Google

Nowadays, through news and television we hear a lot about autonomous or driverless automobiles. Artificial Intelligence has an immense contribution in this area. Google is currently working on a project called ‘Google Driverless Car’. With the help of Laser radars and sensors, obstructions on the roads can be detected and then fed to their software program. Then with the help of this information, the program decides the route that the car will take. Although these fully automatic or autonomous cars haven’t arrived in the market, yet minor subsets of these are being used to an extent in present day cars. The Intelligent parking system, Collision avoidance system and Driver assistance system are very much in use in today’s vehicles. Such automated systems, built with the application of AI, assist drivers and help in reducing the number of accidents caused by human errors. With the ever increasing number of cars on the road and considering the difficulties faced by drivers, efforts of creating automatic cars would surely be appreciated by all. A notable fact is that in 2012, Government of Nevada, in the United States has passed a law which permits driverless cars to ply on roads.

ई-मेल – भाग ५

पिछले लेख में हम ने ई-मेल की संकल्पना को समझा। ई-मेल इस्तेमाल करते समय सामनेवाले व्यक्ति से सीधे संपर्क नहीं होता। इसलिए उस व्यक्ति के समक्ष हम खुद को कितनी अच्छी तरह से पेश कर सकते हैं यह बात मायने रखती है। इसी को ई-मेल एटिकेट्स (शिष्टाचार) कहा जाता है। इन शिष्टाचारों द्वारा यह जाना जाता है कि हम कितने प्रभावी ई-मेल यूजर हैं। यह कहना कतई गलत नहीं होगा

ई-मेल – भाग ४

ई-मेल फोल्डर का प्रभावी उपयोग : मान ले हम एक ही साथ ४ प्रोजेक्टस्पर काम कर रहे हैं व इन चारों प्रोजेक्ट से संबंधित ई-मेल हमारे इनबॉक्स में आती हैं। समय के साथ-साथ मेल्स् की संख्या भी बढ़ती हैं व पुराने मेल्स् ढूंढ़ना कठीन होता जाता है, तब मेल्स् का प्रकारानुसार विभाजन आवश्यक हो जाता है व यही फोल्डर व्यवस्था काम आती हैं। प्रोजेक्ट अनुसार फोल्डर बनाकर वहीं मेल्स् को

ई-मेल – भाग ३

ई-मेल सर्च :     भेजे व प्राप्त होनेवाले मेल्स की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जाती हैं। ऐसे में पुराना मेल खोजना हो तो ई-मेल सर्च समय की बर्बादी से बचाता है। इस के दो भाग हैं – बेसिक व एडवान्सड। जी-मेल के होम-पेज पर एक लम्बा चौड़ा सर्च बार होता है। बेसिक सर्च : यदि हमें फेसबुक शब्द वाला ई-मेल ढूंढ़ना हैं – सर्च बार में फेसबुक लिखे। व

ई-मेल - भाग २

थीम्स : मूल ई-मेल का इन्टरफ़ेस सफ़ेद होता है । इस में रंग संगति व पृष्ठचित्र बदला जा सकता हैं । सबसे पहले जी-मेल के होम-पेज में आए । अगर चॅट ऑफ करना है, तो उसके बाजूवाले रेडिओ बटन पर क्लिक करें । इसके बाद सेव्ह चेंजेस्का बटन गहरा होगा वहाँ क्लिक करे । अब होम-पेज पर गुगल हँगआऊटस् बाँए निचले कोने में दिखना बंद हो जाएगा । यहाँ चॅट ऑन

ई-मेल – भाग १

संदेशो के लेनदेन पर पहले भी संसार चलता था, आज भी चल रहा है, ओर आगे भी चलता रहेगा। संदेश का समय रहते पहुँचना बहुत आवश्यक है। यद्यपि प्राचीन व आधुनिक संदेश माध्यमों में काफी अन्तर हैं तथापि मूल संकल्पना वहीं हैं। प्राचीन काल में संदेश वहन का कार्य राजा महाराजा के दूत किया करते थे। जिस में बहुत समय लगता था। धीरे-धीरे समय के साथ-साथ यातायात के साधनों में

यू टयूब - भाग ३

हमारे द्वारा अपलोड किए गए व्हिडिओ को कैसे देखना है? हमारे मन में सहज ही यह बात आ चुकी होगी, हम जो व्हिडिओ अपलोड करते हैं, उसकी लिस्ट (सूची) हमें कहाँ मिलेगी? इसके लिए ‘व्हिडिओ मॅनेजर’ यह विकल्प यू-टयुब ने उपलब्ध करवा दिया है। इस के माध्यम से हम यू-टयुब पर रखे गए अपने व्हिडिओ के सेटिंग भी एडिट कर सकते हैं। व्हिडिओ मॅनेजर : १) हमने यह तो देखा

यू टयुब - भाग २

यू-टयुब चॅनेल्स : १) यू-टयुब चॅनेल्स यानि क्या? बहुत सारे लोग यू-टयुब पर व्हिडिओज् सतत अपलोड (upload) करते रहते हैं। अपलोड करना यानी किसी व्हिडिओ को कॉम्प्युटर से यू-टयुब पर डालना। यू-टयुब का घोष वाक्य ही ‘Broadcast Yourself’ इस प्रकार है। अर्थात हम अपने व्हिडिओज् इस यू-टयुब की सहायता से पूरी दुनिया में प्रसारित कर सकते हैं। यू-टयुब पर अपना खुदका चॅनल बनाना कोई बड़ी बात नहीं। कोई भी सामान्य

यू टयुब - भाग १

आज के समय में ‘गुगुल’ के बाद ‘यू-टयुब’ यह दुनिया में दूसरे क्रमांक का सर्च इंजन हैं। एक महीने में एक अरब से भी अधिक लोग यू-टयुब इस वेबसाईट के साथ संपर्क रखते हैं। महीने भर में साधारण तौर पर देखा जाए तो छ: अरब घंटों के विविध विषय और क्षेत्र के अन्तर्गत आनेवाले व्हिडिओ यू-टयुब पर देखे जाते हैं। उसी प्रकार हर मिनिट पर लगभग सौं घंटों के व्हिडिओ

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