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झूठे मैं से छुटकारा कैसे पाया जाये (How to Get Rid of False Self) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 11 Sep 2014

झूठे मैं से छुटकारा कैसे पाया जाये जब तक मानव का हनुमानजी के साथ कनेक्शन नहीं जुडता, तब तक उसका विकास नहीं हो सकता और हनुमानजी के साथ मानव का कनेक्शन जुडने के आडे मानव का झूठा मैं आता है। इस झूठे मैं को खत्म करने के लिए मानव को भक्तिमय प्रयास करना चाहिए। झूठे मैं से छुटकारा कैसे पाया जा सकता है इस बारे में परम पूज्य सद्गुरु श्री

नासै रोग हरै सब पीरा (Naasai rog harai sab peera) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 11 Sep 2014

नासै रोग हरै सब पीरा | मानव के भीतर रहने वाला ‘झूठा मैं’ उस मानव के मन में भय और भ्रम उत्पन्न करता है । मन को बीमारियों का उद्‍भवस्थान कहा जाता है । भय के कारण ही पहले मन में और परिणामस्वरूप देह में रोग उत्पन्न होते हैं । संतश्रेष्ठ श्री तुलसीदासजी द्वारा विरचित श्रीहनुमानचलिसा की ‘नासै रोग हरै सब पीरा’ इस पंक्ति में छिपे भावार्थ के बारे में

जय कपीस तिहुँ लोक उजागर - 2 (Jai Kapees Tihun Lok Ujaagar-2) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 11 Sep 2014

जय कपीस तिहुँ लोक उजागर | मन, प्राण और प्रज्ञा ये मानव के भीतर रहने वाले तीन लोक हैं । मानव के भीतर के इन तीनों लोकों का उजागर होना मानव का विकास होने के लिए आवश्यक होता है । इन तीनों लोकों को उजागर करने के हनुमानजी के कार्य के बारे में सद्गुरुपरम पूज्य सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने  अपने ११ सितंबर २०१४ के प्रवचन में बताया, जो आप

जय कपिश तिहु लोक उजागर ( Jai Kapish Tihu Lok Ujagar ) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 11 Sep 2014

जय कपिश तिहु लोक उजागर | सन्तश्रेष्ठ श्रीतुलसीदासजी श्रीहनुमानचलिसा स्तोत्र में हनुमानजी को ‘कपिश’ कहकर संबोधित करते हैं । ‘कपिश’ यह संबोधन ‘कपि’ और ‘ईश’ इन दो शब्दों का अर्थ अपने ११ सितंबर २०१४ के हिंदी प्रवचन में परम पूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धजी ने बताया । जिसे आप इस इस व्हिडियो में देख सकते हैं l ॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥ ॥ अंबज्ञ ॥

झूठे मैं से उत्पन्न होनेवाले विचार घातक होते हैं (False Self generated Thoughts are Harmful) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 11 Sep 2014

झूठे मैं से उत्पन्न होनेवाले विचार घातक होते हैं । अपने ‘झूठे मैं’ के कारण मानव स्वयं के बारे में गलत कल्पनाएँ ही करता रहता है । मानव जब कुछ भी नहीं करता, तब भी उसका मन विचार करते रहता है और विचार यह भी एक कर्म होने के कारण कर्मफल के रूप में इन विचारों का परिणाम अवश्य ही मानव पर होता रहता है । ‘झूठे मैं’ से प्रेरित विचारों

झूठा मैं कैसे उत्पन्न होता है (How the False Self gets created) - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 21 August 2014

How the False Self gets created मानव के मन में विचारचक्र लगातार चलता रहता है । मानव किसी भी बात के बारे में डर की भावना से सोचता है । इस अनुचित विचारशृंखला से उसका सही मैं दबकर झूठा मैं उसपर हावी हो जाता है । ‘झूठे मैं’  की उत्पत्ति के बारे में  परम पूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धसिंह ने अपने २१ अगस्त २०१४ के प्रवचन में मार्गदर्शन किया, जो आप इस

स्वार्थ (Swaarth)

स्वार्थ हा शब्द व्यवहारात नकारात्मक अर्थाने वापरला जातो. पण स्वार्थ या शब्दाचा खरा मूळ अर्थ ‘स्वत:चा पुरुषार्थ’ असा आहे. स्वार्थ शब्दाच्या खर्‍या अर्थाबद्दल परम पूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या ११ सप्टेंबर २०१४ रोजीच्या मराठी प्रवचनात श्री हरिगुरुग्राम येथे सांगितले, जे आपण या व्हिडियोत पाहू शकता. ॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥ ॥ अंबज्ञ ॥

झूठे मैं से मुक्ति कैसे पायी जा सकती है (How to get rid of False Self)  - Aniruddha Bapu Hindi Discourse 21 August 2014

मानव के जीवन में लोग जो उसके बारे में कहते हैं उसके आधार पर वह मानव अपनी एक झूठी प्रतिमा बना लेता है और वही उसका सही मैं है यह वह मान लेता है । इस भ्रम कारण से ही उसके जीवन में रण चलता रहता है । भगवान की शरण में जाकर इस ‘ झूठे मैं ’ के रण से मुक्ति पायी जा सकती है, इस बारे में परम

ब्राह्ममुहूर्ताचे महत्त्व - भाग २ (The Importance of Brahma Muhoorta- Part 2) - Aniruddha Bapu Marathi Discourse 31 March 2005

ब्राह्ममुहूर्ताचे महत्त्व  – भाग २ रोज ब्राह्ममुहूर्तावर उठून उपासना करणे ज्यांना शक्य आहे त्यांनी अवश्य करावे, पण आजच्या धकाधकीच्या काळात सर्वांनाच हे करणे सहज शक्य होणार नाही, तरीही महिन्यातून एकदा तरी ब्राह्ममुहूर्तावर उठून उपासना करणे हे अचिन्त्य लाभ देणारे आहे. ब्राह्ममुहूर्ताच्या वेळी आत्माराम साक्षीरूपात न राहता चेतन स्वरूपात आमच्या सत्प्रवृत्तीला प्रेरणा देतो, हे लक्षात घेऊन ही संधी साधली पाहिजे. ब्राह्ममुहूर्ताच्या महत्त्वाबद्दल परम पूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या ३१ मार्च २००५ रोजीच्या प्रवचनात

एएडिएम सेवा- अनन्त चतुर्दशी २०१४ (AADM Seva- Anant Chaturdashi 2014) - Aniruddha Bapu Marathi Discourse 11 Sep 2014

अनिरुद्धाज अ‍ॅकॅडमी ऑफ डिझॅस्टर मॅनेजमेंट (AADM)  के स्वयंसेवकों के द्वारा अनन्त चतुर्दशी, ८ सितंबर २०१४ को गणपति पुनर्मिलाप (विसर्जन) कार्यक्रम में की गयी सेवा की जानकारी सद्गुरु श्री अनिरुद्धजी ने यानी बापु ने दी l मुंबई में ६१ जगह और मुंबई के बाहर ५ शहरों में यह(AADM)  सेवा की गयी l इस सेवा में ४७४५ स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया, जिनमें ७१ मेडिकल्स स्वयंसेवकों का यानी डॉक्टर्स और पॅरामेडिकल्स का सहभाग

ब्राह्ममुहूर्त ही प्रार्थना करण्यासाठी उत्तम वेळ (The best time to pray is Brahma Muhoorta) - Aniruddha Bapu Marathi Discourse 31 March 2005

यज्ञाला संस्कृतमध्ये मख असे म्हणतात. मानवाने लक्षात घ्यायला हवे की राम मखत्राता आहेच, पण तो माझ्या जीवनात मखत्राता स्वरूपात प्रकटावा यासाठी मला मखकर्ता व्हायला हवे. रामप्रहरी राम घ्यावा म्हणजेच भगवंताचे नाम घ्यावे असे म्हणतात. ब्राह्ममुहूर्तावर नामस्मरण, प्रार्थना आदि करणे का महत्त्वाचे आहे याबद्दल परम पूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या ३१ मार्च २००५ रोजीच्या प्रवचनात सांगितले, जे आपण या व्हिडियोत पाहू शकता. ॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥ ॥ अंबज्ञ ॥

सहस्र तुलसीपत्र अर्चन विशेषांक (Sahastra Tulsipatra Visheshank)

दैनिक ‘प्रत्यक्ष’ के कार्यकारी संपादक श्री. अनिरुद्ध धैर्यधर जोशी अर्थात हम सबके चहीते सद्गुरु अनिरुद्ध बापू द्वारा लिखित, संतश्रेष्ठ श्रीतुलसीदासजी के ‘श्रीरामचरितमानस’ लिखित सुन्दरकाण्ड पर आधारित ‘तुलसीपत्र’ नामक अग्रलेखश्रृंखला का 1000वां लेख दि. 05-08-2014 को प्रकाशित हुआ। इस अग्रलेखश्रृंखला द्वारा बापू श्रद्धावानों के जीवन के सभी क्षेत्रों में विकास करने संबंधी मार्गदर्शन कर रहे हैं, दुष्प्रारब्ध से लड़ने की कलाकुशलता सिखा रहे हैं और साथ ही साथ संकटों से समर्थरूप

रामनाम सहज सोपे नाम (Ram Naam is Simple and Easy) - Aniruddha Bapu Marathi Discourse 31 March 2005

परीक्षेमध्ये ज्याप्रमाणे आधी जे प्रश्न सोपे आहेत ते सोडवले पाहिजेत, त्याप्रमाणे परमार्थातही सर्वांत सहजसोप्या असणार्‍या अशा रामनामापासून सुरुवात केली पाहिजे. हे सहज नाम म्हणजेच रामनाम घेता घेता सहजपणे सहज प्राणायाम घडेल आणि त्यातून रामनाम अधिक दृढ होईल. सहजनाम असणार्‍या रामनामाबद्दल आणि रामनामामुळे मिळणार्‍या सहजलाभांबद्दल परम पूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या  ३१ मार्च २००५ रोजीच्या प्रवचनात सांगितले, जे आपण या व्हिडियोत पाहू शकता. ॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥ ॥ अंबज्ञ

श्वासोच्छ्वासक्रियेत चालणारा नामजपयज्ञ (Naam-jap-yajna in Breathing) - Aniruddha Bapu Marathi Discourse 31 March 2005

श्वासोच्छ्वास हा अजपाजप आहे म्हणजेच मुद्दाम न जपता आपोआप होणारा जप आहे. हा ’हंस: सोऽहम्’ चा जप आहे, असेही म्हणतात. श्वासोच्छ्वासाची क्रिया मन, प्राण, प्रज्ञा यांच्याशी संबंधित असून त्रिताप दूर करणारी आहे. श्वासोच्छ्वासात चालणार्‍या नामजपयज्ञ याबद्दल परम पूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या ३१ मार्च २००५ रोजीच्या प्रवचनात सांगितले, जे आपण या व्हिडियोत पाहू शकता.  ॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥ ॥ अंबज्ञ ॥

सहजनाम (Sahaj - Naam) - Aniruddha Bapu Marathi Discourse 31 March 2005

सर्व नामांमध्ये रामनाम आणि गुरुनाम यांना सहजनाम म्हटले जाते. मानवाच्या जीवनात उचितास वाढवणे, अनुचितास नष्ट करणे, मानवाचा जीवनविकास घडवणे अशा प्रकारची सर्व कार्ये सहजनाम करते. रामनामाच्या सहजनामत्वाबद्दल परम पूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्धांनी त्यांच्या ३१ मार्च २००५ रोजीच्या प्रवचनात सांगितले, जे आपण या व्हिडियोत पाहू शकता. ॥ हरि ॐ ॥ ॥ श्रीराम ॥ ॥ अंबज्ञ ॥