi …) गंगाजी जैसी बारह महीने बहनेवाली नदियों का मूल सजल होने के कारण वे कभी नहीं सूखतीं। इसी तरह भगवान का नाम जिस मानव की जीवन-नदी का मूल होता है, उसका जीवन कभी नहीं सूखता। वहीं, जिन्हें केवल बरसात का ही आसरा है, वे वर्षा के बीत जाने पर ... Read More »

झूठे अहं से मुक्ति पाने का आसान उपाय (An Easy Way To Get Rid Of False Self) – Aniruddha Bapu Hindi Discourse 18 Sep 2014

स्वार्थ (Swaarth)

झूठे अहं से मुक्ति पाने का आसान उपाय | हनुमानजी का स्मरण करना और अपने आराध्य का ध्यान करना इस प्रक्रिया से मानव झूठे अहं से अपना पाला  छुडा सकता है। झूठे अहं से मुक्त होने के सरल उपाय के बारे में परम पूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू  ने अपने १८ सितंबर २०१४ के  हिंदी प्रवचन में बताया, जो आप ... Read More »

शोकविनाशक हनुमानजी (ShokVinaashak Hanumanji) – Aniruddha Bapu Hindi Discourse 18 Sep 2014

स्वार्थ (Swaarth)

शोकविनाशक हनुमानजी | ShokVinashak Hanumanji हनुमानजी जिस तरह सीताशोकविनाशक हैं, उसी तरह रामशोकविनाशक एवं भरतशोकविनाशक भी हैं। मानव को यह सोचना चाहिए कि जो सीता और श्रीराम के शोक हो दूर कर सकते हैं, वे हनुमानजी क्या मेरे शोक को दूर नहीं कर सकते? अवश्य कर सकते हैं। हनुमानजी के शोकविनाशक सामर्थ्य के बारे में परम पूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ... Read More »

भयभंजक हनुमानजी (Bhaya-Bhanjak Hanumanji) – Aniruddha Bapu Hindi Discourse 18 Sep 2014

स्वार्थ (Swaarth)

भयभंजक हनुमानजी | मानव के जीवन में रामरूपी कर्म और कर्मफलरूपी सीता के के बीच में सेतु बनाते हैं महाप्राण हनुमानजी! रावणरूपी भय मानव के कर्म से कर्मफल को दूर करता है। रामभक्ति करके मानव को चाहिए कि वह हनुमानजी को अपने जीवन में सक्रिय होने दें। हनुमानजी के भयभंजक सामर्थ्य के बारे में परम पूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ... Read More »

झूठे मैं से छुटकारा कैसे पाया जाये (How to Get Rid of False Self) – Aniruddha Bapu Hindi Discourse 11 Sep 2014

झूठे मैं से छुटकारा कैसे पाया जाये जब तक मानव का हनुमानजी के साथ कनेक्शन नहीं जुडता, तब तक उसका विकास नहीं हो सकता और हनुमानजी के साथ मानव का कनेक्शन जुडने के आडे मानव का झूठा मैं आता है। इस झूठे मैं को खत्म करने के लिए मानव को भक्तिमय प्रयास करना चाहिए। झूठे मैं से छुटकारा कैसे पाया ... Read More »

जय कपीस तिहुँ लोक उजागर – 2 (Jai Kapees Tihun Lok Ujaagar-2) – Aniruddha Bapu Hindi Discourse 11 Sep 2014

जय कपीस तिहुँ लोक उजागर | मन, प्राण और प्रज्ञा ये मानव के भीतर रहने वाले तीन लोक हैं । मानव के भीतर के इन तीनों लोकों का उजागर होना मानव का विकास होने के लिए आवश्यक होता है । इन तीनों लोकों को उजागर करने के हनुमानजी के कार्य के बारे में सद्गुरुपरम पूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने ... Read More »

जय कपिश तिहु लोक उजागर ( Jai Kapish Tihu Lok Ujagar ) – Aniruddha Bapu Hindi Discourse 11 Sep 2014

जय कपिश तिहु लोक उजागर | सन्तश्रेष्ठ श्रीतुलसीदासजी श्रीहनुमानचलिसा स्तोत्र में हनुमानजी को ‘कपिश’ कहकर संबोधित करते हैं । ‘कपिश’ यह संबोधन ‘कपि’ और ‘ईश’ इन दो शब्दों का अर्थ अपने ११ सितंबर २०१४ के हिंदी प्रवचन में परम पूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धजी ने बताया । जिसे आप इस इस व्हिडियो में देख सकते हैं l ॥ हरि ॐ ॥ ॥ ... Read More »

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर (Jai Hanuman Gyan Gun Sagar) – Aniruddha Bapu Hindi Discourse 11 Sep 2014.

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर । सन्तश्रेष्ठ श्रीतुलसीदासजी हनुमानजी को हमेशा ही बडे प्यार से संबोधित करते हैं । श्रीहनुमानचलिसा स्तोत्र के प्रारंभ में वे ‘जय हनुमान ज्ञान गुन सागर’ कहकर हनुमानजी की जयजयकार करते हैं । महाप्राण श्रीहनुमानजी के ज्ञानगुनसागर स्वरूप के बारे में परम पूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धसिंह ने अपने ११ सितंबर २०१४ के हिंदी प्रवचन में बताया, जो आप ... Read More »

झूठे मैं से उत्पन्न होनेवाले विचार घातक होते हैं (False Self generated Thoughts are Harmful) – Aniruddha Bapu Hindi Discourse 11 Sep 2014

झूठे मैं से उत्पन्न होनेवाले विचार घातक होते हैं । अपने ‘झूठे मैं’ के कारण मानव स्वयं के बारे में गलत कल्पनाएँ ही करता रहता है । मानव जब कुछ भी नहीं करता, तब भी उसका मन विचार करते रहता है और विचार यह भी एक कर्म होने के कारण कर्मफल के रूप में इन विचारों का परिणाम अवश्य ही मानव ... Read More »

झूठा मैं कैसे उत्पन्न होता है (How the False Self gets created) – Aniruddha Bapu Hindi Discourse 21 August 2014

How the False Self gets created मानव के मन में विचारचक्र लगातार चलता रहता है । मानव किसी भी बात के बारे में डर की भावना से सोचता है । इस अनुचित विचारशृंखला से उसका सही मैं दबकर झूठा मैं उसपर हावी हो जाता है । ‘झूठे मैं’  की उत्पत्ति के बारे में  परम पूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धसिंह ने अपने २१ ... Read More »